रश्मी त्रिपाठी
जब हम खुद को वो समझने लगते हैं जो हम होना चाहते हैं तो हम वैसे ही बनने लगते हैं पर जब हम खुद को वो समझने लगते हैं जो हम थे ही नही तो हमें झूठ पर झूठ का सहारा लेना पड़ता है। मैं दुनियाभर की संस्कृति के बारे में बहुत कम जानती हूं पर जो भी थोड़ा अपने आसपास देखा और समझा है उसमें दो धर्म ही सबसे प्रमुख हैं हिन्दू और मुस्लिम ।
और जब इनके बारे में जानना शुरु करती हूं तो पता चलता है कि दुनियाभर में आबादी का लगभग 15%हिन्दू हैं और लगभग 25% के आसपास मुस्लिम हो सकते हैं।
जो कि आधुनिक युग के अविष्कारों में शायद 1% से 3% का योगदान भी विश्व को नही दे पा रहे हैं।
अगर महानता आंकनी हो तो बता दूं कि आज तक बस 8 हिन्दू और 13 मुसलमानों को नोबल प्राइज मिला है।
इनमें भी ज्यादातर शांति या साहित्य के लिये हैं अविष्कारों के लिये नही
जबकि हजारों और नोबेल ईसाइयों और कुछ अन्य धर्मों के नाम पर हैं।
इसी तरह खेलों में भी हम लोग सबसे पिछड़े लोगों के साथ खड़े होते हैं। एक मैडल पाकर हम हवा में उड़ने लगते हैं जबकि अन्य देशों में एक खिलाड़ी ही कई मैडल ले जाता है।
ऐसा तब है जबकि हम खुद को सर्वश्रेष्ठ और विश्व गुरु मानते हैं ।
अगर कभी पूजा पाठ और अंधविश्वास से फुर्सत मिले तो सोचियेगा कि अपनी किस उपलब्धि पर हम गौरवान्वित होते हैं दुनिया को हमने क्या दिया है जिस अमेरिका और रुस के लोगों को हम संस्कृति और सभ्यता सीखने की दुहाई देते हैं वहां जाने के लिये लाइन में सबसे आगे खड़ा होना चाहते हैं।वहां जाकर हम उनके तौर तरीके अपनाकर फिर यहां के लोगों को उपदेश देते हैं और वहां सबसे ये कहते नही थकते कि अपना देश बहुत मिस कर रहें हैं जबकि सच ये होता है कि वापस आने के बारे में भी सोचना नही चाहते हैं।
हम वहां लोगों को अपने देश के महापुरुषों के बारे में बताकर खुश होते हैं जबकि यहां उनको गालियां देते हैं। वहां यहां के लोगों की ईमानदारी , त्याग और भाईचारे के किस्से सुनाते हैं और यहां लोग कितना ज्यादा भ्रष्टाचार , अन्याय और सांप्रदायिक हो चुके हैं ये आपकी समस्या ही नही है। हमें अपने इतिहास की चिंता है भविष्य की नही। हम कभी नही सोचते कि हमारे यहां के गरीबों और बेसहारों के लिये हम क्या कर सकते हैं ? रास्ते में अगर कोई एक्सीडेंट हो जाये तो हम बचकर निकलना चाहते हैं हमारे लिये किसी की जान से ज्यादा पुलिस के सवालों से बचना मायने रखता है। हम वोट देते समय अपने अधिकारों के बारे में नही सोचते हैं और न अपने क्षेत्र के उम्मीदवार के बारे में कुछ जानते हैं , जबकि हमारा लोकतंत्र सबसे बड़ा है।
हिन्दू मुस्लिम विश्व की आबादी का 40% हैं पर विश्व में वो बस अंधविश्वास और धार्मिक कट्टरता के लिये ही जाने जाते हैं। हमें अपने वैज्ञानिकों से ज्यादा धर्मगुरुओं के बारे में पता होता है।
राजनीति के बारे में हमें कोई जानकारी हो या न हो पर जीवन भर हम रैलियों में जाने और नेताओं से संबंध बनाने में ही रह जाते हैं।

