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टिकट !यह गैर जिम्मेदारी और कर्त्तव्यहीनता की हद नहीं तो और क्या है ?

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चंद्रशेखर शर्मा

आती चार अक्टूबर को इंदौर में टीम इंडिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच टी 20 क्रिकेट मैच होना है। इसके टिकटों का तो आपको सब पता ही है।

टिकटों की ऑनलाइन बिक्री खुलते ही मिनटों में सारे टिकट खल्लास हो गए थे। गोया ऐसी ही क्रिकेट दीवानी है अहिल्याबाई की यह नगरी ? ? ? बहरहाल खास बात यह कि टिकटों की अभी भी जबरदस्त डिमांड है। मजेदार बात यह कि यों टिकट कहीं उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यदि काला बाजार में तय कीमत से ज्यादा पैसे देना आप अफोर्ड कर सकें तो उन्हीं टिकटों की कोई कमी भी न है !

सवाल है कि मुख्यमंत्री के सपनों और देश के सबसे साफ-सुथरे शहर में आखिर यह काला-पीला हो कैसे रहा है ? क्या इस शहर का और यहां की खेलप्रेमी जनता का कोई घनीघोरी नहीं है ? कहने को शहर के प्रशासन की कमान बहुत तेजतर्रार, दबंग और कर्मठ कलेक्टर के हाथ में है। वहीं पुलिस के मुखिया भी अत्यंत काबिल कहे जाते हैं और दूसरी एजेंसियों में भी सभी काबिल लोग बैठे हैं तो इन सबके रहते होलकर, नायडू, अली और अन्य क्रिकेट दिग्गजों के शहर में आखिर यह काला-पीला कैसे हो रहा है ? या क्या यह माना जाए कि यह सारे काबिल लोग केवल घास काट रहे हैं ? ऑनलाइन सारे टिकट चंद मिनटों में बिक जाना एकबारगी समझ में भी आता है लेकिन अब उन्हीं टिकटों की मुंहमांगी कीमत पर कालाबाजारी आखिर क्या है ? क्या वो ऑनलाइन ज्यादातर टिकट काला बाजारी करने वालों ने ही किसी जुगत से अपने ‘धंधे’ की खातिर इस चालाकी से जुगाड़ लिए कि शहर के आम क्रिकेटप्रेमी टिकट के लिए तरस जाएं ? यह हो क्या रहा है इस शहर में ? अब कोई यह मत कह देना कि प्रशासन के पास ऐसी कोई शिकायत या सूचना नहीं है और आपके पास ऐसी कोई जानकारी हो तो पुलिस को बताएं ! अरे जनाब, जो बात पूरे शहर में आम है और ब्लैक में टिकट बेचने का खुला नंगा खेल चल रहा है तो संबंधित एजेंसियां क्या अफीम का अंटा चाटे पड़ी हैं ? यह गैर जिम्मेदारी और कर्त्तव्यहीनता की हद नहीं तो और क्या है ?

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