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यूक्रेन का राष्ट्रपति व्लोदोमीर जेलेंस्की सिर्फ विदूषक ही नहीं अपितु निहायत मूर्ख भी है !

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-निर्मल कुमार शर्मा,

आज के वर्तमान समय की दुनिया में तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष बने बैठे लोगों में ज्यादातर ऐसे विदूषक,क्रूर,तिकड़मबाज,झूठे,मक्कार, जुमलेबाज,अलोकतांत्रिक,आमजनविरोधी, असहिष्णु ,अमानवीय,अविवेकी,बर्बर,फासिस्ट, विलासी मानसिकता आदि के विकृत लोग सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने में सफल हो गए हैं,जिनको अपने देश की आम जनता,गरीबों, किसानों,मजदूरों,विद्यार्थियों, बेरोजगारों आदि की जीवन की बेहतरी के लिए कोई चिंता ही नहीं है,उल्टा वे ऐसी दुर्नीतियों को कार्यान्वित कर रहे हैं जिससे उक्त वर्णित आमजन यथा गरीबों, किसानों,मजदूरों,विद्यार्थियों, बेरोजगारों आदि का जीवन अत्यंत दूरूह व संकट में पड़ गया है,इसमें बहुत से देशों के कर्णधारों का नाम गिनाया जा सकता है,लेकिन आज ऐसे विदूषक, क्रूर,तिकड़मबाज,झूठे,मक्कार, जुमलेबाज, अलोकतांत्रिक,आमजनविरोधी,असहिष्णु ,अमानवीय,अविवेकी, बर्बर,फासिस्ट,विलासी मानसिकता आदि के विकृतसोच के शासकों में भी सबसे अविवेकी और मूर्ख शासक यूक्रेन का वर्तमान समय का विदूषक पृष्ठभूमि से आया वहां के राष्ट्रपति के पद पर बैठा व्यक्ति व्लोदोमीर जेलेंस्की का नाम लिया जा सकता है !
पिछले महिने यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की की इस जिद ने कि वह इस दुनिया को सदा युद्ध की विभीषिका में हमेशा झोंकने को उद्यत संयुक्त राज्य अमरीका के युद्धक संगठन नाटो में सम्मिलित होकर रहेगा ने भूतपूर्व यूनियन आफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक के समय में उसके एक सीमावर्ती राज्य रहे और वर्तमान समय में रूस के बिल्कुल पड़ोसी यूक्रेन और रूस को भयंकर युद्ध की विभीषिका में झोंक रखा है ! 24 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में विगत् 30 दिनों में दोनों पक्षों के असंख्य बिल्कुल निरपराध व बेकसूर असैन्य वह सैन्य नागरिकों को अपनी अमूल्य जीवन से हाथ धोना पड़ा है,क्योंकि युद्ध में वास्तविक जनहानि होने की सही संख्या का सही आंकड़ा विभिन्न कारणों से जनसामान्य को कभी भी बताया ही नहीं जाता है ! फिर भी रूस के एक अधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार यूक्रेन से हुए युद्ध में उसने अपने 9861बड़े अफसरों सहित सैनिकों को खो दिया है,इसके अलावा उसके 16153 सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं ! वैसे यूक्रेन के अनुसार उसने रूस के 15300 सैनिकों को मौत के घाट उतार चुका है ! उधर यूक्रेन में सबसे ज्यादा जानमाल का नुक़सान उसके समुद्र तटीय शहर मरियुपोल शहर में हुई है, संयुक्त राष्ट्र संघ, बीबीसी आदि तमाम विश्वस्त मिडिया संस्थानों की तरफ से जारी रिपोर्टों के अनुसार 4लाख से कुछ अधिक आबादीवाले इस शहर में 1000 से ज्यादा बिल्डिंग्स ध्वंस्त हो चुकीं हैं ! और 3000 से भी ज्यादे लोगों की मौत हो चुकी है ! सबसे बड़े दु:ख की बात यह है कि इस भीषण युद्ध से इस शहर के 177 नन्हें नौनिहालों की अब तक मौत हो चुकी है,155 बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं ! 35 लाख से भी ज्यादे लोग अपने वतन को छोड़कर पोलैंड,हंगरी जैसे पड़ोसी देशों में शरण लेने को बाध्य हुए हैं ! 65 लाख से भी ज्यादे लोग अपने देश यूक्रेन में ही रूसी बमबारी से बेघर-बार होकर शरणार्थी बनकर रह गए हैं ! संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार इस युद्ध में मृतकों की संख्या दोनों पक्षों द्वारा दिए जा रहे आंकड़ों से भी बहुत ज्यादे होने की संभावनाएं हैं ! युद्ध से लगभग पूरी तरह से तबाह हो चुके पूरे यूक्रेन में विस्थापितों की संख्या करोड़ों से ऊपर पहुंच चुकी है ! अभी पिछले दिनों रूस ने यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादोमीर जेलेंस्की से आत्मसमर्पण करने की पेशकश किया था,लेकिन किसी अज्ञात स्थान पर दुबककर सुरक्षित बैठे यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादोमीर जेलेंस्की ने यह कहते हुए की ‘उसका देश अंतिम दम तक युद्ध करेगा ! ‘ आत्मसमर्पण करने से साफ मना कर दिया !
यक्षप्रश्न है हास्य फिल्मों के एक विदूषक कलाकार की पृष्ठभूमि से राजनीति में आए यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादोमीर जेलेंस्की का युद्ध जारी रखने का अब उद्देश्य क्या रह गया है ? अमेरिका नीत नाटो ने उसे अब अपना सदस्य बनाने से भी मना कर दिया है ! अब वह एक निस्तेज यूरोपियन यूनियन का सदस्य मात्र रह गया है ! नाटो और नाटो के मुख्य अगुवा कथित महाबली अमेरिका की अफगानिस्तान में कुछ हजार इस्लामी तालिबानी कट्टरपंथी मुस्लिम समाज के आतंकवादियों से डरकर दुम दबाकर भागते हुए सारी दुनिया देख चुकी है ! वही महाकायर अमेरिका और उसके कुछ नाटो के सदस्य देश दुमछल्ले यूरोप,आस्ट्रेलिया तथा जापान आदि देशों से गुपचुप तरीकों से मिलने वाले छोटे-मोटे हथियारों के बल पर यूक्रेन और रूस में विदूषक और हास्य कलाकार रहा यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादोमीर जेलेंस्की और उसके कुछ भाड़े और मूर्ख सैनिक रूस जैसे परमाणु हथियारों से संपन्न महाबली देश से अंतिम दम तक युद्ध करने की जिद ने आखिर यूक्रेन के आम नागरिकों,औरतों, बच्चों को बलि का बकरा बना कर रख दिया है ! वहां से सोशल मिडिया पर नन्हें नौनिहालों और शिशुओं की दिल दहला देने वाली घायल और खून से लथपथ तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहीं हैं ! आखिर यह कब तक चलता रहेगा !
दुनियाभर के राजनीति के मजे हुए,प्रबुद्ध वर्ग तथा बुद्धिजीवी वर्ग का यह कहना है कि आज अगर इस बेवकूफ और विदूषक व्लादोमीर जेलेंस्की की जगह कोई राजनैतिक रूप से परिपक्व,सुलझा, बुद्धिमान तथा विवेकशील व्यक्ति यूक्रेन जैसे देश का राष्ट्रपति रहता तो वह अपने देश में आमजन का हो रहे भीषण रक्तपात को रोकने के लिए बहुत पहले ही रूस से समझौता करके अपने देश के लोगों को इस वीभत्स,हृदयविदारक रक्तपात से बचा लिया होता ! यक्षप्रश्न है कि आखिर अब खुद किसी अज्ञात स्थान पर बंकर में छिपे इस मूर्ख व्लादोमीर जेलेंस्की की अंतिम दम तक युद्ध जारी रखने का उद्देश्य क्या है ? इस समूची दुनिया में सदा युद्ध को लालायित और युद्धपिपासु इकलौता अमेरिका जैसा देश तथा उसके दुमछल्ले नाटो के अन्य मेमनों को भी यह बात कब समझ में आएगी कि इस विषम परिस्थिति में यूक्रेन को दी जानेवाली युद्धक सामानों से रूस की सेना को कम, प्रतिशोध और विरोध में रूसी सेना द्वारा की गई युद्धक कार्यवाही में यूक्रेन की निरपराध आम जनता,वहां के नन्हें बच्चे,वहां की औरतें आदि सभी लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं ! इसके ठीक विपरीत कथित महाबली अमेरिका और उसके गुर्गे देश स्वयं और उनके देश की जनता यूक्रेन से हजारों किलोमीटर दूर बिल्कुल सुरक्षित जगह पर आराम से बैठे हुए हैं ! इससे ज्यादे हतप्रभ और बेचैन कर देने वाली बात और क्या हो सकती है ! वस्तुत: अमेरिका और उसके दुमछल्ले नाटो देश यूक्रेन में व्लोदोमीर जेलेंस्की जैसे एक ऐसे निहायत मूर्ख,विदूषक,असहिष्णु, हृदय विहीन एक ऐसे मोहरे या कठपुतली को खोज लिए हैं,जिसके मूर्खतापूर्ण और अविवेकी कुकृत्यों से उसके देश यूक्रेन का हर तरह से सर्वनाश हो रहा है ! सबसे बड़े दु:ख की बात यह है कि अमेरिका जैसे देश के गोद में बैठे संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्थाओं के विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे उसके प्रशासकों की है जो अपनी गहरी शीतनिद्रा से अबतक उठ नहीं पा रहे हैं ! उनका विवेक कब जाग्रत होगा ? यह मोटी सी बात उन्हें कब समझ में आएगी कि नाटो के सदस्य बने देशों को अब समझाया जाना चाहिए कि उनका यूक्रेन को चोरी-छिपे दिए गए छोटे-मोटे हथियारों की आपूर्ति यूक्रेन-रूस युद्ध रूपी आग में घी डालने जैसा कुकृत्य है,इससे यूक्रेन के विदूषक और मूर्ख राष्ट्रपति व्लादोमीर जेलेंस्की को यह गलतफहमी हो रही है कि वह सैन्य रूपी महाबली रूस को युद्ध में इन टुटपूंजिए देशों द्वारा दिए गए हथियारों के बल पर रूस जैसे देश से युद्ध जीत जाएगा ! इससे बड़ी अदूरदर्शिता और मूर्खता की मिशाल शायद ही कहीं अन्यत्र मिले ! अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी इस प्रकार की नाकारा,नपुंसक और निष्क्रिय वैश्विक संस्थाओं को अब भंग कर ही देना चाहिए,जो ऐसे त्रासदकाल में भी यह गहरी निद्रा में सोई हुई है ! जो अमेरिका और उसके पिछलग्गू देश रूस की सीमा पर अमेरिका नीत नाटो के माध्यम से यूक्रेन में रूस की राजधानी मास्को को लक्षित करके इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को लगाकर युद्ध रूपी तांडव मचाना चाहते हैं ! इस विकृत सोच की वीभत्सता को रोकने के लिए कथित विश्वशांति के लिए स्थापित किए गए संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रशासकों को यह बात समझ में क्यों नहीं आ रही है ? क्या संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रशासकों को अमेरिका की इस मानसिक विकृति को समझाने का पावन कर्तव्य नहीं है ! यक्षप्रश्न है कि रूस अपने ठीक पड़ोसी देश यूक्रेन को अमेरिका और उसके पिछलग्गुओं द्वारा युद्ध क्षेत्र कैसे बनने दे सकता है ? प्रश्न है कि क्या यही अमेरिका और उसके पिछलग्गू देश अपनी सीमा पर यूक्रेन जैसे युद्धस्थल बनाकर रखना पसंद करेंगे ? इसका स्पष्ट उत्तर है हर्गिज नहीं, तो यूक्रेन युद्ध के लिए इकतरफा रूस और उसके वर्तमान राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन दोषी कैसे और क्यों हो गए ? प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्धों में मानवता के भीषण सर्वनाश व आमजन संहार के बाद भी पिछले 70 सालों से अमेरिका जैसे रक्त पिपासु देशों के कर्णधारों की रक्त पीने की जीजिविषा अभी तक शांत नहीं हो पा रही है ! इसका सबसे ताजा और ज्वलनशील उदाहरण अमेरिका और उसके पिछलग्गू नाटो देशों की रूस के हृदय प्रदेश व सीमावर्ती देश यूक्रेन को अपने सैन्य संगठन नाटो में शामिल करने के अतिनिंदनीय कुकृत्य और जिद के चलते यूक्रेन-रूस युद्ध हुआ है,जिसमें लाखों-करोड़ों निरपराध बच्चों,स्त्रियों,युवाओं,बुजुर्गों और सैनिकों तथा असैनिक लोगों की या यूं कहें संपूर्ण मानवता की हत्या हो रही है ! वास्तविकता यह है कि यूक्रेन-रूस युद्ध का वास्तविक सूत्रधार और खलनायक अमेरिका और उसके पिछलग्गू जैसे देश हैं ! यूक्रेन-रूस युद्ध में मरने वाले निरपराध लोगों का वास्तविक युद्ध अपराधी रूस नहीं,अपितु अमेरिका है,अमेरिका पर युद्ध अपराध को प्रेरित करने और युद्ध भड़काने की परिस्थितियों को पैदा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चलाकर दंडित किया जाना चाहिए । वैसे तो संपूर्ण मानवीय इतिहास ही युद्ध और रक्तपात से सना हुआ है,लेकिन वर्ष 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध और वर्ष 1939 में शुरू हुए द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर आज यूक्रेन-रूस युद्ध तक में पूरे 107 सालों के एक बहुत बड़े कालखंड में मानवता की बहुत हत्या हो चुकी है ! मानवता कराह रही है,आर्तक्रंदन कर रही है ! अब मानवता की हत्या करनेवाले इस महाविनाशक युद्ध को बंद कराने के लिए अब हर हाल में पूर्ण ईमानदारी,संजीदगी तथा प्रतिबद्धता से कोशिश होनी ही चाहिए !

-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद उप्र,

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