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मध्‍यप्रदेश में बारिश में भीगा खुले में पड़ा हजारों क्विंटल गेंहू

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चेतावनी के बाद कुंभकरणीय नींद में कृषिमंत्री कमल पटेल….अरबों रूपये की बर्बादी के लिए जिम्‍मेदार कौन?….मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों का भी असर नहीं….किसान अपनी फसल को बेचने और बचाने में हो रहा परेशान

विजया पाठक,

       मध्यप्रदेश में भी तूफान ताऊ ते के कारण खरीदी केंद्रों पर खुले में रखा लाखों क्विंटल गेहूं भीग गया। सतना, सागर, दतिया, होशंगाबाद, गुना समेत कई जगहों पर खुले में खरीदी केंद्रों पर रखा गेहूं भीग गया। अकेले विंध्य के दो जिले सतना और रीवा में 120 करोड़ रुपए के गेहूं को नुकसान पहुंचा है। कुछ ऐसा ही हाल प्रदेश के अन्‍य सभी जिलों का है जहां अरबों रूपये का गेंहू खुले में रखे होने के कारण भीग गया है। तीन दिन से प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुक कर हो रही बारिश से खेतों में प्याज को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों की मेहनत पर पानी अफसरों की लापरवाही से फिरा है। गेहूं खरीदी के बाद केंद्रों से नागरिक आपूर्ति निगम के अफसरों ने गेहूं को उठवाया ही नहीं। परिवहन की व्यवस्था न होने के कारण गेहूं भीगा है, जबकि एक सप्ताह से सबको पता था कि तूफान की वजह से बारिश होने वाली है। इसके बाद भी अफसर सोए रहे। वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल कुंभकरण की नींद सोये हुए हैं। उन्‍हें इस बात से ताल्‍लुक ही नहीं है कि प्रदेश में बड़े स्‍तर पर गेंहू की खरीदी हो रही है और मौसम में बदलाव हो रहे हैं ऐसे में बारिश होने पर खुले में रखे अनाज का क्‍या हाल होगा। जबकि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अनाज की खरीदी होने के पहले ही विभाग के मंत्री और अफसरों को सख्‍त निर्देश दिए थे कि अनाज की खरीदी में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्‍त नही की जाएगी। बावजूद आज हालात वे ही बने जिनका अंदेशा सरकार के मुखिया को भी था और प्रदेश के किसानों को भी था।          पूरा प्रदेश जहां महामारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है वहीं संकट के दौर में किसान अपनी फसल को बेचने और बचाने में परेशान हो रहा है। बेमौसम बरसात होने से किसान की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। आखिर सवाल उठ रहा है कि‍ इस लापरवाही का जिम्‍मेदार कौन है। गत दिनों पूर्व आई तेज आंधी और बारिश ने मंडियों में खरीदा गया गेहूं भिगो दिया, लगता है कि मंडी के अफसर बारिश का इंतजार कर रहे थे। ऐसा लगातार तीसरी बार हुआ है, जब बारिश में मंडी में लगा हुआ गेहूं भी गया। जिम्मेदार अब तक यह तय नहीं कर सके हैं कि बार-बार भीग कर बेकार हो रहे गेहूं के लिए कौन जिम्मेदार है। गेंहू खुले में रखा था जो अंकुरित होने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार भीगने के बाद कोई भी अनाज खाने लायक नहीं बचता है।       आपकों बता दें कि प्रदेश में मार्च के आखिरी सप्‍ताह से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद पूरे मध्य प्रदेश में शुरु हो गई है और यह खरीदी 25 मई 2021 तक चलेगी। वैसे सरकारी आदेशों के अनुसार बात करें तो कोरोना संक्रमण की स्थितियों को देखते हुए किसी भी केंद्र पर 20 से ज्यादा किसानों की एक समय में मौजूदगी पर रोक लगाई गई है। वहीं, भुगतान में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसलिए खरीद सप्ताह में पांच दिन हो रही है। दो दिन हिसाब-किताब हो रहा है और परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। गर्मी को देखते हुए उपार्जन केंद्रों में किसानों के बैठने के लिए छांव और पानी का इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा है कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न आए, यह जरूर सुनिश्चित कर लें। प्रदेश में समर्थन मूल्य (1975 रुपये प्रति क्विंटल) पर गेहूं बेचने के लिए 24 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है।*जहां भीगा गेंहू, उनमें प्रमुख जिले-* वैसे तो सम्‍पूर्ण प्रदेश की मंडियों या वेयरहाउसों में जहां गेंहू की तुलाई हो रही है वहां गेंहू भीगा है। क्‍योंकि जिम्‍मेदारों ने ऐसी व्‍यवस्‍था ही नहीं कि अनाज को भीगने से बचाया जा सके। इनमें कुछ जिले हैं जिनकी जानकारी निम्‍नानुसार है-*सतना-* जिले के खरीदी केंद्रों पर हजारों क्विंटल गेहूं भीगा है। किसान संगठनों के अनुमान के मुताबिक यह नुकसान 120 करोड़ का है। लगातार बारिश में भीग रहे गेहूं के बाद प्रशासन की नींद मंगलवार को टूटी। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सभी एसडीएम, नान और संबंधित विभाग के अधिकारियों की बैठक ली।*रीवा-* यहां पर 15 दिन तक किसान खरीदी केंद्रों के बाहर गेहूं बेचने के लिए खड़े रहे। लेकिन उठाव नहीं होने के कारण गेहूं नहीं खरीदा गया। इसकी वजह से गेहूं भीग गया। यहां पर 30 करोड़ रुपए का नुकसान बताया जा रहा है।*दतिया-* खराब मौसम को देखते हुए दतिया के केंद्रों पर खरीदी बंद कर दी गई। इसकी वजह से ट्रालियों की लंबी लाइन लग गई। लेकिन इसके बाद भी पहले से खरीदा गया गेहूं का उठावा नहीं किया गया। बारिश में 2 लाख क्विंटल गेहूं भीग गया। वहीं किसानों को अपना गेहूं बचाने के लिए परेशान होना पड़ा।*होशंगाबाद-* रविवार से हो रही बारिश के कारण कृषि मंडी में खुले में रखा अनाज भीग गया। जिले के 69 हजार 135 किसानों से 7 लाख 69 हजार 108 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई। अभी 7 लाख 42 हजार 380 मीट्रिक टन गेहूं का ही परिवहन हुआ है। अभी 26 हजार 728 मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन बाकी है।*सागर-* जिले में वैशाख के माह में आषाढ़ की तरह बारिश हुई। मूसलाधार बारिश से पूरा जिला तरबतर हुआ। सोमवार शाम से शुरू हुई बारिश रुक-रुक कर मंगलवार सुबह तक जारी रही, लेकिन यहां भी गेहूं का उठाव नहीं हुआ। खरीदी केंद्रों पर कीचड़ हो गया है। गेहूं भीग गया है।*पिपरिया-* अचानक मौसम बिगड़ने एवं तेज आंधी तूफान से खुले में रखा सहकारी समितियों का समर्थन मूल्य पर खरीदा लगभग एक लाख क्विंटल गेहूं गीला हो गया। जिन समितियों में शासकीय समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीद खुले मैदान में हो रही थी। पानी भर जाने से लाखों कट्टी गेहूं गीला हो गया है। परिवहन की धीमी गति एवं बारदानों की कमी के चलते गेहूं का उठाव नहीं हो पाया। ब्लॉक के 24 गेहूं खरीदी केद्रों पर लगभग 9 लाख क्विंटल गेंहू का उर्पाजन सहकारी समितियों द्वारा सर्मथन मूल्य पर किया जा चुका है। लेकिन खरीदी केंद्रों पर परिवहन नहीं होने से गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा था। परिवहन की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे समितियों में बड़ी मात्रा में गेहूं की लाखों बोरियां पड़ी हुई हैं। खरीदी केंद्रों पर अभी तक लगभग एक लाख क्विंटल से अधिक गेहुं का परिवहन नहीं हो पाने से खुले आसमान के नीचे पड़ा है। किसानों को भुगतान को लेकर भी समस्या आ रही है।*बीना-* मौसम की बेरुखी और परिवहनकर्ता की लापरवाही से तीन केंद्रों पर सात हजार क्विटंल से ज्यादा सरकारी गेहूं भीग गया है। सबसे ज्यादा पांच हजार क्विंटल गेहूं गढ़ापड़रिया केंद्र पर रखा हुआ है। जबकि पुरैना और समेरखेड़ी केंद्र पर करीब दो हजार क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा हुआ है। बारिश से पहले गेहूं की बोरियों की छल्ली लगाकर उसे सुरक्षित रखने के इंतजाम भी नहीं हुए हैं।*भंडारण के इंतजाम अब भी नाकाफी*           कुछ जिलों के गोदामों में अब तक गत वर्ष खरीदा गया अनाज मौजूद है तो वहीं कुछ जिलों में भंडारण की पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में संकट खड़ा हो सकता है। कुछ जिलों की जानकारी निम्‍नानुसार है-*मंदसौर-* जिले में 2.25 लाख टन उपज की खरीदी होगी। 146 गोदामों में भंडारण होगा। पिछले साल जिले में गेहूं की 2.80 लाख टन खरीदी हुई थी। गोदामों में एक लाख मीट्रिक टन गेहूं भरा है।*खंडवा-* जिले में 2 लाख 30 हजार मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य है। भंडारण के लिए 65 गोदाम हैं। इनकी क्षमता साढ़े तीन लाख टन गेहूं की है।*अलीराजपुर-* जिले में 3200 टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य है। यहां भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था है।*खरगोन-*  जिले में दो लाख टन खरीदी का लक्ष्य है। 61 गोदामों में 1 लाख 63 हजार टन गेहूं भंडारण की क्षमता है, वहीं करीब 28 हजार टन गेहूं को जरूरत पड़ने पर ओपन कैप में रखा जाएगा।*शाजापुर-*  जिले में चार लाख 80 हजार उपज की खरीदी की संभावना है। चार लाख 30 हजार टन उपज गोदामों में रखेंगे। शेष सायलो सेंटर में भंडारण होगा।*धार-* जिले में गेहूं की खरीदी का लक्ष्य तीन लाख 75 हजार टन है। जिले के 98 गोदामों की क्षमता 3 लाख 66 हजार है।        वहीं दिखावटी तेवर दिखाते हुए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने कहा कि उपार्जन किए गए अनाज को खराब करने पर कार्रवाई होगी। मंत्री बिसाऊ लाल सिंह द्वारा जिला दतिया सतना रीवा होशंगाबाद शहडोल एवं अनूपपुर जिले के कलेक्टर और इन्हीं जिलों के जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम से दूरभाष पर चर्चा की तथा निर्देश दिए गए कि सभी उपार्जन केंद्रों से गेहूं, चना, मसूर, सरसों का उठाओ तत्काल कराया जाए। मंत्री महोदय यह निर्देश पहले भी दे सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आपको बता दें कि प्रदेश में विभाग द्वारा अभी तक गेहूं, चना, मसूर का 115 लाख 90 हजार 938 मेट्रिक टन का उपार्जन किया जा चुका है। इसके अलावा भी अभी काफी अनाज विक्रय के लिए रह गया है। वहीं केवल गेंहू की बात की जाए तो कोरोना के कारण खरीदी में देरी के बावजूद अब तक रिकॉर्ड 1.25 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। बहुत कम मात्रा में गेहूं गोदामों तक पहुंचने की बात सामने आई है। इस वर्ष 2021-21 के लिए प्रदेश में 19 लाख 46 हजार किसानों ने समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन कराया था। इसमें से 15 लाख 29 हजार किसानों ने 122 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का विक्रय किया।*अनाज को सड़ाने में मध्‍यप्रदेश नंबर वन?-* महालेखा नियंत्रक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नियोजन नहीं होने के कारण 2011-12 से 2014-15 के बीच में 5060.63 मिट्रिक टन अनाज सड़ गया। इसमें 4557 मीट्रिक टन गेहूं था। एक समाचार पत्र के अनुसार, 21 मार्च 2017 को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने संसद में दिये जबाब में बताया था कि मध्यप्रदेश के सरकारी गोदामों में 2013-14 और 2014-15 में करीब 157 लाख टन अनाज सड़ गया है जिसकी अनुमानित कीमत 3 हजार 800 करोड़ रुपए है। इसमें 103 लाख टन चावल और 54 लाख टन गेहूं शामिल है। जबलपुर जिले में पिछले तीन साल के दौरान जिले में लगभग 15 हजार से ज्यादा धान और गेहूं केप स्टोर (तिरपाल से ढका) में सड़ गया है। इस साल केप स्टोर में धान बड़ी मात्रा में सड़ चुका है। दस साल पहले जबलपुर में 30-35 वेयर हाउस हुआ करते थे। इस बीच केंद्र व राज्य की योजनाओं का लाभ उठाते हुए लोगों और किसानों ने वेयर हाउस की संख्या 230 तक पहुंचा दी है। आज साढे़ सात लाख मिट्रिक टन खाद्यान्न रखने की क्षमता जिले में हो चुकी है। फिर भी केप स्टोर में रखकर अनाज को सड़ाने का औचित्य क्या है?*आमने-सामने समितियां और गोदाम संचालक-* गेहूं भीगने को लेकर खरीद करने वाली सहकारी समितियां और गोदाम संचालक आमने-सामने आ गए हैं। दोनों संस्थाएं इसकी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर थोप रही हैं। ये पूरी समस्या परिवहन में देरी के चलते उपजी है। सबा दो लाख टन से ज्यादा गेहूं गोदामों में भंडारण के लिए स्वीकार नहीं किया गया है। इसकी मुख्य वजह खराब गुणवत्ता और गेहूं में अनुपात से कई गुना नमी बताई गई है। खरीदा गया गेहूं गोदामों में स्वीकृत नहीं होने से अभी 400 करोड़ से अधिक की राशि किसानों के खाते में ट्रांसफर नहीं की गई है। जबतक गोदामों में गेहूं स्वीकृत नहीं होता तबतक किसानों का भुगतान होना मुश्किल है। अब इसके लिए जिम्मेदार कौन है? एक खबर इंदौर से है कि 85 लाख टन गेहूं उत्पादन की तुलना में भंडारण क्षमता लगभग 22 लाख टन ही है। इस कारण 25 करोड़ से ज्यादा कीमत का गेहूं जून की बरसात में भीगकर खराब हो गया है। इसके बाद भी ओपन कैंप में रखा 6 करोड़ रुपये से ज्यादा का लगभग 65 हजार टन गेहूं और खराब हुआ है। किसानों के लिए तो यह साल जैसे काल बन कर आया है। कोरोना ने उन्हें फसल को खेत से निकाल कर मंडी तक ले जाने में काफी परेशान किया है।          अब देखना होगा मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन किसानों का गेंहू भीगा है और जिसकी तुलाई तक नहीं हुई उन किसानों को क्‍या राहत देते हैं। साथ जिन कारणों से या लापरवाहियों से गेंहू भीगा है उन जिम्‍मेदारों पर क्‍या कार्रवाई करते हैं।

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