डॉ.अभिजित वैद्य
भारत की स्वतंत्रतापूर्व राजनीति को अत्यंत उच्च नैतिकता प्राप्त करने का काम महात्मा गांधीजी ने किया l
पंडित नेहरूजी, सरदार पटेलजी, सुभाषचंद्र बोसजी, मौलाना आझादजी, तथा उस ज़माने के सभी नेताओं
ने इन नितिमुल्यों की रक्षा की l डॉ. बाबासाहब आंबेडकरजी ने इसी नैतिक मूल्योंका जतन करके राजनीति
अपनाई और स्वातंत्र्योत्तर भारत के मूल्याधिष्ठित यात्रा को संविधानात्मक पुष्टि दी l अपितु स्वतंत्रता के
बाद भारतीय राजनीति इतनी उच्चस्तर पर कायम नहीं रह सकी l इसका नैतिक अधःपतन कुछ दशकपूर्व
शुरू हुआ l ऐसा तो हुआ ही था फिर भी गुजरात तथा केंद्र में भाजपा सत्ता में आने पर इस नैतिक पतन की
गति तीव्र गति से बढ़ गई l इसके पूर्व राजनितिक नैतिकता की घसरड ज्यादा तर निजी तौर पर थी I
भाजपा ने इस घसरड को संस्थात्मक चेहरा दिया, जनतंत्र, संविधानद्वारा प्रेषित मूल्यों का ‘न भूतो न
भविष्यति’ तरह का अवमूल्यन किया l राजनितिक नैतिकता की यह घसरड तथा संविधान मूल्यों के
अवमूल्यन को हिंदू धर्म की अप्रत्यक्षरूप में धर्म की स्वीकृति देने की व्यवस्था भी की l प्रत्यक्षरूप में धर्म ने
नैतिक मूल्यों की रक्षा करना अभिप्रेत है l यहाँ किसी एक धर्म पर आधारित राष्ट्र निर्माण करने के लिए
अनैतिक राजनीति का आधार लिया जा रहा है l
उदहारण के तौर पर अगर आप गत कुछ वर्षों की राजनीति का गतिमान चलचित्रपट देख लेंगे तो भी आपके
ध्यान में यह बात आ जाएगी l
“हमारी सरकार आने पर सिंचन घोटाले में हम अजितदादा की क्या स्थिति बनाएँगे? हमारे नाथाभाऊ
खडसे जी के शब्दों में कहाँ जाए तो, हमारी सरकार आने पर अजितदादा जेल में चक्की पिसिंग अँड पिसिंग
अँड पिसिंग l” २०१४ के चुनाव प्रचार में देवेंद्र फडणवीस का यह भाषण सुचारुढंग से स्मृतिभ्रंश होने वालों
के लिए आज भी यु ट्यूब पर उपलब्ध है I “ हम कभी भी राष्ट्रवादी कांग्रेस के पक्ष में नहीं जाएँगे, नहीं
जाएँगे l राष्ट्रवादी कांग्रेस के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हमने ही किया,” ऐसा भी उन्होंने कहा था l इसी देवेंद्र
फडणवीस ने २०१९ में अजितदादा के साथ स्वयं मुख्यमंत्री बनकर और अजितदादा को जेल की ‘चक्की
पिसिंग’ के बजाय उपमुख्यमंत्री पद पर बसाकर बहुत तड़के शपथविधी का समारोह संपन्न कराकर तीन
दिन का वह सुप्रसिध्द शासन स्थापित किया था l तीन दिन के बाद अजितदादा उद्धव ठाकरे की शासन में
उपमुख्यमंत्री नियुक्त हुए l इस सरकार का अंदाजन पूरा कार्यकाल कोविड महामारी का था l जनता जब
महासंकट का सामना कर रही थी तब भाजपा विरोधी पक्ष के रूप में कितना खतरनाक साबित हो सकता है
इसकी प्रतीति आ रही थी l परमसिंग नामक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी ने तत्कालीन गृहमंत्री अनिल
देशमुख पर १०० करोड़ वसूली की उद्देश्य का स्वैर आरोप किया और अनिल देशमुख जेल में गए l एक वर्ष
बाद बिना कोई आरोप सिध्द होकर वे रिहा हो गए l आगे चलकर संजय राउत को भी जेल की हवा खानी
पड़ी l सुशांतसिंग, दिशा सालियन, पूजा चव्हाण, मनसुखानी जैसी भयावह एवं गूढ़ घटनाओं की शृंखला
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शुरू हो गई l अंबानी का निवासस्थान अन्तालिया के बाहर एक गाड़ी में जिलेटिन की छड़ियाँ मिल गई l
शाहरुख़ खान का बेटा आर्यन खान को फँसाकर समीर वानखेड़े नामक अधिकारी आधुनिक सिंघम के रूप में
प्रसिध्द हुआ l आगे चलकर इस सिंघम पर ही भ्रष्टाचार के अनेक आरोप लगाए गए l कंगना रणोत नामक
अभिनेत्री विषैला नृत्य करने लगी l
इन सभी घटनाओं का उद्धव ठाकरे ने डँटकर मुकाबला किया l उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई l उनकी भाषा
में भी परिवर्तन हुआ l वे बालासाहब के आलावा प्रबोधनकार ठाकरे जी के विचारों की भाषा बोलने लगे l
चोटी और जनेऊ का ब्राम्हणवादी हिंदुत्व का इनकार करके सर्वसमावेशक हिंदुत्व प्रेषित करने लगे l उनकी
भूमिका में हुआ यह बदलाव भाजप एवं संघ के कट्टर ब्राम्हणवादी नेतृत्व को भले ही चुभनेवाला साबित
होता लेकिन उनके ही पक्ष के बहुजन नेताओं को सुखदायी होना अपेक्षित था l अपितु ऐसा हुआ नहीं और ये
बहुजन नेता ब्राम्हणी षडयंत्र के शिकार हो गए l उद्धव ठाकरे की सरकार में ढाई वर्ष सत्ता का उपभोग
लेकर उनके ही अनेक निष्ठावान एकनाथ शिंदे की उँगली पकड़कर शिवसेना का छेद करके फडणवीस के
साथ सरकार बनाकर फिर से सत्ता में आ गए l कांग्रेस एवं राष्ट्रवादी के साथ सत्ता में जाने से अपना हिंदुत्व
डूब गया इस बात का उन्हें अचानक साक्षात्कार हुआ l अनपेक्षित तौर पर शिंदे के गले में मुख्यमंत्री पद की
माला पड गई और अपमान निगलकर फडणविस को उपमुख्यमंत्री पद पर संतोष मानना पड़ा l शिंदे-
फडणवीस सरकार को जनसमर्थन कभी भी नहीं मिला l शिवसेना से बिखरनेवाले सभी का उल्लेख सर्व-
सामान्य जनता भी गद्दार और खोका बहाद्दर नाम से ही करती रही l क्योंकि शिवसेना को छोड़कर इन
गद्दारों ने चोरी-छिपे सूरत को जाना, वहाँ से रिक्षा की तरह चक्कर लगानेवाले चार्टड हवाईजहाज से गुहाटी
को जाना, वहाँ ‘रॅडीसन ब्लू’ में अनेक सप्ताहों तक पंचतारांकित मेहमाननवाजी का लाभ उठाना और
महाराष्ट्र में वापस आने पर फिर से सत्ता में विराजमान होना ऐसा घटिया काम किया I यह सब घृणा
निर्माण करनेवाला था l दूसरी ओंर मुंबई महानगरपालिका, लोकसभा एवं विधानसभा इन तीनों चुनाओं में
भाजपा का पराजय होगा ऐसा सभी सर्वेक्षण कहते रहे l देश में मोदी की लोकप्रियता बडी मात्रा में कम
होने लगी थी l कर्नाटक में भाजपा का दारुण पराभव हुआ l मोदी की मदद हेतु बजरंगबली अवतरित नहीं
हुए l देश के गृहमंत्री अमित शाह ने तो ‘अगर कर्नाटक में भाजपा हार गई तो दंगा-फसाद होगा’ ऐसी
धमकी देने पर भी वहाँ जनता ने इसकी परवाह नहीं की l जिन राज्यों में चुनाव आने वाले हैं वहाँ भी इस
तरह हार होगी ऐसा दिखाई दे रहा था l अब फिर से कीचड़युक्त एक ‘ऑपरेशन लोटस’ करने की
आवश्यकता निर्माण हुई थी l राष्ट्रवादी नेता हसन मुश्रिफ जेल की हवा खाकर आए थे l राष्ट्रवादी के
भ्रष्टाचारों के हजारों सबूत लेकर किरीट सोमय्या दहाड़ लगाकर घुमते थे l नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश की एक
सभा में राष्ट्रवादी पर खुलेआम आरोप किया की राष्ट्रवादी कांग्रेस ने जिला सहकारी बैंक, सिंचन तथा खान
आदि में सत्तर हजार करोड़ रुपयों का झोल किया है l तीसरे ही दिन अजितदादा अपनी जन्मदात्री राष्ट्रवादी
कांग्रेस को छेद देकर, जन्मदाता राजकीय पिता को, लात मारकर शिंदे मंत्रिमंडल में दुसरे उपमुख्यमंत्री के
रूप में विराजमान हुए l डबल इंजिन का सरकार अब तिगुना इंजिन का हो गया l फडणवीस के शब्दों में
उनका सरकार अब ‘त्रिशूल’ बन गया l भाजपा ने राष्ट्रवादी के जिन नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप किए थे
वे सभी भाजपा के मंत्रिमंडल में मंत्री बन गए l गिरफ्तारी और कारावास तल गया l लाल दिये की गाड़ी
मिल गई l ‘जेल की हवा’ या ‘लाल दिया’ ऐसा विकल्प देने पर बहुतांश राजकीय नेता कौनसा विकल्प
अपनाएँगे यह बताने की आवश्यकता नहीं l मोदिबाबा के शरण आएँ और आरोपों से मुक्त हुए l भाजपा में
आ गए और पावन हो गए l भाजपा ने भारतीय राजनीति की एक साधारण सूत्र में नीति बनाई l ‘जो
विरोध में, वह जेल में, और जो साथ में वह सत्ता में’ l अब चुनाव आयोग और न्यायालय की मदद से जिस
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तरह से शिवसेना पक्ष को भगाकर ले गए ठीक उसी तरह की स्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्ष की, की जाएगी
यह बात पक्की है l
शिवछत्रपति – शाहू – फुले – आंबेडकर की परंपरा अपनानेवाली महाराष्ट्र की राजनीति का गत कुछ वर्षों
का यह गतिमान आढावा l इस राजनीति का अन्य किसी प्रकार का विश्लेषण करने में उर्जा खर्च करना
अर्थहीन है l इस गंदगीभरी राजनितिक नाट्य में सहभागी हुए कलाकारों के बारे में बोलना भी मुर्खता होगी
l देश के अनेक राज्यों में इस तरह के नाटक होते रहेंगे और ये कलाकार इसी तरह की भूमिका निभाते रहेंगे l
यहाँ नायक तथा खलनायक अलटपलट कर भूमिका निभाते हैं l आज का खलनायक कल का नायक तो आज
का नायक कल का खलनायक l जहाँ भाजपा सत्ता में नहीं है वहाँ के हर राज्यों को यह भोगने की तैयारी
रखनी होगी l इस राजनीति के सम्मुख राघोबादादा एवं आनंदीबाई का अपना केवल १८ वर्ष का भतीजा –
पेशवा नारायण पर, पुणे के शानिवारबाडे में दिन-दहाड़े कराए गए गारदीं द्वारा हमला करने की राजनीति
भी फीकी साबित होगी l गारदी का आधुनिक भाषा में मतलब ‘मर्सिनरी’ l आज सभी शासकीय यंत्रणा
सत्ताधारी पक्ष की क्या ‘गारदी’ बनी है ? ऐसी आशंका निर्माण होनेवाले हालात निर्माण हुए हैं l
इन गारदियों की झुंड में इडी, आयटी, सीबीआय, एटीएस, इलेक्शन कमीशन, सनदी अधिकारी, पुलिस
अधिकारी और न्यायाधीश भी शामिल होते हुए दिखाई देते हैं l भारतीय रजनीति का इतना छोर अधःपतन
कभी देखा नहीं था l ‘न खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ ऐसी घोषणा करनेवालों का या स्वछता अभियान नहीं है l
भ्रष्ट विरोधक पर सरकारी गारदी छोड़कर उन्हें डराया जाता है, डर के मारे वह लाचार होकर गद्दार बन
गया की उस पर गोमूत्र छिड़काकर उसे शुध्द करने का और उसे अपनी सत्ता में हिस्सेदार बनाना l इसका
नाम ‘ऑपरेशन लोटस’, राजनितिक नैतिकता, नीतिमत्ता, साधन शुचिता इन सभी की हत्या l ऐसी हत्या
करनेवाले ‘नथुराम गोडसे’ संघ परिवार ने हर स्थान पर खड़े किए हैं l इसके लिए नरेंद्र मोदी और अमित
शाह जैसी दो प्रवृत्ति को दोष देना उचित नहीं l उन्हें जिस सोच ने पैदा किया है उस सोच को जाब पूछना
चाहिए l वास्तव में जब नरेंद्र मोदी गुजरात में आते ही व्यक्तिकेंद्रित राजनितिक एक नए अध्याय की
शुरुवात हुई थी l लेकिन संघ के हिंदू राष्ट्र के अंतिम सपने की ओर जाने की उनकी क्षमता है इस बात का
संघ को यकीन होने के कारण संघ ने उनके समर्थन में अपनी भारत की तथा भारत के बाहर की पूरी ताकत
लगा दी l उनकी सत्ता की शिखर की ओर चल रही यात्रा को तात्विक सकोटर में बिठा दिया l अपने अंतिम
सपने की ओर जाने के लिए मोदी नामक व्यक्ति की प्रतिमा बड़ी मात्रा में गुब्बारे की तरह हवा भरकर बड़ी
कियी गई l इसीसे वे देश के प्रधानमंत्री बन गए और दूसरा अध्याय शुरू हुआ l ऐसी राजनीति में नेता
महान बन जाते है और पक्ष छोटा बन जाता है l पक्ष की तत्वप्रणाली नष्ट हो जाती है l वास्तव में संघ और
उनका राजनैतिक चेहरा भाजपा के राजनैतिक तत्वज्ञान की नींव एक ही है – हिंदुत्व l यह हिंदुत्व भी
सर्वसमावेशक नहीं अपितु ब्राम्हण्यवाद पर आधारित है l धर्म की भाषा जब राजनीति की बुनियाद बन
जाती है तब सत्ता ही धर्म बनता है l धर्म के नाम पर सभी राजनैतिक अनैतिकता धर्मस्वीकृत बन जाती है
l भारतीय राजनीति में व्यक्तिसापेक्ष राजनीति के अध्याय की शुरुवात मोदी राजनीति में आने से बहुत
पहले शुरू हुई थी l व्यक्तिकेंद्रित राजनीति ने जाने-माँने बड़े पक्षों की तात्विक बुनियाद उखड़ गई और किसी
भी प्रकार की बिना तत्वप्रणाली के पक्ष भी निर्माण हुए l व्यक्तिकेंद्रित राजनीति केवल सत्ताकेंद्रित होती है l
जब तक विशिष्ट तत्वज्ञान राजकीय पक्ष निर्माण करता है तब उस तत्वज्ञान के आधार पर समाज और देश
में परिवर्तन करने के उद्देश से ध्येययुक्त कार्यकर्ताओं की फ़ौज निर्माण होती है I यहाँ नेता गौण रहते है और
तत्वज्ञान नेतृत्व करता है l सत्तापरिवर्तन यह अपना तत्वज्ञान प्रस्थापित करने का और उसके आधार पर
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देश में परिवर्तन करने का साधन बन जाता है l राजनीति से जब तत्वज्ञान नष्ट होता है तब सत्ता ही साध्य
बन जाती है l जब सत्ता ही साध्य बन जाती है तब उस सत्ता की ओर ले जानेवाली साधनाओं की शुचिता,
शुध्दता एवं नैतिकता अर्थहीन बन जाती है l सरकारी यंत्रणा को गारदी बनाना और कौनसा भी विरोधी
पक्ष का भेद करके गद्दारों को सत्ता देना ऐसी राजनीति इसीसे जन्म लेती है l लेकिन देश के भविष्य के लिए
इस तरह की राजनीति अत्यंत घातक स्थापित होती है l गद्दारों के शोरगुल में जनता की आवाज और उनकी
मुलभूत समस्याओं की सुध-बुध खो जाती है l गारदी मुँहजोर बनने का धोखा भी है l अगर ऐसा ही होता
रहा तो भारत का पाकिस्तान होने में देर नहीं लगेगी l पाकिस्तान में सत्ता में कौन आएगा यह उनकी लष्कर
तय करती है l गारदियों के ध्यान में जब यह बात आती है की हमारी ही ताकत पर सत्ताधारी गद्दार खड़े
करके गद्दी पर रहते हैं तब गारदी को ही गद्दी पर आने की महत्वाकांक्षा निर्माण हो सकती है l
पुतिन ने युक्रेन का युध्द जितने के लिए प्रिगोझीनके किराए के वॅग्नेर फ़ौज का उपयोग किया l प्रिगोझीन ने
अपने गारदियों को मॉस्को की ओर कूच करने का आदेश दिया l पुतिन ने फिलाल इन किराए के सिपाहियों
को और उनके मुखिया को लगाम लगाया है फिर भी उन्हें प्रिगोझीन को अभय देना पड़ा l मोदी और अमित
शाह इससे भी घातक खेल हमारे देश में कर रहे हैं l उन्होंने सभी सरकारी यंत्रणा को अपनी वॅग्नर फ़ौज
बनाई है l इसमें से गारदी ही कभी गद्दी पर बैठ जाएँगे ऐसा कुछ नहीं कह सकते l अन्यथा मोदी को पुतिन
होना पड़ेगा l उनका यही इरादा है ऐसा अब महसूस होने लगा है l
हमारी देश की जनता को ही यह निश्चित तौर पर तय करना होगा की हमें गारदी एवं इन गद्दारों की
राजनीति बिलकुल नहीं चाहिए l

