*सुसंस्कृति परिहार
प्रगतिशील कवि धूमिल का काव्य संकलन’ संसद से सड़क तक’ की एक छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण कविता है ‘रोटीऔर संसद’ वे लिखते हैं एक आदमी रोटी बेलता हैदूसरा आदमी रोटी खाता हैएक तीसरा आदमी भी हैजो ना रोटी बेलता हैना रोटी खाता हैवह सिर्फ़ रोटी से खेलता हैमैं पूछता हूं वह तीसरा आदमी कौन है?मेरे देश की संसद मौन है!
किसानों के अन्न और रोटी से खेलने वालों पर यह सार्थक व्यंग्य आज बेहद प्रासंगिक है । राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रत्युत्तर में सम्पूर्ण विपक्ष एक जुट हैऔर संसद में दिल्ली बार्डर पर 72दिनों से सड़क पर बैठे लाखों किसानों की बात उठा रहा है पर संसद असली मुद्दे पर मौन है और हठधर्मिता के साथ पूछ रही है विरोध करने वाले इन्हें काला कानून बता रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई यह नहीं बता पाया है कि इसमें काला क्या है. केन्द्रीय कृषि मंत्री ने राज्य सभा में कहा कि ‘मैं विपक्ष और किसान यूनियनों से दो महीनों से पूछ रहा हूं कि इन कानूनों में काला क्या है, ताकि हम उसे ठीक कर सकें. लेकिन कोई कुछ नहीं बता पाया है.’ इसका जवाब सदन में प्रतापसिंह बाजवा साहब भली-भांति दे चुके हैं ।मंत्री महोदय जी तीनों कृषि बिल वापस लेने की मांग में यदि उनकी भलाई होती तो वे इसे काला कानून नहीं कहते ।काला सफेद का सच किसान ने पहली बार समझा है या शायद समझाया गया है । आश्चर्यजनक है कि वे इतने सारे आतंकी और खालिस्तानी आपके रहते कैसे बन गए कांग्रेस तो मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है ?उसी हारी परास्त पार्टी की चर्चा बिन अभी भी सरकार की बात पूरी नहीं होती कृषि मंत्री ने कह दिया कि दुनिया पानी से खेती करती है कांग्रेस ख़ून से ।लगता है अन्तर्रात्मा सच ज़ुबा पर ले ही आती है ।
बहरहाल, संसद में सतत किसान बिलों पर विरोध जारी है बहुतेरे सांसदों ने तो साफ कहा है कि किसानों को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने मज़बूर किया गया है इसकी जिम्मेदार सरकार है । सरकार का हर फैसला जनता स्वीकार करे यह संभव नहीं ।एक तरफ संघर्ष चल रहा है और दूसरी तरफ़ अभिभाषण में कृषि कानूनों की तारीफ हो रही है।संजय राऊत तो जोर देकर पूछते हैं अर्नब,कंगना देशभक्त हैं और किसान देशद्रोही ।हक के लिए लड़ने वाला देशद्रोही कैसे हो सकता है सांसद संजय सिंह और वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई पर राजद्रोह का मुकदमा ।शर्मनाक है ।नौ विपक्षी दल लोकसभाध्यक्ष को पत्र लिखकर सदन में किसान मुद्दों पर अलग से चर्चा करने की मांग करते हैं वो अनसुनी रह जाती है ।क्या हो गया है देश की संसद को ।उधर अकाली दल की सांसद पूर्व मंत्री हरसिमरत कौर बादल की अगुवाई में 10विपक्षी दलों के 15सांसद प्रतिनिधि गाजीपुर बार्डर पहुंचते हैं किसान नेताओं से मिलने । उन्हें बैरंग वापस आना पड़ता है ।अपने देश के लोगों से मिलने जाने सांसदों को रोकना क्या जायज़ कहा जाएगा ?ऐसे में कैसे समस्या सुलझेगी ?ख़बर मिल रही है कि कृषि मंत्री के बयान को हंगामे के बीच राज्य सभा की कार्यवाही से अलग कर दिया गया है ।
इस बीच किसानों ने 6फरवरी को अपराह्न 12बजे से 3बजे तक का सांकेतिक चकाजाम के ऐलान किया है किसान इस बीच रुके हुए लोगों को पानी और नाश्ता करायेंगे । ज़रूरतमंद लोगों को भी रास्ता देंगे । सरकारी वाहन, एंबुलेंस को नहीं रोका जायेगा । दिल्ली ,उ०प्र०और उत्तराखंड को चकाजाम के मुक्त रखा गया है । दिल्ली बार्डर आने वालों को रोका गया है वे अपने जिले में प्रमुख सड़कों पर चक्काजाम करेंगे । चक्काजाम की समाप्ति की घोषणा गाड़ियों के हार्न बजाकर दी जाएगी । असामाजिक तत्वों पर नज़र रखने की चेतावनी दी गई है । विरोध प्रर्दशन का यह शांतिपूर्ण आयोजन सराहनीय है ।क्यों ना हो जिसके नेता सरकार द्वारा बोई कीलों पर फूल सजाते हों। उम्मीद की जानी चाहिए सरकार तीसरे आदमी को भली-भांति जानती पहचानती है रोटी से खेलने वालों से सम्बंध तोड़े और भारी तादाद में असंतुष्ट अपने अन्नदाता से पूर्ववत सम्बंध जोड़े ।यही आज देश गुजारिश करता है ।

