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वैश्विक संघर्षों को रोकने में नाकाम हुआ संयुक्त राष्ट्र संघ 

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,मुनेश त्यागी 

       हिरोशिमा जापान में चल रही जी-7 की बैठक के मौके पर विश्व के कई अहम और प्रमुख राजनेताओं ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र इस वक्त दुनिया में हो रहे विभिन्न संघर्षों को रोकने में बिल्कुल नाकाम हो गया है, संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व में शांति और सुरक्षा कायम करने में लगभग असफल हो गया है और उसके पास दुनिया की ज्वलंत समस्याओं के समाधान का कोई कार्यक्रम नहीं है।

      संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन, विश्व की समस्याओं के हिसाब से काम नहीं कर रहे हैं। यह इन दोनों अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव का समय है। ये दोनों संगठन 1945 के शक्ति संबंधों को प्रतिबंधित करते हैं। वैश्विक वित्तीय संगठन पुराना, अनुपयोगी और निष्क्रिय हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र संघ आज के समय और यूक्रेन रूस युद्ध के बीच वैश्विक सुरक्षा की अपनी मूलभूत जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहा है।

      हिरोशिमा में जी-7 के सत्र को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्चर्य प्रकट किया है कि जब शांति और स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी, वह आज की चुनौतियों का सामना नहीं करना कर पा रहा है। आज हमें इन मूल मुद्दों पर सही ढंग से विश्लेषण करने की जरूरत है।

     उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पिछली सदी में बनाई गई वैश्विक संस्थाएं आज की सदी की व्यवस्था के अनुरूप नहीं रह गई हैं। जब तक इनमें मौजूदा विश्व की वास्तविकता प्रतिबंधित नहीं होती होगी, तब तक ये तमाम अंतरराष्ट्रीय मंच महज चर्चा की जगह बने रहेंगे।

       1945 में लीग ऑफ नेशंस की जगह संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी। उस समय उसके प्रमुख उद्देश्य थे,,, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की स्थापना करना, विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के बीच मित्रता संबंध स्थापित करना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग की स्थापना करना, मानव मात्र के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, विश्व के तमाम राष्ट्रों को सुखी एवं संपन्न बनाना, परतंत्र राष्ट्रों को स्वतंत्र कराना और स्वतंत्र देशों को विकसित करना, मजदूरों स्त्रियों और पीड़ितों की सहायता करना और दुनिया के विभिन्न देशों द्वारा सामना की जा रही विभिन्न समस्याओं का समाधान करना।

       संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के 78 वर्ष बाद हम देख रहे हैं कि जिन मूल उद्देश्यों को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी, वे समस्त  उद्देश्य आज असफल हो गए हैं। आज हम देख रहे हैं कि दुनिया में आज तक की सबसे ज्यादा अशांति फैली हुई है, पूरी दुनिया कई ब्लॉक में बंट गई है, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना खत्म हो गई है, मनुष्य के तमाम मौलिक अधिकारों को पद्ददलित किया जा रहा है, कुछ पूंजीपति और लुटेरे राष्ट्रों द्वारा मिलकर अनेक देशों को विभिन्न तरह से गुलाम बनाया जा रहा है, अधिकांश मजदूरों और स्त्रियों और पीड़ित लोगों को सहायता नहीं मिल रही है और विश्व के सामने मौजूद विभिन्न समस्याएं जैसे गरीबी, शोषण, जुल्म, अन्याय, भ्रष्टाचार, महंगाई, आतंक, लड़ाई , युद्ध और हिंसा मौजूद हैं। इनका कोई समाधान दुनिया के मुल्कों या संयुक्त राष्ट्र संघ के पास मौजूद नहीं है।

       काफी समय से हम देखते चले आ रहे हैं कि झूठ बोलकर, दुनिया को गुमराह कर, झूठी झूठी सूचनाएं फैलाकर, अफगानिस्तान iran-iraq लीबिया इजिप्ट टर्की सीरिया पर दुनिया के लुटेरे पूंजीपति मुल्कों ने, अपने गठजोड़ बनाकर, हमले किए, वहां के तेल क्षेत्रों पर कब्जे किए। वहां के शासकों को विभिन्न  तरीकों से मौत के घाट उतार दिया गया और इन इनमें से कई देशों में अपनी कठपुतली सरकार बना ली गईं। आज हम लगातार देख से चले आ रहे हैं कि अमरीका और नैटो के देश दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, एशिया आदि महाद्वीपों में खुलेआम हस्तक्षेप कर रहे हैं।

        इसका सबसे बड़ा नुकसान संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था को उठाना पड़ा है। इन सारी समस्याओं को देखकर लगा कि जैसे आज संयुक्त राष्ट्र संघ एक नि:शक्त संस्था बनकर रह गई है। वह वैश्विक लुटेरी पूंजीवादी ताकतों को काबू करने में एकदम नाकाम होकर रह गई है। आज हम पुनः देख रहे हैं कि दुनिया की समस्त पूंजीवादी लुटेरी ताकतें जिनका नेतृत्व अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, जर्मनी, इटली और फ्रांस जैसे देश कर रहे हैं, कि अमेरिका और नाटो के देश, दुनिया के स्वतंत्र और समाजवादी मुल्कों को आजादी से काम नहीं करने दे रहे हैं। 

      ये लुटेरी ताकतें इन तमाम मुल्कों की सरकारों के काम में अड़चन डाल रही हैं। वहां की जनता के सामने तरह-तरह की समस्याएं खड़ी कर रही हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि इन तमाम ताकतों ने संयुक्त राष्ट्र संघ के तमाम उद्देश्यों को लगभग मिट्टी में मिला दिया है। दुनिया से गरीबी दूर करने में, भ्रष्टाचार खत्म करने में, महंगाई खत्म करने में, युद्ध अशांति और आतंकवाद खत्म करने में, सबको शिक्षा, सब को रोजगार देने में, पूरी दुनिया के लोगों का समुचित विकास करने में, दुनिया में शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्था कायम करने में इन देशों का कोई रोल नहीं है।

      आज हम बड़े स्पष्ट तरीके से देख रहे हैं कि अमेरिका और नाटो के नेतृत्व में दुनिया की तमाम लुटेरी पूंजीवादी ताकतें, समाजवादी व्यवस्था, सोच और मानसिकता को अपना सबसे बड़ा शत्रु मान रही हैं, अनेक देशों की जनता को और सरकारों को समाजवादी व्यवस्था, मूल्य और सोच को अपनाने में तरह-तरह की अड़चनें पैदा कर रही हैं, पूरी समाजवादी व्यवस्था को दुनिया के सामने बदनाम कर रही हैं, इन समाजवादी देशों को घेरने के लिए, दुनिया में तरह तरह के सैनिक अड्डे काम कर रही हैं।

       इन जालिम ताकतों ने संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्यों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, सबसे ज्यादा मिट्टी में मिलाया है और आज ये तमाम ताकतें दुनिया में अपना लूट का निजाम और प्रभुत्व कायम करना चाहती हैं, पूरी दुनिया को लूटने पर आमादा हैं, पूरी दुनिया के प्राकृतिक संसाधनों पर अपना कब्जा करना चाहती हैं। इन्हीं मुल्कों की नीतियों की वजह से आज दुनिया में सबसे ज्यादा अशांति फैली हुई है, असुरक्षा है, मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है, जनता के विकास में तरह तरह की बाधाएं आ रही हैं। इन्हीं लुटेरी ताकतों की वजह से, संयुक्त राष्ट्र संघ एक नाकाम संस्था बनकर रह गई है और इन्हीं तत्वों की वजह से संयुक्त राष्ट्र संघ दुनिया में हो रहे संघर्षों को रोकने में बिल्कुल नाकामयाब हो गया है।

        आज पूरी दुनिया के देशों के सामने यह सबसे बड़ा काम है कि इन लुटेरी पूंजीवादी ताकतों के विश्व विरोधी मंसूबों पर पानी फेरा जाए, वे सब एकजुट हों और संयुक्त राष्ट्र संघ और इसकी विभिन्न संस्थाओं में पूरी दुनिया के देशों को वाजिब प्रतिनिधित्व मिले और संयुक्त राष्ट्रसंघ, सुरक्षा परिषद और तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में पूरी दुनिया के देशों का वाजिब प्रतिनिधित्व हो और आज की जरूरतों के हिसाब से एक नए संयुक्त राष्ट्र संघ का निर्माण किया जाए।

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