विजयकांत दीक्षित
तीन तरह के ताबीज़ बांटे जा रहे हैं। सर्वप्रथम सदाचार का ताबीज़। दूसरा ताबीज़ मोक्ष और सतयुग आने का। इसी तरह तीसरा ताबीज दंड देने का। यह सब माया का प्रभाव है जो बाजार में तीन तरह के ताबीजों को बांटने का सिलसिला मीडिया में अपने अपने तरीके से चल रहा है। कोरोना काल के ये नए उत्पाद है। और भी उत्पाद आत्म ज्ञान क्लब में आने वाले है**।
**तीनों ताबीज के जनक कांग्रेस बीजेपी और समाजवादी पार्टी आईटी सेल है, यह बात ध्यान से देखने पर मालूम पड़ जाएगी। तो सबसे पहले चर्चा सदाचारी ताबीज़ की। कांग्रेस के टूल किट प्रकरण से राहुल गांधी की हुईं भद ने कांग्रेस को डिफेंसिव मूड में ला दिया। कोरोना इलाज में लापरवाही और लाशों की राजनीति करने वाली कांग्रेस अब योगी आदित्यनाथ को सदाचार का पाठ पढ़ा रही है। प्रियंका गांधी ने योगी जी को कुछ सलाह दी है**।
**प्रियंका जी जानती हैं कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा भ्रष्टाचार के आरोप में कभी भी जेल के पीछे जा सकते हैं, कोलकाता का दो मंत्रियों का शपथ लेते ही जेल जाना ताजा उदाहरण है। शायद इसीलिए नरम भाषा मैं योगी जी से कहा है कि वे जन कल्याणकारी कदम उठाएं और कोरोना प्रकोप के शिकार लोगों को मुआवजा दे। गरीबी हटाओ का नारा देकर सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस के जमाने में रिकॉर्ड संख्या में किसान गरीब हुए थे**।
**इन सोशल मीडिया पर नया प्रचार शुरु हो चुका है। वह यह कि भारत में हर पल ईश्वर अल्लाह को याद किया जा रहा है। कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह सतयुग आने का संकेत है। यह बात अब वही लोग कर रहे हैं जिनके सिर पर छत है और घर पर किसी भी तरह की विपन्नता नहीं है। संदेश में लिखा है इंसान 24 घंटे भजन कीर्तन कर रहा है। इंसान का प्रभु से संवाद हो रहा है। प्राणी को ना कपड़े लगते की चिंता और ना ही ऑफिस की चिंता। मतलब, कलयुग गया और सतयुग आ रहा है**।**यह संदेश उसी तरीके का है जैसा गालिब ने लिखा था। दिल बहलाने के लिए गालिब यह ख्याल अच्छा है। मोदी जी के भक्तों की तरफ से यह संदेश हो सकता है। यह संदेश उन लोगों को अच्छा लगा होगा,जो समाज के मध्यम वर्ग के प्रथम पंक्ति में आते हैं। सन्देश भेजने वालों को कम से कम मजदूरों किसानों और उस वर्ग का भी नहीं ध्यान रहा, जहां एक वक्त की रोटी खाने के लिए लाले पड़े हैं। हो सकता है कि मोदी भक्तों को बदनाम करने के लिए मोदी विरोधी ने ये कारनामा किया हो**।**सोशल मीडिया पर एक वीडियो अखिलेश यादव का है जिसमें वे बोल रहे हैं कि मेरे खिलाफ जिन जिन ने आपत्ति जनक बात कही थी उसको मैंने लाइक किया। ऐसे लोगों की सूची बनती जा रही है। जब हमारी सरकार होगी तब हम ऐसे लोगों को सबक सिखाएंगे। इसी दण्ड ताबीज़ को अपने उत्साही एसपी वर्करों के बीच बांटने का काम पूर्व मुख्यमंत्री कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया में चर्चा का प्रमुख विषय है। प्रिंट मीडिया में सुल्तानपुर जिले के एक मुस्लिम विधायक के कथन को भी चर्चा में लाने का काम सोशल मीडिया कर रहा है**।
**जिसमें वे सपा विधायक अपने वर्करों को हिदायत दे रहे हैं कि पंडितों की कोई मदद न करें। वह बता रहे है कि उन्हें यह निर्देश अखिलेश यादव जी ने दिया है क्योंकि सपा के मुखिया का मानना है पिछले चुनाव में ब्राम्हण ने मायावती जी की मदद की थी। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रचार के लिए घर से बाहर निकलना जान हथेली पर रखना जैसा है। यह सब कोरोना काल के चलते हो रहा है। इसी कारण सोशल मीडिया का सहारा लेकर ताबीज देने और बांधने तथा आरोप प्रत्यारोप के साथ प्रारंभ हो चुका है, वहीं बसपा भी चमत्कारी ताबीज की खोज में है।लेखक-
तीन तरह के ताबीज़ बांटे जा रहे हैं। सर्वप्रथम सदाचार का ताबीज़। दूसरा ताबीज़ मोक्ष और सतयुग आने का। इसी तरह तीसरा ताबीज दंड देने का। यह सब माया का प्रभाव है जो बाजार में तीन तरह के ताबीजों को बांटने का सिलसिला मीडिया में अपने अपने तरीके से चल रहा है। कोरोना काल के ये नए उत्पाद है। और भी उत्पाद आत्म ज्ञान क्लब में आने वाले है**।**तीनों ताबीज के जनक कांग्रेस बीजेपी और समाजवादी पार्टी आईटी सेल है, यह बात ध्यान से देखने पर मालूम पड़ जाएगी। तो सबसे पहले चर्चा सदाचारी ताबीज़ की। कांग्रेस के टूल किट प्रकरण से राहुल गांधी की हुईं भद ने कांग्रेस को डिफेंसिव मूड में ला दिया। कोरोना इलाज में लापरवाही और लाशों की राजनीति करने वाली कांग्रेस अब योगी आदित्यनाथ को सदाचार का पाठ पढ़ा रही है। प्रियंका गांधी ने योगी जी को कुछ सलाह दी है**।**प्रियंका जी जानती हैं कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा भ्रष्टाचार के आरोप में कभी भी जेल के पीछे जा सकते हैं, कोलकाता का दो मंत्रियों का शपथ लेते ही जेल जाना ताजा उदाहरण है। शायद इसीलिए नरम भाषा मैं योगी जी से कहा है कि वे जन कल्याणकारी कदम उठाएं और कोरोना प्रकोप के शिकार लोगों को मुआवजा दे। गरीबी हटाओ का नारा देकर सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस के जमाने में रिकॉर्ड संख्या में किसान गरीब हुए थे**।**इन सोशल मीडिया पर नया प्रचार शुरु हो चुका है। वह यह कि भारत में हर पल ईश्वर अल्लाह को याद किया जा रहा है। कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह सतयुग आने का संकेत है। यह बात अब वही लोग कर रहे हैं जिनके सिर पर छत है और घर पर किसी भी तरह की विपन्नता नहीं है। संदेश में लिखा है इंसान 24 घंटे भजन कीर्तन कर रहा है। इंसान का प्रभु से संवाद हो रहा है। प्राणी को ना कपड़े लगते की चिंता और ना ही ऑफिस की चिंता। मतलब, कलयुग गया और सतयुग आ रहा है**।**यह संदेश उसी तरीके का है जैसा गालिब ने लिखा था। दिल बहलाने के लिए गालिब यह ख्याल अच्छा है। मोदी जी के भक्तों की तरफ से यह संदेश हो सकता है। यह संदेश उन लोगों को अच्छा लगा होगा,जो समाज के मध्यम वर्ग के प्रथम पंक्ति में आते हैं। सन्देश भेजने वालों को कम से कम मजदूरों किसानों और उस वर्ग का भी नहीं ध्यान रहा, जहां एक वक्त की रोटी खाने के लिए लाले पड़े हैं। हो सकता है कि मोदी भक्तों को बदनाम करने के लिए मोदी विरोधी ने ये कारनामा किया हो**
।**सोशल मीडिया पर एक वीडियो अखिलेश यादव का है जिसमें वे बोल रहे हैं कि मेरे खिलाफ जिन जिन ने आपत्ति जनक बात कही थी उसको मैंने लाइक किया। ऐसे लोगों की सूची बनती जा रही है। जब हमारी सरकार होगी तब हम ऐसे लोगों को सबक सिखाएंगे। इसी दण्ड ताबीज़ को अपने उत्साही एसपी वर्करों के बीच बांटने का काम पूर्व मुख्यमंत्री कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया में चर्चा का प्रमुख विषय है। प्रिंट मीडिया में सुल्तानपुर जिले के एक मुस्लिम विधायक के कथन को भी चर्चा में लाने का काम सोशल मीडिया कर रहा है**।
**जिसमें वे सपा विधायक अपने वर्करों को हिदायत दे रहे हैं कि पंडितों की कोई मदद न करें। वह बता रहे है कि उन्हें यह निर्देश अखिलेश यादव जी ने दिया है क्योंकि सपा के मुखिया का मानना है पिछले चुनाव में ब्राम्हण ने मायावती जी की मदद की थी। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रचार के लिए घर से बाहर निकलना जान हथेली पर रखना जैसा है। यह सब कोरोना काल के चलते हो रहा है। इसी कारण सोशल मीडिया का सहारा लेकर ताबीज देने और बांधने तथा आरोप प्रत्यारोप के साथ प्रारंभ हो चुका है, वहीं बसपा भी चमत्कारी ताबीज की खोज में है।
लेखक- विजयकांत दीक्षित

