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श्रद्धांजलि…..काला कोट और गुलाबी अख़बार

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@भूपेश पन्त

विनोद दुआ के ये शब्द बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों के सीने को छेद कर निकल जाते थे। 2000 से 2002 के अंत तक मुझे सहारा टीवी में आदरणीय Prabhat Dabral जी के साथ काम करने का मौक़ा मिला। ‘साथ’ इसलिए क्योंकि ज़िम्मेदारी देने में और काम के साथ साथ एक बड़े भाई की तरह ज़िंदगी का हिस्सा बन कर हमेशा साथ रहने का वो सर जी का अंदाज़ इतनी हिम्मत तो देता है। उन्हीं की बदौलत मुझे 2001-2002 के बजट पर विशेष कार्यक्रम के दौरान विनोद दुआ जी को क़रीब से देखने और पहचानने का मौक़ा मिला। उसमें तब के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी भी उनके साथ थे।
राव Rao Virendra Singh साहब के साथ में उस कार्यक्रम की स्क्रिप्टिंग, रिसर्च, ग्राफिक्स और एडिटिंग के अलावा pcr में प्रोग्राम की रिकॉर्डिंग की भी ज़िम्मेदारी थी। मुझे याद है कि गेस्ट पैनल बदलने के दौरान तनाव के बीच मैं tp पर लिख कर  उन्हें तुरंत नए मेहमानों के बारे में बताता था वहीँ दुआ सर इस वक़्त का इस्तेमाल इस तरह से टेबल पर उंगलियाँ थिरकाते हुए अपनी मखमली आवाज़ का जादू बिखरने में करते थे। मन करता था कि काश ये वक़्त ना रुके और हम बजट जैसे बोरिंग लगने वाले टॉपिक पर और कुछ देर न लौटें। लेकिन कमाल की बात ये थी कि मेहमानों से भिड़ते उन के दिलचस्प सवालों, उनके धैर्य पूर्वक सामने वाले को सुनने का अंदाज़ और फ़िर से कोई महत्वपूर्ण लेकिन आम भाषा में किया गया सवाल ये महसूस नहीं होने देता था कि दुरूह सा लगने वाले बजट का विश्लेषण इतना रोचक और ज्ञानवर्धक हो सकता है। मैंने तब के बाद से शायद ही किसी बजट विश्लेषण को इतने ध्यान से देखा हो जो उनके बिना हो।
इसी दौरान प्रभात जी की ओर से कार्यक्रम की अच्छी प्रस्तुति का ये इनाम था कि हमें उनके और विनोद जी के साथ कुछ तनाव मुक्त समय बिताने का मौक़ा मिला। मटन की तीन चार घंटे की रेसिपी से लेकर ना जाने किन किन विषयों पर उनके विचार हम लोग घूँट घूँट पीते रहे। तब से लेकर आज तक मैं यही महसूस करता रहा हूँ कि विनोद दुआ का होना हर हाल में इंसान बने रहने जैसा है। 
लोग विनोद जी को उनकी कामयाबी, पत्रकारिता या सत्ता के आलोचक के तौर पर भले ही मापें लेकिन मैं उन्हें जीवन भर एक बेहतरीन और लाग-लपेट से परे एक बेहद संवेदनशील और संजीदा इंसान के रूप में याद रखना चाहूँगा क्योंकि उन्होंने लोगों से जो भी प्यार पाया वही होने की बदौलत पाया।
सादर नमन, विनम्र श्रद्धांजलि।
@भूपेश पन्त

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