श्रीगोपाल नारसन
जो स्वयं प्राणों का दाता है
उनकी प्राण प्रतिष्ठा कैसी
जो स्वयं भाग्य विधाता है
उन्हें चमकाने की हिम्मत कैसी
यह श्रेय लेना कतई झूठ है
कि वे ही राम को लाए है
राम तो संसार के स्वामी है
नही किसी बुलावे पर आए है
राम साधन के नही भाव के भूखे है
महलों में नही झोपड़ी में जाते है
जब भी पुकारते है दीन-हीन
तब राम दौड़कर चले आते है
न राम को मंदिर की जरूरत है
न राम को शानोशौकत की चाहत है
राम सिर्फ दशरथ पुत्र ही नही
भगवान विष्णु के भी अवतार है
राम का नाम चाहे कोई भी ले
किसी भी जाति -धर्म का ले
जो भी राम के नाम को गाएगा
ओम,ओमेन,अल्लाह मिल जाएगा
राम उच्चारण की शक्ति अनूठी है
रक्तचाप की गति सामान्य रहती है
राम शब्द आस्था का ही नही
राम शब्द विज्ञान का भी है
राम नाम स्वास्थ्य को बनाता है
अंत मे वैतरणी पार लगाता है
राम को स्वार्थ से न अपनाओ
कभी बिना स्वार्थ आवाज़ लगाओ
देखना ,राम दौड़े चले आएंगे
जहां बुलाओगे ,खड़े नज़र आएंगे
राम के बालस्वरूप विग्रह की
उस अयोध्या में प्रतिष्ठा हुई है
जहां राम ने अवतार लिया था
साधु-संत धनपति सब आए थे
लेकिन गरीब नज़र नही आए थे
उन्हें वहां आने नही दिया गया
राम के इस प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर
अवकाश में भी कंजूसी की गई
कही पूरी, कही आधी छुट्टी की गई
हे राम ,आपने पूर्णता को पाया है
राम नाम पर आधी छुट्टी,क्या तुक है
राम नाम पर पूरी छुट्टी का हक है।

