अग्नि आलोक

बलात्कार : क्या हैं मूलभूत कारण?

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पवन कुमार

मूलत: महिला जिम्मेदा
भड़काऊ पोषाक़, जिस्म की नुमाईस, मादक अदाएं, खुलेआम व्वायफ्रेंड्स के साथ उद्दीपक हरकतें।
यानी “आ बैल मुझे मार” के अर्थ वाली सैक्स अपील।
बच्ची या वृद्धा से रेप के लिए
भी इनका अध-नंगापन, नंगापन जिम्मेदार बनता। इनके द्वारा उद्दीप्त किया गया कमजोर चरित्र का पुरूष जब इन्हें नहीं भोग पाता तब जिसे पाता है, उसे ही मसल देता है:फंतासी में।
एफबी जैसी सोसल साइट्स पर अधिकांश: महिलाओं का जो मानसिक स्तर उभरता है, उस पर तरस आता है।
पोज के साथ वे लिखती हैं :
-मैं कैसी लग रही हूं?
-सच-सच बताना, मैं कितने साल की लग रही हूं?
-मैं मिली तो क्या बनाओगे: प्रेमिका, पत्नी, रखैल, नौकरानी?
-मेरा कोई भाई नहीं। क्या आप बनोगे?
-लाईक करो, मैं फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भेजूंगी, पक्का।
-मुझे लाईक,कमेंट,शेयर करो: अपना नं. दूंगी।
क्या लाज़बाब मानसिक स्तर है। है ना?

सामाज का नजरिया
समाज पीड़िता की उपेक्षा करता है: बलात्कारी का बहिष्कार नहीं करता।
कई बार तो अपराधी सम्मान पाता है।
यह सनातनी सच है:
-जिसने छोटे भाई की पत्नी से रेप किया वो हमारे लिए देवगुरू (बृहस्पति) है।
-जिसने संत की पत्नी को शिकार बनाया वो हमारे लिए देवराज (इंद्र) है।
-जिसने प्रणय निवेदन करने वाली से पहले मसखरी किया, फिर उसके नाक-कान कटवा लिए: वो मर्यादा पुरूषोत्तम (राम) है।
“अहै कुमार मोर लघु-भ्राता“(रामचरितमानस: तुलसीदास) कहा राम ने सुपर्णखा से, और बोला वो तुमसे विवाह कर लेगा। जबकी उसकी शादी के साथ ही लक्ष्मण की शादी भी हुई थी)
-जिसने बहन की इस दशा का बदला लेने के लिए तात्कालिक आवेश में सीताहरण किया. फिर भी छेड़खानी-बलात्कार नहीं किया वो (रावण) हर साल जलाया जाता है।

नामर्दी जनित कुंठा
पत्नी के सामने नामर्द सावित होने वाले लोग खीझ, अवसाद, यौन कुंठा जनित मनो-विकृति से ग्रसित हो जाते हैं।
यह मनोविकार उन्हें ‘अपमान’ का बदला लेने के लिए नारी के प्रति, ‘प्रतिशोधी भाव’ से भर देता है।
फिर रेप, गैंगरेप, मर्डर (निठारी कांड आदि)।
(चेतना विकास मिशन)

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