हिसाम सिद्दीकी
अपने एलक्शन दौरे को सरकारी शक्ल देने के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने पन्द्रह जुलाई को बनारस में दर्जनों ऐसे कामों का इफ्तेताह और संगेबुनियाद रखा जिनका इफ्तेताह और संगे बुनियाद रखने का काम कारपोरेटरों और मेम्बरान असम्बली को करना चाहिए था इसे कहते हैं आम लोगों की आंखों में धूल झोंकना, इस मौके पर वजीर-ए-आजम मोदी ने अपनी चुनावी तकरीर की उसे खालिस झूट ही कहा जा सकता है। उनकी यह तकरीर पूरी तरह अगली फरवरी-मार्च में होने वाले प्रदेश असम्बली के एलक्शन में वोट बटोरने के लिए थी। मोदी ने कहा कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान कोविड से लड़ने और उसपर काबू पाने के लिए वजीर-ए-आला योगी की सरकार ने जिस तरह काम किया वह बेमिसाल (अभूतपूर्व) था। यह सुनकर लगा कि मोदी उत्तर प्रदेश के लोगों को पूरी तरह बेवकूफ समझते हैं और यह समझते हैं कि एलक्शन के वक्त वह जो कुछ कह जाएंगे लोग उसे आंख बंद करके सच मान लेंगे और बीजेपी को वोट दे देंगे। शायद ही प्रदेश का कोई कुन्बा हो जो पिछले अप्रैल, मई और जून में कोविड-19 की जद में न आया हो।
अस्पतालों में बिस्तर नहीं थे, आक्सीजन नहीं मिल रही थी, जरूरी दवाएं और इंजेक्शन नहीं मिल रहे थे। हद तो यह है कि कोविड से मरने वालों की चिता जलाने के लिए श्मशान घाटों पर लकड़ी नहीं थी, बिजली से चलने वाले श्मशानों में दस से चौबीस घंटों की वेटिंग थी। यही हाल कब्रस्तानों का था कई कब्रस्तानों में जमीन तंग हो गई, घरों से अस्पताल और अस्पतालों से श्मशान व कब्रस्तान ले जाने के लिए अम्बुलंस वाले चार-पांच गुना ज्यादा पैसा चार्ज कर रहे थे, बड़ी तादाद में समाजी काम करने वाली तंजीमें लोगोें की मदद मंे लगी हुई थीं। प्रदेश में सब कुछ था अगर कोई नहीं था तो सरकार कहीं नहीं थी और कोई सरकारी इंतजाम नहीं था। श्मशानों मेें लकड़ी और लोगों के पास पैसा नहीं था तो कानपुर, उन्नाव से इलाहाबाद, गाजीपुर, बनारस और बिहार तक गंगा के किनारे बालू में हजारों लाशें दबा दी र्गइं जिनकी तसावीर पूरी दुनिया में वायरल हुईं और थू-थू मची।
अब अगर वजीर-ए-आजम मोदी ऐसे कामों को बेमिसाल (अभूतपूर्व) बता गए तो बेमिसाल लफ्ज की तशरीह (अभूतपूर्व शब्द की व्याख्या) नए सिरे से करने की सख्त जरूरत महसूस होती है।वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार की तारीफों के पुल बांधते हुए वजीर-ए-आजम मोदी ने कह दिया कि उत्तर प्रदेश में बहन-बेटियों की हिफाजत का बंदोबस्त मजबूत है, प्रदेश में माफिया राज खत्म हो चुका है, भाई-भतीजावाद के बजाए विकास की सरकार काम कर रही है। जिस वक्त मोदी प्रदेश में नज्म व नस्क (कानून व्यवस्था) चाक व चौबंद बता रहे थे उसी वक्त आगरा में एक डाक्टर को अगवा करके करोड़ों का तावान मांगा जा रहा था। उससे चंद रोज कब्ल ब्लाक प्रमुखों और उससे पहले जिला पंचायतों के चेयरमैनों के एलक्शन में पूरे प्रदेश में हिंसा का नंगा नाच हो चुका था। बीजेपी के गुण्डों ने पूरे प्रदेश में हिंसा का जो माहौल बना दिया था वह वाकई बेमिसाल (अभूतपूर्व) था, शायद पीएम मोदी अपनी पार्टी के उन गुण्डों के लिए बेमिसाल लफ्ज का इस्तेमाल करना चाहते थे लेकिन गलती से कोविड-19 मैनेजमेंट की बात करते वक्त उनके मुंह से यह लफ्ज निकल गया। उनकी पार्टी के लोगों ने बम और गोली के जरिए ब्लाक प्रमुख का एलक्शन जीते यह बात इटावा के शहर पुलिस कप्तान के वायरल वीडियो में पूरे देश ने सुनी। प्रशांत कुमार नाम का यह पुलिस अफसर अपने सीनियर अफसरान को तकरीबन रोते हुए मोबाइल के जरिए इत्तेला दे रहा था कि साहब बीजेपी वालों के पास बम और गोली सबकुछ है उन्होने मुझे थप्पड़ मारा है। तो क्या यह समझा जाना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ सरकार में बीजेपी के वर्कर्स के हाथों तक बम और गोलियां पहुचा दी गई है। जिनके सहारे बीजेपी 2022 का असम्बली एलक्शन भी ठीक उसी तरह लड़ेगी जिस तरह ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायतों का एलक्शन लड़ा गया है।
मोदी ने बनारस में कहा कि योगी राज में उत्तर प्रदेश में बहन-बेटियों की हिफाजत हुई है बहन बेटियां पूरी तरह महफूज हैं। यह कहते वक्त मोदी भूल गए कि उनके बनारस आने से महज चार-पांच दिन कब्ल ही लखीमपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में बहन बेटियों की सरेआम साड़ियां और कपड़े खींच कर उन्हेें सरेआम बिरहना करने की कोशिश की जा चुकी थी। इन तमाम वाक्यात की खबरें मोदी गुलाम मीडिया ने भी नुमायां तौर पर दिखाई तो क्या यह मान लिया जाए कि मोदी ने किसी एक भी चैनल की खबरें नहीं देखीं अब अगर मोदी इस ख्याल से बहन बेटियों को उत्तर प्रदेश में महफूज बता रहे थे कि बीजेपी के गुण्डों ने बहन बेटियों के साथ दस्तदराजी की है उनकी तमाम हरकतें माफ हैं तो बात अलग है। कई चैनलों ने बनारस की मोदी की पूरी तकरीर लाइव दिखाई इसलिए बड़ी तादाद में लोगों ने उसे देखा और सुना हर तरफ एक ही रिएक्शन था कि आखिर योगी सरकार को बचाने के लिए मुल्क के वजीर-ए-आजम की सतह से इतनी बड़ी गलतबयानी क्यों की जा रही है? उन्होनें एक बड़ी गलत बयानी यह भी की कि इस सरकार में गेंहू और धान की रिकार्ड खरीद हुई है। किसानों को शिकायत है कि उनका गल्ला खरीदे जाने के बजाए बिचौलियों और व्यापारियों का गल्ला सरकारी सेण्टरों पर खरीदा गया है।वजीर-ए-आजम के इस चुनावी दौरे को सरकारी दौरा बनाने के लिए जिन मामूली कामों को प्रोजेक्ट बताकर उनका इफ्तेताह और संगे बुनियाद रखने का काम उनके हाथों कराया गया वह कारपोरेटर्स और मेम्बरान असम्बली के हाथों होने चाहिए थे जैसे देही राब्ता सड़कों और एक शहरी लिंक रोड की मरम्मत के बाद उनका इफ्तेताह टू ह्वीलर्स के पार्किंग का इफ्तेताह, सीवर लाइन की मरम्मत का काम, चार पार्कों का ब्यूटीफिकेशन, गंगा घाटों पर इत्तेला देने वाले बोर्ड लगाने का काम, मच्छेदरी में सीनियर सेकण्ड्री स्कूल की तरक्की, ड्राइवरों के लिए टेªनिंग सेण्टर का कयाम, सेण्ट्रल जेल की बाउण्ड्रीवाल की तामीर, गंगा में दो अदद रो-रो वैसल्स की शुरूआत, चार स्कूलों में तीन ख्वातीन हास्टल, पंचकोशी परिकर्मा मार्ग की मरम्मत और मजबूती का काम, बीएचयू में सौ बिस्तरों का एमसीएच विंग वहीं रीजनल इंस्टीट्यूट आफ आप्थालमालोजी का इफ्तेताह, अब सवाल यह है कि बीएचयू के इन दो कामों का इफ्तेताह तो मोदी कर गए अब बीएचयू के वाइस चांसलर क्या करेंगे?

