-डॉ ललित वया
मैंने तो गांधी को नहीं मारा
सबसे पूछा,
हर किसी को पूछा
गांधी को किसी ने नहीं मारा।
पर मर तो गया है गांधी।
ये भी तो सत्य है।
कभी मैं भी था डेढ़ पसली,
जैसा गांधी था।
तो फिर गांधी को किसने मारा।
शायद
नहीं, सच मे गांधी को हमने,
हम सबने मिल कर मारा
हम सबने !
सुविधा जनक है ये स्वीकारोक्ति।
सब आरोपी है।
गवाही देने के लिए कोई नहीं।
किसी के इंगित पर भी
एक अकेला
कैसे मार सकता है,
एक विचार को।
आओ.
प्रार्थना करें और स्वीकार करें
हम सबने मिलकर
गांधी को मारा है।

