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खुश रहने की कोशिश करें, एक दिन आएंगे सुनहरे दिन!

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फरहा

16 साल की कशिश भोपाल में रहती हैं। वो आठवीं कक्षा में पढ़ती थीं, जब पहली बार लॉकडाउन लगा था। उस वक्त उनकी परीक्षा चल रही थी। फिर लॉकडाउन तीन महीने लगा रहा। उन्हें पढ़ने का शोक था। वह अकेले ही पढ़ती थीं। उनका स्कूल सिर्फ आठवीं तक था। आगे की पढ़ाई के के लिए बस्ती से बाहर जाना होता है।

कशिश (काल्पनिक नाम) ने बताया कि नवीं कक्षा के बाद स्कूल दूर था और मैं अकेली थी। उस वक्त लॉकडाउन भी लगा था। जब मैं स्कूल गई एडमिशन के लिए तो वहां पर फीस ज़्यादा थी। हमारे घर में पैसे नहीं थे और तीन महीने का किराया भी देना था। जब मैंने पापा से कहा तो पापा ने पढ़ाई के लिए मना कर दिया। मैंने सोचा, थोड़ा मैं रुक जाती हूं। जब सब ठीक हो जाएगा और जब तक ये लॉकडाउन भी हट जाएगा तो मैं बाद में नवीं में एडमिशन ले लूंगी।

कशिश ने बताया, “मैं पूरे लॉकडाउन घर पर रही। इसी बीच मैं एक लड़के को पसंद करने लगी थी। जब उनके अम्मी-पापा को पता चला तो उन्होंने सब जगह आने-जाने के लिए मना कर दिया। उनका सब जगह आना जाना बंद हो गया। फिर उनके अम्मी-पापा ने उनका रिश्ता देखना शुरू कर दिया था। ऐसे ही उनके अम्मी पापा ने रिश्ता तय कर दिया।” उन्होंने बताया कि वो 16 साल की हैं और लड़का 25 साल का है। उनके अम्मी-पापा शादी के लिए पीछे पड़े हैं। वो जिस लड़के को पसंद करती थीं अब वो लड़के से बात भी नहीं करती हैं।

जिंदगी ऐसी है। वह अपना रास्ता खुद चुनती है। सब कुछ हमारे बस में नहीं होता है, इसलिए हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। एक दिन सुनहरे दिन जरूर आते हैं।

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