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 विजय !

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-चंद्रशेखर शर्मा

कहते हैं कि अभिनय में कॉमेडी सबसे दुरूह पहाड़ है। हैरत देखिए कि उसका लालच भी ऐसा कि महान दिलीप कुमार और महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर नाना पाटेकर तक उससे बच नहीं पाए। अलबत्ता हकीकतन कोई कोई ही उस दुरूह पहाड़ को फतह कर पाता है ! चार्ली चैपलिन ऐसे ही अमर नहीं हैं। कहते यह भी हैं कि लोगों के पास ढेरों कलाएं हैं, लेकिन अपने किसी हुनर से लोगों को हँसाना, यह किसी सूरत हंसी-खेल नहीं ! बल्कि विशेष आर्ट और भगवान की दी हुई नेमत।

एक सीन याद कीजिए। उसमें अरशद वारसी और जावेद जाफरी ने सुनसान रोड पर कार में लिफ्ट ली है। कार में सिर्फ ड्राइवर है और वो भी साउथ का। कार में सवार होने के बाद वारसी उससे पूछते हैं कि गोवा कब पहुंच जाएंगे ? जवाब में वो साउथ इंडियन कहता है कि बस नाम बताते-बताते पहुंच जाएंगे ! इसके बाद जाफरी और वारसी खुशी से उसको अपना नाम बताते हैं और जब साउथ इंडियन अपना नाम बताना शुरू करता है तो वो इतना लंबा होता है कि……!

जी हां, यह कॉमेडी फिल्म ‘धमाल’ का सीन है। असल में यही क्या, बल्कि इस सीन के आसपास गुंथे कई सीन सचमुच कमाल-धमाल सीन हैं। कार वाले उस सीन में आप खासकर उस कार को रोकने के तरीके और बाद में अरशद वारसी और जावेद की शक्लों को गौर से निगाह में लाइए। अपन ने जब सिनेमाघर में यह फ़िल्म देखी तो सच में कई बार हंसी का जैसे दौरा पड़ा था अपन को और दिल बाग-बाग हो गया था। एक और सीन देखिए।

हवा में उड़ते छोटे हवाई जहाज में असरानी सवार हैं। उनके साथ उनके बेटे का किरदार निभा रहा कलाकार है और उसको हवाई जहाज चलाना नहीं आता, लेकिन मजबूरी में पायलट की सीट पर है और उसे रनवे पर उतारने की कोशिश कर रहा है। तभी उनका गोवा फ्लाइंग क्लब में संपर्क हो जाता है। शायद ही कोई इस बात से इनकार करेगा कि असरानी कॉमेडी के बड़े खिलाड़ी हैं, लेकिन इस सीन सीक्वेंस को अमर बनाया है विजय राज ने और उनकी डायलॉग डिलीवरी ने ! आगे इन्हीं विजय राज के बारे में अपन थोड़ी बात करेंगे। जी हां।

उससे पहले अर्ज है कि यदि आपके पास चंद मिनटों की फुर्सत हो तो प्लीज इस धमाल की यह सीन सीक्वेंस अवश्य देखिएगा। यदि उसे मित्रों-परिजनों के साथ देखें तो और बेहतर, बल्कि बेहतरीन ! तब आपको मजे, मनोविनोद और आनंद की गारंटी सौ टका पक्की ! उस मजे और मौज की बात ही अलग है। खास यह कि यह सीन सीक्वेंस यू ट्यूब पर आसानी से उपलब्ध है।

बहरहाल विजय राज का यह है कि अपन ने इनको “धमाल” और “सूरमा” से लेकर “गंगूबाई काठियावाड़ी” सहित कुछेक फिल्मों में गौर से देखा है और ताजा देखा वेब सीरीज “अभय 3” में। करीब साठ बरस के ये राज दिल्ली के हैं और खूबी यह कि नाना विधा में दखल रखते हैं। जमा उनकी आवाज में अलग ही वजन है और लहजा भी कम खुदा नहीं। इसकी बदौलत वो विज्ञापनों के किरदार भी हैं और वाइज ओवर भी करते हैं। वो कॉमेडियन भी हैं और डायरेक्टर भी। कहते हैं कि नसीरुद्दीन शाह ने फ़िल्म “मानसून वेडिंग” के लिए इनकी सिफारिश की थी ! नसीर की दीगर मसलों की समझ को कोई कुछ भी माने, किंतु किसी कलाकार की अभिनय क्षमता की उनकी शिनाख्त और सिफारिश को खारिज करना आसान नहीं। तब मानसून वेडिंग कामयाब हुई थी और विजय राज उसके बाद काफी लंबा सफर तय कर चुके हैं। आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि यह बंदा कुछ अलग ही कलाकार है। विजय ने इतने अलग-अलग और अनूठे किरदार किए हैं कि आप हैरत में पड़ जाते हैं। गंगूबाई में वो वेश्या बाजार के एक ऐसे कोठे की बाई बने हैं जिसकी पूरे बाजार में धाक है। यह एक नेगेटिव और विशेष महिला का किरदार है। ऐसी बाई के किररदार में आप उनका गेटअप और खासकर संवाद अदायगी को खातिर में लाइये। तब जैसे अभिनय के एक नये प्रोफेसर से हमारा परिचय होता है। ताजा देखी वेब सीरीज में वो हमेशा की तरह एक अलग और अनूठे रोल में हैं। इसमें वो पागलखाने यानी पागलों के अस्पताल के एक डॉक्टर के रोल में है, जो असल में खुद एक खतरनाक ‘सनक’ का शिकार या रोगी है। यहां भी वे एक अलग गेटअप और किरदार में उतरे हैं और क्या कमाल उतरे हैं ! इसे हर सूरत देखना बनता है।

ध्यान दीजिए कि जब मीडिया में न्यूज़ चैनलों का प्रवेश हुआ था तो उसके पीछे-पीछे जैसे चैनलों की बाढ़ चली आई। नतीजा यह कि दीगर बातों के अलावा हम मीडिया के बेशुमार नये सितारों से भी परिचित हुए। चैनलों के आने के पहले अंजना ओम कश्यप, रविश कुमार, मरहूम विनोद दुआ और रोहित सरदाना आदि को कौन जानता था ? जाहिर सी बात है मीडिया में नये सितारों की आमद का गोया विस्फोट सा हुआ। यही बात फिल्मों और वेब सीरीज को लेकर भी इतनी ही सत्य है और मौजूं है। वेब सीरीज के टीवी पर आगमन ने भी बताया है कि बॉलीवुड अपनी जगह, पर देश में अभिनय की खासी संपन्न खदानें हैं और उनमें अनेक हीरे हैं। आप देखिए, इन सीरीजों में बेशुमार नये कलाकार काम करते मिलते हैं। उनमें से अनेक बॉलीवुड तक अपना परचम फहरा रहे हैं। क्रिकेट से समझाएं तो जैसे आईपीएल से निकलकर कई खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम में अपना जौहर दिखा रहे हैं ! इससे पता चलता है कि देश के पास हुनरमंदों की कोई कमी न है और रोजगार भी खूब। शर्त बस मौके देने या पैदा करने की है। जी हां, यह थोड़ी गहरी और ध्यान दिए जाने लायक बात है !

कुलजमा विजय की जहां तक बात है तो यह बुजुर्ग कलाकर अभिनय में मरहूम संजीव कुमार से लेकर बोमन ईरानी और पंकज त्रिपाठी तक इनकी तरह जुदा प्रतिभा और कला का धनी है ! कहने की जरूरत न कि वो विशेष अटेंशन के अधिकारी हैं। स्मरण रहे !
-चंद्रशेखर शर्मा

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