अग्नि आलोक

*विश्वगुरु घर के रहे ना घाट के!*

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  -सुसंस्कृति परिहार 

अफसोसनाक ख़बर ये है कि हमारे विश्वगुरु का सितारा इन दिनों गर्दिश में हैं। घर का माहौल तो राहुल गांधी बिगाड़ने पर उतारू है वहीं दुनिया के मंच से डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने गुरु जी की ऐसी फ़जीहत कर रखी है कि वे  कुछ यूं शरमा रहे कि जैसे कोई मुंह दिखाई में दुल्हन शरमा जाती है।जबकि  ट्रम्प बराबर दुलार और प्यार व्यक्तिगत तौर पर उन पर उड़ेले जा रहे हैं। विदित हो विश्वगुरु से ही डोनाल्ड ट्रम्प ने राजनीति में हावी रहने के गुर सीखे हैं और आज वे उन पर ही हावी हो गए हैं।

इस जबरिया से नज़र आते प्यार को यूं विश्वगुरु कुबूल नहीं कर रहे हैं इसके पीछे के रहस्य की परतें धीरे धीरे खुलती जा रहीं हैं। सीज़फायर पर सरेंडर के बाद तो लगातार गुरु जी की बोलती बंद है और चेला लगातार प्यार प्यार करते हुए गुरुजी को शिकंजे में कसता चला जा रहा है। बीच में कुछ दिनों ताव दिखाया 56इंची ने। रुस और चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया ही था तेल की आमद शुरू हुई ही थी कि ट्म्प ने 440 वोल्टेज का करेंट मार दिया। रुस से तेल खरीदी बंद कीजिए वरना…फोन पर क्या क्या कहा सार्वजनिक नहीं है। उधर चीन से दोस्ती का नया तराना डोनाल्ड ट्रम्प ने गाना शुरू कर दिया है। मतलब यह है कि विश्वगुरु की पीर अत्यंत घनेरी है।वह उगलते निगलते नहीं बन रही है।उनकी राजनीति अब मारीशस और मलेशिया जैसे छोटे देशों में मखाना और मछली पर केंद्रित हो रही है। बताया जा रहा है कि वे डोनाल्ड ट्रम्प के आमने सामने जाने से बचने ही आसियान समिट में कुआलालंपुर नहीं जा रहे हैं वर्चुअल बात करेंगे। आखिरकार कब तक पर्दे में रहेंगे?

इधर बिहार चुनाव में भाजपा गठबंधन की हार की इबारत नीतीश बाबू ने ही लिख दी है।जब यह तय हो चुका है इंडिया गठबंधन से तेजस्वी मुख्यमंत्री होंगे और दो उपमुख्यमंत्री होंगे जिनमें एक मुस्लिम होगा तो भाजपा को सांप सूंघ गया है। नीतीश का मुख्यमंत्री बनना अब असंभव है। भाजपा यदि चुनाव आयोग के सहयोग से  येन केन प्रकारेण बिहार जीत भी जाती है तो पक्का है कोई अनजान घनघोर संघी ही मुख्यमंत्री होगा। भाजपा के उछल-कूद करने वाले नेता वसुंधरा, शिवराज की तरह छटपटाते रह जाएंगे।सूत्र बताते हैं कि इसकी संभावना कम ही नज़र आ रही है।

यानि कि यदि बिहार हार जाते हैं तो भी संघ का दबदबा बढ़ेगा और वह विश्वगुरु की राय के बगैर सीधे भाजपाध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह संजय जोशी की ताजपोशी कर देगी।यह होगा केर बेर का संग। विश्वगुरु की नींद इसी स्थिति को लेकर उड़ी हुई है और वे एक चलतू नेता की तरह भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उनकी कमजोर स्थिति को रेखांकित कर रही है। मोबाइल जलाइए,सबके पास रोशनी है तो लालटेन की क्या ज़रूरत वगैरह। मतलब लालटेन चुनाव चिन्ह का बखान।राजद को मज़बूत ही करेगा।एक मंच पर अंधियारे को दूर करने गिरिराज सिंह गरजते दिखाई दे रहे हैं वहां विश्वगुरु मौजूद हैं दांएं बाएं झांके जा रहे हैं। भाजपा की सरकार है जी और लाईट गुल मोबाइल जलवाईए या लालटेन। बिजली विभाग भी काफ़ी समझदार हो गया लगता है।

बहरहाल, विश्वगुरु की सभाओं में खाली कुर्सियां देखकर तो यही लग रहा है कि छठ पूजा के दौरान रचा गया चुनाव और चाचा नेहरू के जन्मदिन पर चुनाव परिणाम का आना।इस बार कहीं बिहार में बदलाव की हवा लेकर आ रहा है। लगता तो ऐसा भी है कि चाचा नेहरु के जन्मदिन की अवज्ञा का उनका इरादा भी पूरा होने वाला नहीं है। संभव है,उसे और अच्छे से मनाया जाए।

भाजपा और संघ की सभी चालें राहुल गांधी की कुशल रणनीति ने फेल कर दी हैं। विश्व गुरु नीतीश की तरह हड़बड़ाहट में हैं।बादल छंटने को हैं। बिहार पहुंचे, दूर रहे मतदाताओं की उपस्थिति भी मायनेखेज है। मिथिला में मैथिली ठाकुर के पाग प्रसंग से मिथिला वासी गमगीन हैं। चिराग भी चूना ही लगाते नज़र आ रहे हैं।लंदन सिंह का साथ छोड़ जाना ख़तरे का संकेत दे रहा है।

कुल मिलाकर,देश प्रमुख विश्वगुरु की हालत निरंतर ख़राब होती जा रही है।वे अब ना तो घर के रहे हैं ना घाट के। देखिए कितने दिन और उनकी ये हैसियत रहती है।

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