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*सच्ची कहानी : गेंगरेप*

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     आरती शर्मा 

मात्र 14 साल की है वो. पूणे की एक मासूम लड़की है. मिलने के लिए दोस्त ने बुला लिया। 

    घर वालों से इजाजत नहीं थी तो चुपके से बैग उठाकर निकल आई।

पुणे रेलवे स्टेशन पर रात 10 बजे मिलने का समय दिया था दोस्त ने।

11 बज गए नही आया वो.

     इस समय लड़की घर भी नही लौट सकती थी। रोने लगी स्टेशन पर. तभी एक ऑटो वाला आया वहां। रोते देखकर उस लड़की को मदद की पेशकश की।

    लड़की ने अपने दोस्त के बारे में बता दिया। जो वहां उसे लेने आना था और नही आया था। 

   ऑटो वाला चला गया। थोड़ी देर बाद लोटा। लड़की को बोला तेरा दोस्त बाहर खड़ा है शर्मिंदा है. चल उससे मिल ले।

   लड़की को पानी की बोतल दी। पानी पिया लड़की ने और पैदल चल पड़ी स्टेशन के बाहर। लेकिन चंद सेकंड में उसपर बेहोशी छाने लगी। इससे पहले की गिरती. उसे ऑटो में बैठा दिया गया। 

दूर घनी झाड़ियों में ले गया उसे वो जानवर। बलात्कार करके घण्टों तक वहां रखा। फिर उसे उठाकर वहां से एक लॉज में ले गया। वहां 11 और लड़के पहले से इंतज़ार कर रहे थे. कमरे में ले जाकर उस लड़की के सब वस्त्र निकाले गए। 

वो होश में आ रही थी. पूरी रात 12 भेड़ियों ने उसका बलात्कार किया. सुबह हो गयी। लड़की होश में आगयी तो वापिस बेहोश करने के लिए. लगातार इंजेक्शन दिए गए। 

दिन में फिर से वही दोहराव शुरू कर दिया गया। वो भूख प्यास से बिलबिला रही थी। किसी को दया नही आई। पीने को पानी तक न दिया गया। शाम तक फिर से बलात्कार करते रहे। 

    फिर एक लड़के को दया आ गयी. वो उसे दादर स्टेशन पर छोड़ आया. लड़की वहां फिर से रोने लगती है. वहां. दो कर्मचारी सफाई कर रहे थे. उन्होंने लड़की से रोने का कारण पूछा तो लड़की ने अपनी दास्तां बयां कर दी।

    वो कर्मचारी उसे मदद के बहाने अपने क्वार्टर पर ले गए और वहां फिर से उस लड़की से घण्टों तक बलात्कार का सिलसिला चला। जब उन दरिंदों का मन भर गया तो उस लड़की को एक ट्रेन में बैठा दिया जो चंडीगढ़ जा रही थी।

    लड़की बेसुध दर्द से भरी मूक बैठी रही। चंडीगढ़ स्टेशन पर ट्रेन रुक गयी क्योंकि आखिरी स्टेशन था। वहाँ एक जीआरपी के जवान ने उससे पूछा कि कोई समस्या है क्या बेटा।

   तो लड़की कुछ नही बोली। उसे हर पुरुष से डर लग रहा था। सोचा ये भी मदद के बहाने नोचेगा। 

   जवान समझदार था. वीमेन चाइल्ड वालों से एक महिला बुला ली। उस महिला ने सबसे पहले उस लड़की को खाना खिलाया। फिर उसे अपनी गोद मे सुला के घण्टों उसे दुलारती रही।

जब लड़की को कुछ भरोसा हुआ तो तो उस महिला अधिकारी को अपनी दर्दनाक दास्ताँ बताई। 

जवान और महिला अधिकारी दोनो फुट फुट के रोये। तुरंत मुम्बई पुलिस को सूचना दी गयी। लड़की को एरोप्लेन से तुरंत मुम्बई ले जाया गया। 

   हॉस्पिटल में उसे बाहर व्हीलचेयर से लेकर अंदर तक तमाम महिला स्टाफ का घेरा दिया गया। क्योंकि लड़की का भरोसा उठ चुका था पुरुष जाती से। 

    फिलहाल पुलिस ने खूब मेहनत की और सबको गिरफ्तार कर लिया है. कुल 16 दरिंदे गिरफ्तार किए गए हैं. मीडिया सरकार और विपक्ष इस घटना पर चुप है. पता नही कितना जहरीला स्वार्थ लोगों में आ चुका है.

    जब मीडिया इतना रक्तपिपासु हो सकता है तो सोचिए सड़क पर विचरण करने वाले ऑटो वाले सफाई वाले क्या व्यवहार कर सकते हैं ।

    फिलहाल मुंबई के साकीनाका से एक और लड़की की दास्ताँ सामने आ रही है. निर्भया से भी दर्दनाक. 

    उसके साथ बलात्कार के दौरान उसकी वेजिना में कोई औजार से हमला किया और उसका यूटरस बाहर निकाल दिया। लड़की अपने यूटरस को हाथ मे लेकर हस्पताल गई.

     इन सबके लिए काफी हद तक बॉयफ्रेंड कल्चर भी जिम्मेदार है. वर्षों पालपोसकर बड़ा करने वाले परेंट्स से अधिक विश्वास चार दिन के परिचित लफँगे पर हो जाता है.

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