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विनाश नहीं, हमें पूरे देश का विकास चाहिए

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मुनेश त्यागी 

       1947 में जब हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था तो हमारे देश की जनता को संविधान के माध्यम से गरीबी शोषण जुल्म , अन्याय और भेदभाव को दूर करने की बात की गई थी और समाज में समता, समानता और आपसी भाईचारा कायम करने की बात कही गई थी, मगर आज 75 साल की आजादी के बाद भी वे सपने पूरे नहीं हो रहे हैं और उन तमाम संवैधानिक सिद्धांतों और मान्यताओं को मिट्टी में मिलाने की मुहिम जारी है।

      आजकल हमारे देश में मंदिर, मस्जिद, भगवान, असमानता, बिखराव, अन्याय, नफरत, गुलामी, अज्ञानता, धर्मांधता, विवेकहीनता, पूंजीपतियों की धन दौलत और मुस्लिम हिंदू दंगों की बातें हो रही है, जनता को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है। मगर उनकी रोटी, रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, ज्ञान विज्ञान, रोजगार की बात नहीं हो रही है और तमाम तरह के शोषण, गरीबी, भुखमरी, अन्याय, जुल्मों सितम, अपराध, अंधविश्वास और पाखंडों को दूर करने की बात नहीं हो रही है। शोषण और अन्याय पर आधारित, इस जनविरोधी निजाम को और नीतियों को बदलने की बात नहीं हो रही है।

    जनता को न्याय देने की बात नहीं हो रही है। उसके अधिकार देने की बात नहीं हो रही है, उसे तर्कशील और विवेकवान नहीं बनाया जा रहा है। जनता के बुनियादी सवालों को हल करने पर कोई चर्चा नहीं हो रही है सिर्फ जुमलेबाजी हो रही है और जनता को मीडिया और अंधविश्वासी और धर्मांध ताकतों के माध्यम से गुमराह किया जा रहा है।

        हम सरकार की इन नीतियों और साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली इन जन विरोधी ताकतों से सहमत नहीं हैं। इसीलिए हमारा कहना है कि,,,,,

मंदिर नहीं, हमें स्कूल चाहिए
धर्म नहीं, हमें अधिकार चाहिए,
मनुस्मृति नहीं, हमें संविधान चाहिए
भगवान नहीं, हमें विज्ञान चाहिए।

भाषण नहीं, हमें राशन चाहिए
धर्मतंत्र नहीं, हमें जनतंत्र चाहिए
दलाली नहीं, हमें मजदूरी चाहिए
पूंजीवाद नहीं, हमें समाजवाद चाहिए।

असमानता नहीं, हमें समानता चाहिए
न्याय नहीं, हमें इंसाफ चाहिए
बिखराव नहीं, हमें एकता चाहिए,
भीख नहीं, हमें अधिकार चाहिए।

गुलामी नहीं, हमें आजादी चाहिए
अज्ञान नहीं, हमें ज्ञान चाहिए,
अविवेक नहीं, हमें विवेक चाहिए
नफरत नहीं, हमें प्यार चाहिए।

पाखंड नहीं, हमें तर्क और सबूत चाहिए,
जुमलेबाजी नहीं, हमें परिणाम चाहिए,
भाषणबाजी नहीं, हमें अमल चाहिए
बेरोजगारी नहीं, हमें रोजगार चाहिए।

दुश्मनी नहीं, हमें भाईचारा चाहिए
देश बेचना नहीं, नव निर्माण चाहिए,
हिंदू मुस्लिम नहीं, हमें हिंदुस्तानी चाहिएं
विनाश नहीं, हमें देश का विकास चाहिए।

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