Site icon अग्नि आलोक

मान्यवर आप अपनी नहीं अपने पद की गरिमा का तो ख्याल रखें

Share

नोंक -झोंक , कटाक्ष , हास -परिहास और चुहलबाजी लोकतंत्र में ही हो सकती है l अन्य किसी व्यवस्था में इसकी कोई संभावना ही नहीं है l केआरलक्ष्मण और अन्य कार्टूनिस्ट के व्यंग्य और कटाक्ष भरे कार्टून देखकर नेहरू जी मुस्कुरा देते थे l संसद में सरकार पर जमकर हल्ला बोलने वाले डॉ लोहिया और कांग्रेस सांसद तारकेश्वरी सिन्हा के बीच की नोक झोक संसद के तनाव को दूर कर देती थी l अटल बिहारी वाजपेई जब सरकार पर चुटकी लेते थे तो सरकार भी अपनी हंसी नहीं रोक पाती थी l लोकतंत्र का यह खूबसूरत पक्ष धीरे धीरे कमजोर होता जा रहा है l जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे तो अटल बिहारी वाजपेयी के कविता संग्रह ‘मेरी इक्यावन कविताएँ’ का लोकार्पण किया नरसिम्हा राव ने और फिर कुछ समय बाद नरसिम्हा राव की आत्मकथा The Insider का लोकार्पण किया अटल बहरी वाजपेयी ने. केवल इतना ही नहीं जब संयुक्त राष्ट्र में तत्कालीन पाकिस्तान प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने कश्मीर में मानवाधिकारों हनन को ले कर एक संकल्प (Resolution) पारित कराना चाहा तो प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भारत के प्रतिनिधि रूप में भेजा विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी को! विश्व को यह संकेत स्पष्ट रूप से गया कि भारत में लोकतंत्र सर्वोपरि है l
क्या अब सत्तापक्ष और विपक्ष में ऐसा सौजन्य और समझदारी है ? मोदी जी ने सब पर पलीता लगा दिया l मोदी जी किसी और से नहीं अपने अटल जी से ही शालीनता , सौजन्यता और वाणी संयम की प्रेरणा ले ले तो इस लोकतंत्र और भारत पर बड़ा उपकार होगा l संसद में किसी हंसती हुई महिला सांसद को ताडका , सूर्पनखा या राक्षसी कहकर आपने ना  केवल नारी शक्ति का अपमान किया  बल्कि अपने संस्कार का परिचय देकर यह बता दिया कि आप कितने टुच्चे इंसान हैं l आप अभी संसद और संसद के बाहर जिस तरह की शब्दावली , मुहावरे और जुमले अपने विरोधियों के लिए उपयोग कर रहे है वह एक स्वयसेवक के लिए ठीक होगा लेकिन प्रधानमन्त्री की गरिमा के अनुरूप तो कतई नहीं है l

गोपाल राठी की कलम से

Exit mobile version