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फासीवाद पर कविताएं लिखने वाले तब भी चुप थे, आज भी चुप हैं

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*मनीश आजाद

 5 मार्च 1966 को भारत सरकार ने अपनी ही जनता पर बम बरसाये थे। इसी दिन हवाई बमबारी करके मिज़ोरम के आइज़ल शहर को लगभग बर्बाद कर दिया गया था। बम बरसाने वाले पायलटों में ‘राजेश पायलट’ और ‘सुरेश कलमाडी’ भी शामिल थे, जो बाद में कांग्रेस के बड़े नेता बने। 

जब आसाम विधानसभा में बम के खोखे दिखाकर सवाल पूछा गया तो कांग्रेस सरकार ने बेहयाई से उत्तर दिया कि ये बम नहीं ‘फ़ूड पैकेट्स’ हैं। 

यही ‘फूड पैकेट्स’ आज बस्तर के आदिवासियों पर गिराए जा रहे हैं। पिछले 3 माह में 4 बार ड्रोन से बमबारी की जा चुकी है।

फासीवाद पर हल्ला मचाने, फासीवाद पर कविताएं लिखने वाले तब भी चुप थे, आज भी चुप हैं। 

आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन बचाने के शानदार आंदोलन को दुस्साहसवाद बताने वालों को सरकार का अपनी ही जनता पर बम बरसाने का दुस्साहस नहीं दिखता।

यहां पर ‘निमोलर’ की कविता ‘पहले वे उनके लिए आये….’

एक बार फिर सटीक बैठती है।

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