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*टिकिट वितरण सारे कयास फेल कर सकता है, रहे सावधान !*

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सुसंस्कृति परिहार 

बिहार में चुनाव की घोषणा के साथ ही अब इंडिया गठबंधन और एनडीए में   टिकिट  वितरण परीक्षा का दौर सही तरीके से सम्पन्न होता नज़र नहीं आ रहा है , जिस तरह दमदार लोग अपने उम्मीदवारों के लिए भीड़ लगाए हुए हैं यह दृश्य देखकर लगता है कि दोनों पक्षों के लोगों ने अपनी जीत को सुनिश्चित कर लिया है। जबकि पहले टिकिट मांगने वालों की संख्या ही यह संकेत कर देती थी कि किस पार्टी की जीत तय है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि राहुलगांधी, तेजस्वी यादव और दीपांकर भट्टाचार्य की सभाओं को देखकर और मोदी सरकार के विरुद्ध देश भर में खड़े  हुए जनांदोलन यह बता रहे हैं कि यदि टिकिट वितरण में घमासान नहीं हुआ तो इंडिया गठबंधन की त्रयी का जीतना आसान होगा।इसके लिए एक तय आधार होना चाहिए उस कसौटी पर जो सही उतरें उसे टिकिट मिले और विरोध की कोई गुंजाइश ना रहे। सीपीआईएमएल ने पांच वर्ष की गई सेवाओं को आधार बनाया है।

यह सबसे महत्वपूर्ण वक्त होता है उचित प्रत्याशी के चयन का । गठबंधन के सभी पार्टी सदस्यों को यदि इस गहरे संकट के समय देश की प्रजातांत्रिक व्यवस्था को बचाए रखना है तो इस वक्त यदि कुछ ग़लत भी हो जाए तो उसे सहजता से लेना होगा। क्योंकि दूसरा पक्ष रुष्ट व्यक्तियों को भाजपा में शामिल करने तैयार बैठा है और हम सब भली-भांति जानते हैं कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कभी भी ऐसे व्यक्ति का खुलकर विरोध नहीं किया बल्कि विजयी ही बनाया है। इस  अनुशासन का सबक अन्य दलों को सीखना होगा। यदि टिकिट वितरण में सहिष्णुता का परिचय दिया जाता है तो आधी जीत पक्की मान लेनी चाहिए। क्योंकि ये लोगों के खरीद फ़रोख्त का दौर है और किसी भी व्यक्ति का विश्वास करना आसान नहीं रहा। इसीलिए विश्वास बनाने का प्रयास कीजिए।यदि यहां सफ़ल होते हैं तो दिल्ली दूर नहीं होगी तथा भाजपा सिमटती चली जाएगी।

जहां तक एनडीए की एक जुटता का सवाल है उनमें कितने भी अन्तर्विरोध हों वे साम दाम दंड भेद समायोजन कर ही लेते हैं।सत्ता उनके पास है।जनता के करोड़ों रुपए थमाकर उनके विरोध को वे थाम लेते हैं। उदाहरण स्वरूप तेलगु देशम और जदयू के नेताओं को हमने देखा ही है फिर वे चिराग पासवान हों या प्रशांत किशोर सब सरेंडर करने वाले लोग हैं। इसलिए इस सत्ता की ताकत और जनता के पैसों पर इतराने वाले लोगों की सच्चाई से जनता को जागरूक करने की ज़रूरत है। प्रशांत किशोर विश्वास के योग्य नहीं है उन्हें बीजेपी की बी टीम मानकर चलिए।उनके द्वारा किए जा रहे सरकार  के भ्रष्टाचार भ्रमित कर जनता के वोट हथियाने की साज़िश के तहत् हैं।

आज इस चुनाव में चुनाव आयोग ने शातिराना ढंग से एक विशेष कौम और महिलाओं के नाम मतदाता सूची से काटकर जो नागरिकों के मत देने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है उसका जवाब देना ही बिहार के लोगों का पुनीत कर्तव्य बन जाता है। बिहार राज्य में अब तक यह भाईचारा सुरक्षित है उसे बचाने आपको तैयार रहना होगा। राहुल गांधी ने वर्तमान सरकार को वोट चोर होने की जो प्रमाणिक पुष्टि की है।उस पर भी नज़र रखने की ज़रुरत है।

इसलिए यदि परस्पर इंडिया गठबंधन के लोग लड़ते हैं सौहार्द का परिचय नहीं देंगे तो जीत हार में परिणत हो सकती है। सावधान रहें अपने लक्ष्य पर अडिग रहें। आगे भी कठिन लड़ाई है।

कुल मिलाकर बिहार के सत्तासीन नेता केंद्र सरकार की तरह सत्ता से चिपके रहकर जनता के वोट हथियाने तरह तरह के प्रलोभन चुनाव घोषणा तक देते रहे हैं। उद्देश्य साफ़ है येन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज रहना। बिहार के लोगों ने सर्वदा नया इतिहास बनाया है।इस बार भी बिहार में नई इबारत लिखकर देश को पुनर्जीवित करने में बिहार के मतदाता अहम् भूमिका निभाएंगे क्योंकि पहले पहल देश की सर्वाधिक बिगड़ी हालत में चुनाव बिहार में हो रहे हैं।यहीं से रास्ता बनेगा जो देश का भविष्य सुरक्षित रखेगा।

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