मुस्लिम वोटर को, यूपी पुलिस ने वोट देने से रोका : मध्यप्रदेश में मेले में दूकान नहीं लगाने दी !
सुसंस्कृति परिहार
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश आजकल मुस्लिम विरोध की होड़ में लगे हुए हैं।लगता है दोनों राज्य मुस्लिम समुदाय को सताने के नये नये प्रयोग कर कथित हिंदु राष्ट्र का सिरमौर बनने की कोशिश में लगे हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस मुस्लिमों पर अत्याचार में अव्वल रही है। बुलडोजर का इस्तेमाल सबसे अधिक इनके उत्पीड़न में हुआ है। खैरियत है सुको ने काफी बर्बादी के बाद इस पर रोक लगा दी है। इसलिए उत्पीड़न और शोषण के नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
इनमें ताज़ातरीन जो मामला सामने आया है वह है मुस्लिम वोटरों से मताधिकार छीनने का है। मीरापुर और ककरौली में हुए उपचुनाव में ये सत्य उजागर हुआ है। इन दोनों क्षेत्रों में मुस्लिम मीरापुर में 40 तथा ककरौली में 60 फीसदी हैं। हालांकि मुस्लिम वोट जो एक समय समाजवादी पार्टी के my में शामिल थे उसे तोड़ने की यहां भरपूर कोशिश की गई है।
दरअसल, मीरापुर विधानसभा सीट बहुकोणीय मुकाबले में फंस गई है। इस सीट से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के टिकट पर मिथिलेश पाल चुनाव मैदान में हैं. एनडीए की मिथिलेश के सामने विपक्षी इंडिया ब्लॉक की ओर से समाजवादी पार्टी (सपा) उम्मीदवार सुम्बुल राणा, एडवोकेट चंद्रशेखर की अगुवाई वाली आजाद समाज पार्टी के जाहिद हुसैन और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शाहनजर की चुनौती है। इस सीट पर एनडीए और इंडिया ब्लॉक, दोनों ही गठबंधनों ने बाहरी उम्मीदवार पर दांव लगाया है।
बसपा के साथ ही असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरी एडवोकेट चंद्रशेखर की पार्टी ने भी लोकल चेहरे पर भरोसा जताया है। इस विधानसभा सीट का अब तक का ट्रेंड यही रहा है कि बाहरी उम्मीदवार जीतते आए हैं। बसपा और एएसपी, दोनों ही दल ट्रेंड बदलने की उम्मीद के साथ चुनाव मैदान में पूरा जोर लगा रहे हैं। दोनों ही दलों ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। सपा से भी मुस्लिम नेता ही मैदान में हैं। ऐसे में मीरापुर की लड़ाई रोचक हो गई है।
मीरापुर विधानसभा में हो रहे उपचुनाव के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में वोटरों ने हंगामा किया है। वोटरों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन रालोद प्रत्याशी के एजेन्ट के रूप में कार्य कर रहा है। मुस्लिम व दलित बाहुल्य क्षेत्रों में पुलिस द्वारा मतदाताओं को आईडी चेक करने के नाम पर मताधिकार का प्रयोग करने से रोका जा रहा है। कुछ वोटर अपना पहचान पत्र और आधार कार्ड के साथ ही वोटर पर्ची लेकर एकजुट हुए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। इसको लेकर वोटरों की पुलिस के साथ झड़प हुई और लोगों ने पथराव कर दिया।
समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी सुम्बुल राना ने बताया की सीकरी में सुबह से पोलिंग रोकी हुई है। हम सुबह से शिकायत कर चुके हैं। कोई एक्शन नहीं हो रहा है। खेड़ी, मीरापुर, ककराैली सभी जगह मतदाताओं को रोका जा रहा है। प्रशासन मतदाताओं को परेशान कर रहा है। वोट डालने आ रहे लोगों को मतदान करने से रोका जा रहा है, लाठी चार्ज किया जा रहा है, खदेड़ा जा रहा है। महिलाओं को पुलिस अधिकारी द्वारा भयभीत करने वाला एक वीडियो भी वायरल हुआ है।
उधर,रालोद-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी ने आरोप लगाया कि बुर्के में अन्य लोगों ने मतदान करने का प्रयास किया, जिन्हें प्रशासन ने रोका। वहीं सपा, बसपा और आसपा प्रत्याशी का कहना है कि एक समुदाय के लोगों को वोट डालने से रोका गया।मीरापुर सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां मुस्लिम आबादी का बाहुल्य है. मीरापुर में करीब 40 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. वहीं, जाट और गुर्जर मतदाताओं की तादाद भी अच्छी खासी है. त्यागी, पाल और दलित मतदाता भी इस सीट का परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सपा को मुस्लिम और यादव के साथ अन्य पिछड़ी जातियों और दलित मतदाताओं के साथ से जीत की उम्मीद है तो वहीं एनडीए को मुस्लिम वोट के बिखराव और एनडीए के साथ बीजेपी के कोर वोटर के साथ जाने से अपनी जीत का भरोसा जता रही है। कुल मिलाकर यहां चुनाव में मुस्लिम वोटर के साथ जो व्यवहार पुलिस कर रही है उसे एक लोकप्रिय चैनल ने स्पष्ट तौर पर दिखाया है। पुलिस कैसे चैनल के रिपोर्टर देखकर रुख बदलती हैं और मुस्लिम परिवार को अंदर भेजती है लेकिन जब रिपोर्टर अंदर उन्हें ले जाता है तो उसे बाहर खदेड़ देते हैं।आगे क्या हुआ वोटर्स के साथ वे ही जानते हैं। कई जगह मुस्लिम वोटर्स को घर से नहीं निकलने दिया। यह यूपी पुलिस और सरकार की रजामंदी के वगैर संभव नहीं हो सकता।
इसी तरह मध्यप्रदेश में भी हाल ही में दमोह नगर में आयोजित स्वदेशी मेले से हैदराबाद, कश्मीर, लखनऊ जैसे दूरदराज क्षेत्र के अलावा समीपवर्ती क्षेत्रों से आए लगभग दो दर्जन मुस्लिम दूकानदारों को जिस बेरहमी से हटाया गया। वह प्रदेश सरकार की सहमति के बिना संभव नहीं हो सकता। क्या सचमुच देश आहिस्ता आहिस्ता ऐसी सरकारों के ज़रिए मुस्लिम समुदाय के प्रति नफ़रत को बढ़ावा देकर हिंदू ध्रुवीकरण की ओर नहीं बढ़ रहा है। इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच क्या इन दिनों संभव है। कार्रवाई होगी यह तो बहुत मुश्किल बात है। हमारी एकजुटता ऐसी जगह बहुत ज़रूरी है।

