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 हमारे पास भगवान का दिया हुआ सब कुछ तो है…..

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मुनेश त्यागी

जुल्म है
गरीबी है
शोषण है
अन्याय है।

बेबसी है
बेकसी है
लाचारी है
भुखमरी है

वर्ण वाद है
बेईमानी है
छूआछूत है
जातिवाद है।

जात पांत है
ऊंच नीच है
छोटा बड़ा है
बेरोजगारी है

भ्रष्टाचार है
धर्मांधता है
श्रद्धांधता है
जादू टोना है।

अंधविश्वास है
गंडे और ताबीज हैं
मंदिर और मस्जिद हैं
शिक्षा और कुशिक्षा है।

नंगे ,बाबा और फकीर हैं
अपमान और बेइज्जती है
छल फरेब और धोखाधड़ी है
सत्ता पाने की बड़ी हड़बड़ी है।

इतने सब कुछ के बाद भी हम
इंसानों को देवी देवताओं और
भगवानों से और क्या चाहिए?
बहुत कुछ तो दे ही दिया है ना?

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