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हो  रही   है  शरारतें  जो  शराफतो   के   संग

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सरल कुमार वर्मा

हो रही है शरारतें जो शराफतो के संग
दिल्लगी न समझो इन्हे जज्बातो के संग

आंधियों में पत्ते ही नहीं दरख़्त भी टूटेंगे
आती नहीं हरियालिया खुरापातो के संग

आसान है धर्म के लिए इंसान का बंट जाना
मुश्किल है उन्माद में खड़े होना इंसानों के संग

दीवारे दरक गई तो इमारत का क्या होगा
कैसे बचाओगे घर अपना हिमाकतो के संग

जुबां पर सच न आ जाए इस एहतियात में
सबसे नज़रे चुराते हो मुलाकातों के संग

किसी घिनौने किरदार को लाख सजाओ तुम
करेंगे लोग उसे प्यार कैसे नफरतों के संग

सबसे नजर बचा कर गुजर जाओगे मगर
क्या बताओगे बच्चो के सवालातो के संग
सरल कुमार वर्मा
उन्नाव, यूपी

9695164945

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