(संजय कनौजिया की कलम✍️)
दूरबीन से देखने वाले, जब राक्षस रुपी अपराधी को नजदीक खड़ा करके देखते है तब उन्हें दूर की स्थिति रामराज्य सी नज़र आती है..वह लोग जिन्हे लक्ष्मण की जगह भरत दिखता हो..वह सीना ठोककर जतलाते हैं कि अब दूर-दूर तक कोई (राक्षस) अपराधी, दिखाई नहीं देता..माँ-बहने-बहु-बेटियां अब आधी रात को सोने-चांदी के गहने पहन कर सुरक्षित घूमती दिख रहीं हैं..यानी सब कुछ सुरक्षित हांथों में आ गया है, राम का राज्य आ गया है..मानो कहा जा रहा हो, चहुँमुखी विकास नज़र आ रहा है, अपराध मुक्त सूबा नज़र आ रहा है, सत्य की गंगा वह रही है, चारो और खुशहाली नज़र आ रही है, सूबे में सोने की चिड़ियाँ चहक रहीं हैं..!!

ये कैसी दूरबीन का आविष्कार किया गया है, जिसके लैंस में जलती लाशें..बहती लाशें..रेत में दबी लाशें..वेटिंग में पड़ी लाशें..स्ट्रेचर पर पड़ी लाशें..नाकाम सरकार..बेतरतीब इंतज़ाम..और कोरोना में हमारे द्वारा झोके गए इंसान..इस दूरबीन से हर जिले में दो-तीन सौ विधवाएं क्यों नज़र नहीं आती ? इस चमत्कारी दूरबीन में गेरुए वस्त्र धारी जो सूबे का खलनायक सिद्ध हुआ हो, उसके सूबे में पुलिस के भेष में गुंडे क़ानून की रखवाली करते नज़र क्यों नहीं आते ?..महिला अत्याचारों पर आवाज़ उठाने वाली भाजपा अप्सराएं जो नेत्रियां है, अब उनका मौन क्यों नज़र नहीं आता ?..गाडी से कुचलते हुए किसान..बेबस मजदूर, पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक-युवती..बलात्कार के बाद मौत की शिकार दलित बच्चियाँ क्यों नज़र नहीं आती ?..
गृह-मंत्री जी, काठ की हड़िया बार-बार नहीं चढ़ा करती..जुमलों के ज़माने गए..आप को समझ लेना चाहिए कि अबकी जनता ने अपनी दूरबीन का आविष्कार कर लिया है और उस सत्य रुपी दूरबीन में जो दिखता है वह आपके रामराज्य के लिए खतरा है..जनता की दूरबीन में..पिछले साढ़े 4 वर्षों में राम-राज्य की स्थापना करने वाले, योगी के तानाशाही व गैर-जिम्मेदारियों से यूँ तो सभी वर्ग..केवल विरोध तक ही सीमित नहीं, बल्कि योगी के महाजंगलराज से त्राहिमाम करता हुआ नज़र आ रहा है..भय-दहशत-और घुटन के माहौल ने सभी समुदायों में सरकार के प्रति नफ़रत पैदा कर दी है..अपराधी ही नहीं पुलिस प्रशासन भी निर्ममता की सभी हदें लांघ चुके है..कुल मिलाकर सरकार का इक़बाल खत्म हो गया है, कहीं भी कानून का राज नहीं दिखता..सूबे की सरकार खुद आम नागरिकों के खिलाफ़ युद्ध में उतरी हुई है ऐसा प्रतीत होता है..इस तरह की निर्ममताओं से दलित वर्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है..सूबे का दलित वर्ग आज भी हाथरस काण्ड को नहीं भूला, जहाँ एक नाबालिक लड़की का गैंग-रेप किया गया, ठीक से जांच करने के बजाए, प्रशासन-पुलिस-अस्पताल और पाखंडी समाज के तानो-बानो ने पूरी तरह से इंसानियत का बलात्कार कर, आधी-रात को चुपचाप दाह-संस्कार कर डाला और योगी सरकार चुप्पी साधे रही, बल्कि हाथरस में आरोपियों के समर्थन में ठाकुर समाज उतरकर दबंगई दिखाने लगा..आज हाथरस में वाल्मीकि समाज की इस बेटी के परिजन सिर्फ राशन पर ही जिन्दा हैं, अदालती कार्येवाही हेतू लखनऊ जाने का खर्चा भी उन्हें खुद ही उठाना पड़ता है, साथ में दिखाने भर के लिए मिली नाम के सुरक्षाकर्मियों का खर्चा भी इस पीड़ित परिवार को ही उठाना पड़ता है..कहते है कि भीड़ कि कोई शक्ल नहीं होती, कोई दीन-धर्म नहीं होता और इसी बात का फायदा हमेशा मॉब-लिंचिंग करने वाली भीड़ उठाती है..सवाल है कि इस भीड़ को इकठ्ठा करता कौन है ?..जो सिर्फ कमजोर वर्ग को ही निशाना बनाती है, वर्ष 2017 से तो गौ-रक्षा के नाम पर गुंडई करने वाले इतने बेकाबू हो गए कि 37 ऐसे मामले हुए जिनमे 11 लोगों कि मौत हुई जबकि 152 लोग जख्मी हुए..केवल उ०प्र० में ही वर्ष 2014 से 2019 तक गौ-रक्षा के नाम पर 120 मामलों में 50% फीसदी शिकार मुसलमान हुए लेकिन 20% शिकार लोगों कि धर्म-जाति मालूम ही नहीं चल पाई परन्तु 11 फीसदी दलितों को भी गौ-रक्षा के नाम पर अपनी जान गंवानी पड़ी !
सिर्फ और सिर्फ जातिय हीनभावनाओं से ग्रसित स्वर्ण जातियों के दबंगियों द्वारा दलितों पर हुए अपराधिक मामलों पर नज़र डालें तो वर्ष 2017 में 11, 924 और वर्ष 2018 में 11, 444 मामले सामने आये थे..उ०प्र० में दलितों कि हत्या कि दर, देश के अन्य सभी राज्यों से दुगनी है, ये स्थिति तब है जब अनुसूचित जाति/ अनुसूचित-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह जी द्वारा देश के दलितों कि सुरक्षा का कानून बनाकर इस शोषित वर्ग को उपहार में दिया था..उ०प्र० में दलित उत्पीड़न के मामलों में बेतहाशा वृद्धि कि एक वजह यह है कि थानों पर थानाध्यक्षों की नियुक्ति में 21 फीसदी का आरक्षण होने के बावजूद भी थानों पर उनकी बहुत ही कम नियुक्ति की जाती है..जिसका सीधा प्रभाव दलित उत्पीड़न से सम्बंधित मामलों के FIR पर पड़ता है..जैसा कि वर्ष 2019 में सोनभद्र जिले के मुर्तिया गांव में हुए जनसंहार, जो कि 32 ट्रेक्टरों में सवार 200 दबंगों ने आधे घंटे गोलियां बरसाकर 10 आदिवासियों कि लाशें बिछा दी थीं.. कौशाम्बी में अपने मवेशियों को नहर का पानी पिलाने गई सुनीता देवी और उसके बच्चों को केवल इसलिए पीट दिया जाता हैं, क्योकिं गांव के दबंग कहते हैं कि ये नहर उनकी सम्पति हैं..इलाहाबाद में महज 4 रुपए के लिए दो दलित की हत्या कर दी जाती हैं..सोनभद्र में ही अगड़ी जाति के लोग महिला को डायन करार देकर मार डालते हैं..अन्तरजातिय संबंधों की वजह से दलित युवक को बंधक बनाकर पहले पीटा जाता हैं फिर जिन्दा जला दिया जाता हैं, सदमे से माँ की भी मौत हो जाती हैं..महिलाओं को मंदिरों में घुसने नहीं दिया जाता हैं..खेत में शौच के लिए गई दलित महिला का गैंग-रेप कर दिया जाता हैं..आजमगढ़ जिले में दलित प्रधान की हत्या कर दी जाती हैं..दलित महिला की जीभ काट दी जाती हैं..अमेठी जिले में दलित ग्राम प्रधान के पति को जिन्दा जला दिया जाता हैं..फतेहपुर में दो दलित बहनो की हत्या कर लाश को तालाब में फेंक दिया जाता हैं..सरकारी हैंडपंप छूने पर दलित की पिटाई कर दी जाती हैं..बांदा जिले में दबंगों की पिटाई से डरे दलित परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता हैं..चारा लेने गई तीन दलित बहनो में दो की संदिग्ध मौत हो जाती हैं तीसरी नाजुक हालत में पहुंचकर अपाहिज हो जाती हैं..दलित दूल्हे को धमकी दी जाती हैं कि घोड़ी चढ़ा तो हमला सहना होगा..अभी उस युवती जो दरोगा बनने की तैयारी में अपनी योग्यता साबित करने जा रही थी, गाडी में लिफ्ट देने के बहाने उसका गैंग रैप किया गया, अंत में उस युवती ने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली, ये मामला ठंडा भी नहीं हुआ कि सूबे में अभी फिलहाल गंगापार प्रयागराज में एक ही परिवार के चार दलित सदस्यों की हत्या कर दी गई, जहाँ कुछ दिन पहले उसी परिवार की दस वर्षीय नाबालिग बच्ची का रेप कर कुल्हाड़ी से टुकड़े कर हत्या कर दी गई..आदरणीय गृह-मंत्री श्री अमित साहब, शीशमहल में बैठकर और ऊँचे मंचो से राम की दूरबीन ना दिखाओ..जनता की दूरबीन से देखिये !!
(लेखक राजनीतिक, सामाजिक चिंतक है)