आगर-मालवा
भारत जोड़ो यात्रा में अब तक आपने राहुल गांधी और उनके इर्द-गिर्द चल रहे नामी चेहरों को देखा, पढ़ा और सुना होगा। आज हम इस यात्रा के तीन ऐसे गुमनाम किरदारों पर फोकस कर रहे हैं, जिनकी कहानियां खुद राहुल व उनकी टीम को भी नहीं मालूम। ये लाइमलाइट से दूर हैं, लेकिन इनका हौसला और जुनून राहुल से कम नहीं है। यात्रा के दौरान पैदल चलते हुए मेरी नजर इन पर पड़ी। ये बिल्कुल आम लड़के हैं, लेकिन इनकी कहानी बेमिसाल है।
40 दिनों से राहुल की यात्रा में चल रहे हिमाचल प्रदेश से आए इस लड़के के हाथ नहीं हैं। मैं इससे बात करने में इतना मशगूल रहा है कि मुझे इसका नाम याद नहीं रहा। सिर्फ उसका चेहरा और कहानी ही दिमाग में घूमती रही। जन्म से ही दोनों हाथ नहीं है। पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। मां स्कूल में खाना बनाने का काम करती हैं। दो बहनें हैं, दोनों की शादी हो चुकी है। 12वीं की परीक्षा दे चुके इस लड़के के दिमाग में सिर्फ भारत यात्रा का नशा है। इंटरनेट पर इसने जब राहुल की भारत यात्रा के बारे में पढ़ा, सुना तो ये हिमाचल से सीधे कर्नाटक जा पहुंचा।
40 दिनों से राहुल की यात्रा में चल रहे हिमाचल प्रदेश से आए इस लड़के के हाथ नहीं हैं। उसने इंटरनेट पर राहुल की भारत यात्रा के बारे में पढ़ा, तो हिमाचल से सीधे कर्नाटक जा पहुंचा।
40 दिन से यात्रा में चल रहा है। हाथ नहीं हैं, लेकिन कदमों की रफ्तार कम नहीं है। यात्रा के दौरान किसी की मदद भी नहीं लेता। कब से चल रहे हो पूछने पर कहता है कि मुझे दिन याद नहीं। बस कश्मीर तक यूं ही जाना है। वजह बताते हुए कहता है कि देश के हालात ऐसे हैं कि ये यात्रा जरूरी है। इनके साथ चल रहे एक सहयात्री ने बताया कि इन्हें 40 दिन हो गए हैं।

अब दूसरी कहानी बिहार के बक्सर जिले से आए हलचल सिंह की। तिरंगा हाथ में उठाए ये लड़का कर्नाटक से यूं ही चल रहा है। ये भारत यात्री नहीं है। गले में आईकार्ड भी नहीं है। जितने तेज कदमों से चलता है, बातों में उससे ज्यादा तेज है। अग्निवीर भर्ती स्कीम से बहुत नाराज है। कहता है कि अग्निवीर तो छोड़िए, अब सेना में भर्ती होने का मन ही नहीं है। पहले मैं सिलेक्ट हुआ था तो कहा गया कि अग्निवीर के माध्यम से भर्ती होगी। एक बच्चा गोद में लिए हो और एक पेट में लिए हो.. अब बोलते हैं कि गोद वाले बच्चे को फेंक दो और पेट वाले बच्चे का भरोसा करो.. ऐसा कैसे होता है, आप ही बताइए। मैं कश्मीर तक ऐसे ही राहुल गांधी के साथ पैदल चलना चाहता हूं, ताकि इस देश में बदलाव हो सके।
बिहार के बक्सर जिले से आए हलचल सिंह। तिरंगा हाथ में उठाए ये लड़का कर्नाटक से यूं ही चल रहा है। कहता है कि कश्मीर तक ऐसे ही राहुल गांधी के साथ पैदल चलना चाहता हूं, ताकि इस देश में बदलाव हो सके।
तीसरी कहानी है हैदराबाद से आए जे संपत बाबू की। संपत के पिता ऑटो ड्राइवर हैं। मां लोगों के घरों में खाना बनाती है। संपत से सवाल पूछने पर जवाब मिला कि जब तेलंगाना में यात्रा थी, तब मेरी सीए की परीक्षा चल रही थी। अब मध्यप्रदेश आकर यात्रा में शामिल हुआ है। पूछने पर कहता है कि मुझे यात्रा का कांसेप्ट अच्छा लगा। राहुल कहते हैं कि जो डरता नहीं है, वो नफरत नहीं करता। ये बात मुझे बहुत अपील करती है। संपत के घुटनों में तेज दर्द है। यात्रा के दौरान हर बार पीछे छूट जाता है लेकिन कभी अपनी कार से आगे छुड़वाने की पेशकश करो तो मना कर देता है।
संपत के पिता ऑटो ड्राइवर हैं। मां लोगों के घरों में खाना बनाती है। संपत कहते हैं कि मुझे यात्रा का कांसेप्ट अच्छा लगा। राहुल कहते हैं कि जो डरता नहीं है, वो नफरत नहीं करता। ये बात मुझे बहुत अपील करती है।
खैर.. आज यात्रा के 11 वें दिन भारत जोड़ो यात्री और राहुल गांधी आगर मालवा के सुसनेर से आगे पहुंच गए हैं। जैसे जैसे यात्रा राजस्थान की ओर आगे बढ़ रही है यात्रा में उत्साह बढ़ता जा रहा है। शनिवार को निपानिया के पास यात्रा से एक घंटे पहले छोटी छोटी बच्चियां सड़क किनारे राहुल का इंतजार करते हुए दिखीं। सवाल पूछने पर कहा कि वे राहुल से मिलने के लिए बीच सड़क पर बैठ जाएंगे। हालांकि उन्हें ये पता नहीं था कि राहुल कौन हैं?
यात्रा के दौरान दो बच्चियां शामिल हुईं। राहुल गांधी ने दोनों बच्चियों को खूब दुलार किया। उनके साथ फोटो भी खिंचवाया।
इससे पहले आज सुबह कैंप साइट से 15 किलोमीटर दूर नलखेड़ा में प्रसाद दुकानों के बाहर पुलिस वालों की ज्यादा चहलकदमी थी। उन्हें बताया गया था कि राहुल आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां प्रसाद की दुकान वालों का कहना था कि राहुल को यहां जरूर आना चाहिए। राहुल के आने से पूरे एमपी में कांग्रेस रिचार्ज हो गई है।
राहुल अब राजस्थान की सीमा से ज्यादा दूर नहीं है। रविवार को वे राजस्थान में एंट्री ले लेंगे। इससे पहले भारत जोड़ो यात्रा को एमपी से विदाई देने के लिए यहां कांग्रेस नेताओं व उनके समर्थकों का रेला लग गया है। सुसनेर, आगर-मालवा और उज्जैन तक में होटलों में जगह नहीं है। तमाम रेस्ट हाउस, धर्मशाला, लॉज, मैरिज लॉन तक में कमरे बुक हैं। यहां कई विधायकों व पूर्व मंत्रियों को भी देर शाम तक ठहरने के लिए कमरे नहीं मिल पाए थे।
राहुल गांधी यात्रा के दौरान एक बच्चे से कुछ इस अंदाज में मिले। उन्होंने बच्चे को दुलार किया।
इसी बीच रविवार को यात्रा में भीड़ के बीच बहुत सारे लोगों के मोबाइल फोन गुम हो गए। सुसनेर के एक लड़के ने बताया कि कम से कम 100 मोबाइल चोरी हुए हैं।
राहुल गांधी की यात्रा में कम्प्यूटर बाबा भी शामिल हुए। वह काफी दूर तक राहुल के साथ पैदल चले। साथ ही, कई मुद्दों पर चर्चा की।
राहुल गांधी ने आगर-मालवा में ही 2 बजे किसान कांग्रेस की बैठक ली। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखी।
राहुल ने यात्रा के दौरान दिव्यांगों से बातचीत की। यात्री कुछ देर उनके साथ भी चले।
पहले दिन की डायरी- MP में त्रिपुंड वाले राहुल
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के 77 वें दिन सुबह 6.54 बजे जब राहुल गांधी बोदरली कस्बे में यात्रा के शुभारंभ मंच पर चढ़े तो वहां की तस्वीर बीते 76 दिनों से बिल्कुल अलग थी। यहां लगे बैनर पर राहुल के माथे पर त्रिपुंड लगा था। लगभग 30 फीट के मंच का आधे से ज्यादा हिस्से के बैकग्राउंड पर यही बैनर था। खास बात ये है कि रात तक यहां एक दूसरा पोस्टर लगा था। इसमें राहुल की फोटो के साथ निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा का फोटो था, लेकिन सुबह होने से पहले बैकग्राउंड बदल चुका था।
डायरी का दूसरा दिन- बहन आगे निकली, भाई को करीब ना पाकर लौटीं
भारत जोड़ो यात्रा का 78वां दिन। बुरहानपुर शहर की सीमा के बाहरी हिस्से में बने कैंप में गुरुवार को ज्यादा चकाचौंध थी। सुरक्षाकर्मियों की गाड़ियां भी ज्यादा थीं। वजह साफ थी कि गांधी परिवार की बेटी प्रियंका, उनके पति राॅबर्ट वाड्रा और बेटा रेहान राहुल के साथ यात्रा में चलने को तैयार थे। सुबह की सर्द हवा में राहुल तो रोजाना की तरह सिर्फ सफेद टीशर्ट और ट्राउजर में ही थे, लेकिन वाड्रा परिवार ने जैकेट पहन रखी थी।
राहुल से मिलने राजीव गांधी का फोटो लेकर खड़े रहे
एमपी में भारत जोड़ो यात्रा के तीसरे दिन राहुल गांधी शाम को ओंकारेश्वर पहुंचे। सनावद में यात्रा को विराम देकर उनका काफिला सीधे गजानन महाराज आश्रम के भक्त निवास पर रुका। वे सीधे रूम नंबर 9 और 10 में पहुंचे। साथ में रॉबर्ट वाड्रा और रेहान भी थे। राहुल गांधी के यहां पहुंचने से पहले दोपहर 4 बजे से ही यहां बम स्क्वॉड टीम एक-एक कमरे की तलाशी लेती रही।
दिग्विजय बोले-मैं 42 साल से कमलनाथ के राइट साइड
भारत जोड़ो यात्रा का 81 वां दिन खास रहा। एक दिन पहले जिस इंदौर में उनका वाइब्रेंट वेलकम हुआ था, आज वहां से रवानगी भी वाइब्रेंट रही। बड़ा गणपति से यात्रा शुरू हुई। पोस्टरों-बैनरों से पटी सड़क पर जहां-जहां से राहुल गुजरे उनके स्वागत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों ने कहा कि वे बीजेपी के समर्थक हैं, लेकिन राहुल का बदला हुआ कलेवर जरूर देखना चाहते हैं। राहुल भी मौका पाकर साइकिल पर सवार हो गए।