कई राज्यों में भारी बारिश है। जगह- जगह बाढ़ के हालात हैं और बाँधों से नदियों में आ रहा बेपनाह पानी कई पुलों को बहा ले जा रहा है। पानी तेज भी होता है। पाप नाशक भी होता है और एक तरह का सफ़ाईकर्मी भी। बारिश और बाढ़ के दौर में पानी की भारी तादाद पाप नाशक और सफ़ाईकर्मी का काम बड़ी सिद्दत से करता रहा है और आज भी कर रहा है।
दरअसल, जो कच्चे पुल-पुलिया होते हैं यानी भ्रष्टाचार के कारण पिलपिले होते हैं वे सब इस बाढ़ में बह जाते हैं। तमाम कर्ता- धर्ताओं के पाप धुल जाते हैं। सारा पाप का घड़ा बाढ़ के नाम पर फोड़ दिया जाता है। बाँधों से जो पानी छोड़ा जाता है, हमारे देश में या प्रदेशों में उसका भी कोई ख़ास हिसाब-किताब होता नहीं है।
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू बस स्टैंड के पास नदी में उफान।
कोई बादल ही फट पड़े तब तो अलग बात है वर्ना भारी बारिश होती रहती हैं और अफसर, ज़िम्मेदार नेता, सब के सब सोये रहते हैं, जब बांध को ही खतरा पैदा हो जाता है तो यकायक बहुत से गेट खोलकर नीचे के गाँव-क़स्बों में आफ़त फैलाई जाती है। दरअसल, इस आफ़त से बाढ़ राहत की गुंजाइश निकलती है और असल कमाई का ज़रिया यही है।
लोग मरें तो मरें, व्यवस्था को, नौकरशाही को अपना घर भरने के सिवाय और कोई चिंता नहीं होती। नोट बरसने चाहिए, बस।
नोटों से याद आया कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वह याचिका ख़ारिज कर दी जिसमें दो हज़ार के नोट बदलने के लिए आईडी प्रूफ़ अनिवार्य करने की माँग की गई थी। मतलब ये कि दो हज़ार के नोटों को बिना किसी आईडी प्रूफ़ के बदलना जारी रहेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट रिज़र्व बैंक की गाइड लाइन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। अब सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है तो सही ही होगा।
रिज़र्व बैंक की गाइड लाइन पर सवाल यह उठता है कि जब बिना पहचान के ही ये नोट बदलना है तो बंद ही क्यों किए जा रहे हैं? बड़े नोट बंद इसलिए किए जाते हैं ताकि जमाख़ोरी न हो सके। जहां तक दो हज़ार के नोटों को बैंक में जमा करने का सवाल है, तो इसका कोई न कोई हिसाब कहीं न कहीं लिखा जा सकता है लेकिन बिना प्रूफ़ के नोट बदलवाने का तो कोई हिसाब ही नहीं है।
राजनीतिक पार्टियों, नेताओं और जमाख़ोर व्यापारियों की पौ बारह है। उनसे कोई पूछने वाला ही नहीं है कि दो- दो हज़ार के इतने नोट उनके पास आए कहाँ से? अगर आए भी तो अब तक इतनी मात्रा में जमा क्यों कर रखे थे? बैंक में जमा क्यों नहीं करवाए?
बहरहाल, बाढ़ आई हुई है। पानी पुलों को बहा ले जा रहा है और दो हज़ार के नोट बैंकों में बाढ़ लाने पर तुले हुए हैं।

