मनीष आज़ाद
सुधा भारद्वाज की गिरफ्तारी के तीन साल पूरे हो गये। और इसी प्रकार भीमाकोरेगांव केस के भी कमोबेश 3 साल पूरे हो गये। अब तक इस केस में कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है (स्टेन स्वामी की पिछले दिनों कैद में ही मृत्यु हो गयी)। इन सभी पर मोदी की हत्या से लेकर हिंसा भड़काने तक के फर्जी आरोप हैं। आज मुझे बुल्गारिया की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के बड़े कम्युनिस्ट नेता गिओर्गी दिमित्रोव (Georgi Dimitrov) के केस की याद आ रही है। उन्हें भी फासीवादी जर्मनी में वहां की संसद ‘राइख़्श्टाख़’ को जलाने के फर्जी आरोप में 1933 में गिरफ्तार कर लिया गया था। दिमित्रोव ने अपना केस खुद लड़ने का फैसला किया और उन्होंने अपने ‘डिफेन्स’ के बहाने तत्कालीन जर्मन फासीवाद पर सीधा हमला बोला और इस बहाने कम्युनिस्ट विचारों का शानदार प्रचार किया। इससे उनकी ख्याति पूरे यूरोप में फैल गयी। पूरे यूरोप में एक कहावत ही चल पड़ी कि पूरे जर्मनी में एक ही बहादुर व्यक्ति है और वह भी एक बुल्गारियन है।
आज हम फख्र के साथ कह सकते हैं कि हमारे पास 15 बहादुर व्यक्ति हैं। इनके बाद भी हज़ारों और बहादुर हैं जो जेलों के अन्दर और बाहर भारत के क्रूर फासीवाद से लोहा लेते हुए भारत के सुनहरे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। गौरतलब है कि भीमाकोरेगांव केस के ये 15 बन्दी ना सिर्फ भारत के सभी कोनों से आते है बल्कि सभी जातियों से आते हैं।अभी पिछले दिनों अपनी माँ की बरसी पर 1 हफ्ते की पैरोल पर जेल से बाहर आये सुरेन्द्र गडलिंग वापस जेल जाने के ठीक एक दिन पहले जेल में साई बाबा के साथ आजीवन कैद की सज़ा काट रहे प्रशांत राही की हमसफ़र चंद्रकला से फोन पर बात करते हुए अपने चिर-परिचित अंदाज में हँसते हुए कहा कि आप लोग एकदम चिंता न करे। हम लोग जेल में फिट हैं। आप लोग अपना ध्यान रखिएगा। यह सुनकर चंद्रकला भीतर तक भर गई। जेल में तमाम यातनाओं के बीच रहने वाला व्यक्ति बाहर के दोस्तों को साहस दे रहा है। सच है, भीमाकोरेगांव के ये साहसी भारत के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।कम्युनिस्ट मैनीफेस्टो में मार्क्स ने लिखा है कि पूंजीवाद में अतीत वर्तमान पर शासन करता है। यदि आज के भारत को मार्क्स ने देखा होता तो शायद वह इसमे इतना और जोड़ते कि पूंजीवाद में अतीत वर्तमान पर शासन करता है और भविष्य को कैद में रखता है।
*मनीष आज़ाद*

