(दुराचार-मुक्ति, सेक्स-संतुष्टि जरूरी)
डॉ. नेहा
योनि कैसर को मेडिकल की भाषा में सर्वाइवल कैसर कहा जाता है. वर्तमान भारत में सर्वाइवल कैंसर के 25 प्रतिशत केस हैं. केस निरंतर रहे हैं. हर 7 मिनट में 1 महिला की मौत हो रही है. मूल कारण दुराचार-वृत्ति है, जो सेक्सुअल सटिस्फैक्शन नहीं मिलने के कारण बढ़ रही है. आज 99% पुरुष सेक्सहेल्थ के लिहाजा नामर्द हैं. योनि कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन जरूरी है. अमूमन यह सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है.
भारत में तेज़ी से फ़ैल रहा सर्वाइकल कैंसर बेहद जानलेवा साबित हो रहा है. पूरे विश्व की तुलना में भारत अकेला 25% तक इस बीमारी को झेल रहा है. सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली एक बीमारी है. इसको बच्चेदानी के मुंह के कैंसर नाम से भी जाना जाता है. योनि कैंसर बच्चेदानी के निचले हिस्से गर्भाशय ग्रीवा में होता है.
सर्वाइकल कैंसर आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण की वजह से होता है. यह वायरस एकाधिक यौन संपर्क के दौरान फैलता है. दुराचार आज आम है. स्त्री सटिस्फैक्शन नहीं पा रही है. शोषित होने की मज़बूरी में या अन्य स्वार्थवश भी वह कई से यूज होती है. कंडोम हर आफत से बचाव का ब्रह्मस्त्र नहीं हो सकता.
सर्वाइकल कैंसर से हर 7 मिनट में 1 महिला की हो रही है मौत हो रही है. सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा की स्त्री रोग विभाग की प्रो. डॉ. रुचिका गर्ग ने भी इस आंकड़े की पुष्टि की है. उनके अनुसार यह कैंसर इतना खतरनाक है कि हर साल इससे लगभग 1 लाख से अधिक महिलाओं को मृत्यु हो रही है. विश्व में सर्वाइकल कैंसर के केस में 25 प्रतिशत की भागीदारी भारत की महिलाओं की है.
सर्वाइकल कैंसर को कोई भी किशोर-युवा लड़की, महिला हल्के में ना ले. समय रहते सावधानी बरतकर इससे बचा जा सकता है. योनिकैंसर बच्चेदानी के मुँह पर होता है और फिर अंदर तक फैलता जाता है.
यह आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण की वजह से होता है, जो यौन संपर्क के दौरान फैलता है. फीमेल के यौन संचारित संक्रमणों के संपर्क में आने की संभावना तब अधिक होती है, जब उसको सटिस्फैक्शन नहीं मिले या अन्य वजहों से वह एक से अधिक के साथ संबध बनाए. एक से ही संबंध बना रही और वह एक किसी और से भी बना रहा है : तब भी खतरा बढ़ता है.
अत्यधिक मात्रा में ओरल गर्भनिरोधकों जैसे जन्म नियंत्रण की दवाएं का सेवन करना भी योनि कैंसर का कारण बनता है.
जितनी कम उम्र की बच्चियों को इसकी वैक्सीन लगावाई जाये उतना ही बेहतर काम करेगी. वैक्सीन को लेकर जो गाइडलाइन बनी हुई उसके तहत जैसे 9 से 14 वर्ष तक की बच्चियों को टीका लगवाना चाहिए. यह उम्र इस के लिए सबसे उत्तम मानी गई है. इसके अतिरिक्त 26 साल तक की महिला भी वैक्सीन लगवा सकती है. यदि 26 तक उम्र की महिलाएं नही लगवा पाईं हैं तो वह 45 साल तक की उम्र तक इसे लगवा सकती हैं. 26 से अधिक उम्र की महिलाएं टीका लगवाने से पहले अपनी डॉ. से सलाह जरूर लें.
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण बेहद सामान्य हैं. शुरुआत में इन्हें आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है.
कुछ कारणों से इसकी पहचान कि जा सकती है जैसे, सफ़ेद पानी आना, गंदा बदबूदार पानी आना, पति से संबध के बाद ब्लडिंग होना आदि.
यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें. इसे जाँच के माध्यम से भी पहचाना जा सकता है. पांच पांच साल के अंतराल में HPV टेस्ट करा लेना चाहिए. पपनिकोलाउ (Pap) परीक्षण से भी महिला अपना टेस्ट करवा सकती है.
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