शशिकांत गुप्ते
यात्रा के पर्यायवाची शब्द है,सैर, देशाटन, देशभ्रमण, पर्यटन, विहार, सफ़र,और दौरा,आदि।
सियासत में पिछले कुछ वर्षो से एक विलासितापूर्ण यात्रा का प्रचलन शुरू हुआ है।
इस यात्रा के लाभार्थी निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही होतें हैं।
जो पाला बदल कर बहुमत प्राप्त सत्ता को गिराकर दूसरी सत्ता को बनाने में स्वयं को गौरवांवित समझतें हैं।
इस विलासितापूर्ण यात्रा का व्यय कौन करता है, कैसे होता है, रुपयों की क़ीमत तो एक सी होती है? चाहें श्यामवर्ण की मुद्रा हो या श्वेत वर्ण की? यह सारे प्रश्न ‘अ’नैतिकता के सामने गौण हो जातें हैं?
इनदिनों एक राजनैतिक यात्रा को लेकर देश में चर्चा चल रही है।
जिन लोगों के लिए सियासत तिज़ारत ही है, वे यात्रा को लेकर अपने खाते (Account) में लाभ-हानि का गणित लगा रहें हैं।
देश के सामान्य व्यक्ति के सामने सामान्य सा प्रश्न उपस्थित होता है। राजनीति में संक्रिय लोग एक दूसरें पर राजनीति करने का आरोप क्यों लगातें हैं?
बहरहाल मुद्दा है। यात्रा का?
एक यात्रा रथ पर सवार होकर भी की गई थी। इस यात्रा के बाद देश में धार्मिक उत्साह, उन्माद में बदल गया था? यह देश के लोगों के स्मृति में है।
इस यात्रा का स्वरूप धार्मिक था।
यह अपने गंतव्य स्थान तक पहुँच नहीं पाई।
इसी यात्रा का स्वरूप एक ढांचे तक पहुचा और जो कुछ हुआ वह सर्वविदित है। यात्रा का धर्मयुक्त राजनैतिक का परिमाण साँप और सीढ़ी के खेल में तब्दील हुआ।
इस खेल में राजनैतिक गोटी 2 के अंक से सीधे 92 तक पहुँच गई।
वर्तमान यात्रा का नतीजा दहाई के अंक से सैकड़े में परिवर्तित होता है या नहीं,यह कोई ‘हस्त’ रेखा विशेषज्ञ ही बता सकता है।
यात्रा रूपी तदबीर सियासी तक़दीर बदलती है या नहीं,इसका नतीजा भविष्य पर छोडना ही उचित है।
यात्रा का लाभ यात्रा करने वालों को तो कुछ तो मिलता ही है। यात्रा को ऊर्दू में सफ़र कहतें हैं।
इस यात्रा के कारण कौन अंग्रेजी का suffer करेंगे। यह यक्ष प्रश्न पचास वर्षों तक निरंतर सत्ता में बने रहने का दावा करने वालों के समक्ष उपस्थित हो रहा है?
सियासदानों से यही निवेदन है कि, यात्रा के लाभ-हानि पर खूब चर्चा करो,स्तुति या आलोचना करो। लेकिन आमजन को महंगाई,बेरोजगारी, कुपोषण, और अन्य बुनियादी समस्यओं से अंग्रेजी का suffer मत करने दो।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

