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वाहिद अली वाहिद जी की रचना ‘फेंक जहाँ तक भाला जाए

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झूठ कहां तक पाला जाए
पतन कहाँ तक टाला जाए
हाथ जोड़कर विनती है बस
बाबा दाढ़ीवाला…जाए

वक़्त गुज़र ये काला जाए
अब जो होश संभाला जाए
हिंदू मुस्लिम खेल चुके बस
सोच के वोट अब डाला जाए

पासा पुनः उछाला जाए
शकुनि बाहर निकाला जाए
सारे मनके छिटक रहे हैं
जोड़ी फिर से माला जाए

खोला ज़हन का ताला जाए
साफ़ किया हर जाला जाए
संविधान तेरा पड़ा अंधेरे
उसकी तरफ़ उजाला जाए


 #Yogesh Indian

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