मुनेश त्यागी
भारत की जनता सोच रही थी कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दौरे पर जा रहे हैं और वे वहां अमरीका की सरकार को बात करेंगे कि अमेरिका अपनी पूंजीपतियों की धन-दौलत बढ़ाने वाली अपनी वैश्विक प्रभुत्वकारी नीतियों को बदलकर पूरी दुनिया और भारत की एक अरब से ज्यादा गरीब जनता को तमाम समस्याओं से राहत दिलवाएंगे।
मगर अभी तक ऐसा कोई संदेश भारत की जनता को नहीं मिला है। हां यह जरूर हुआ है कि अमेरिका के कुछ बड़े पूंजीपति बहुत खुश हैं, जैसे कि भारत के प्रधानमंत्री ने उन्हें पूरी दुनिया ही बख्श दी है और देश से अनाप-शनाप और बेरोकटोक मुनाफे और धन कमाने की, उनकी चिर परिचित मुराद पूरी कर दी है।
अधिकांश भारतीय सोच रहे थे कि आजकल भारत जी 20 का अध्यक्ष है, इस नाते वह अमेरिका को अपनी लूटने वाली नीतियों को छोड़ने को कहेगा, वह अमेरिका की वैश्विक प्रभुत्व कायम करने की नीतियों को छोड़ने को कहेगा और अमेरिका द्वारा दुनिया को लूटने वाली अपनी उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण की वैश्विक नीतियों को छोड़ने को कहेगा, मगर मोदी द्वारा ऐसा कुछ करने की कोई खबर नहीं आई है।
यह भी माना जा रहा था कि मोदी अमेरिका से कहेंगे कि वह भारत की जनता को मुक्त और आधुनिक शिक्षा देने में सहयोग करे, ताकि भारत के बच्चों को उच्च शिक्षा पाने के लिए दुनिया के देशों में न जाना पड़े और भटकना न पड़े। यह भी माना जा रहा था कि मोदी अपने विशाल बाजार की ताकत के बल पर अमेरिका को बात करेंगे कि वह भारत की जनता को आधुनिक और मुफ्त इलाज की सुविधाएं प्रदान करने में मदद करें, आधुनिक इलाज की तमाम दवाएं और मशीनें उपलब्ध कराएं ताकि भारत की जनता इलाज में होने वाले भयंकर खर्चों से बच सके और सारी जनता को सस्ते इलाज से वंचित न होना पड़े, मगर ऐसी भी कोई खबर नहीं आई है।
यह भी माना जा रहा था कि मोदी सरकार जनता को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए अमरीका की न्याय प्रणाली का अध्ययन करके भारत में मुकदमों के अनुपात में अदालतें बनाएंगे और मुकदमों के अनुपात में न्यायाधीश और कर्मचारी नियुक्त करेंगे ताकि भारत में लंबित 5 करोड़ मुकदमों में वादकारियों को सस्ता और सुलभ न्याय मिल सके।
याद रहे कि अमेरिका में दस लाख मुकदमों पर 107 जज नियुक्त करना लाजमी है, जबकि भारत में यह संख्या दस लाख मुकदमों पर मात्र 20 जज है। मगर बेहद अफसोसजनक बात है कि मोदी सरकार जनता को सस्ता और सुलभ न्याय देने में अमेरिका की नीतियों का पालन करके उसकी न्यायपालिका में उदारीकरण की नीतियों को मानने और लागू करने को भी तैयार नहीं है।
लोग सोच रहे थे कि मोदी अमेरिका की नीतियों पर चलते हुए भारत से गरीबी का खात्मा करने के लिए, अमेरिका की नीतियों को भारत में लागू करने की नीति अपनाएंगे और भारत में मौजूद एक अरब से ज्यादा गरीब लोगों को गरीबी के दलदल से निकालने की नीतियों पर का ब्लूप्रिंट लाएंगे, मगर मोदी सरकार द्वारा ऐसे किसी ब्लूप्रिंट लाए जाने की कोई सूचना भारत में नहीं आई है।
अमेरिका जाने से पहले 120 करोड़ भारतीय किसानों मजदूरों की दुर्दशा सुधारने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के किसानों मजदूरों से या उनके प्रतिनिधियों से भी ऐसी कोई वार्ता या बातचीत नहीं की है। अतः इन लोगों को अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी, खर्चीली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से राहत मिलने के कोई भी आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
उपरोक्त विवरण से यह साफ है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा से सिर्फ और सिर्फ अमेरिका और भारत के सबसे बड़े पूंजीपतियों को ही लाभ मिलने जा रहा है, केवल और केवल उनके ही मुनाफे में बढ़ोतरी होने वाली है और इसका सबसे बड़ा फायदा अमेरिका के चंद पूंजीपतियों को ही होने जा रहा है। इससे भारत की अनेकों अनेक समस्याओं से पीड़ित जनता को कोई लाभ नहीं होने जा रहा है।
इस यात्रा से भारत, और बड़े पैमाने पर अमेरिकी पूंजीपतियों की लूट के जाल में ही फंसने जा रहा है और मोदी सरकार देखते ही देखते, अमेरिका के इस पूंजीवादी दुष्चक्र के भंवर में फंस गई है जिसका सबसे बड़ा नुकसान, भारत की गरीब जनता और किसानों मजदूरों को ही होने जा रहा है।

