Site icon अग्नि आलोक

कौन सा वक्त….!

Share

न जाने कौन सा वक्त है
जो वक्त के साथ
सब कुछ डलता जा रहा है।
न जाने कौन सा वक्त है
जो वक्त के साथ
सब कुछ बदलता जा रहा है।
न जाने कौन सा वक्त है
जो वक्त के साथ
सब कुछ खामोश करता जा रहा है।
न जाने कौन सा वक्त है
जो वक्त के साथ
सब कुछ ठहरता जा रहा है।
न जाने कौन सा वक्त है
जो वक्त के साथ
जो सब कुछ छीनता जा रहा है।
न जाने कौन सा वक्त है
जो वक्त के साथ
सब कुछ नजर अंदाज करता जा रहा है।

राजीव डोगरा ‘विमल’
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233
rajivdogra1@gmail.com

Exit mobile version