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सतपाल मलिक के खुलासा से क्या बदलेगा ?

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जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सतपाल मलिक अपने बयान में जो कुछ भी कहें हैं वह कोई नई बात नहीं है. ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने कोई गुप्त बात कह दिये हों. यह तमाम बातें देश के तमाम लोगों के बीच संज्ञान में है और वे इन तथ्यों पर अपनी मजबूत राय रखते हैं. पूर्व गवर्नर सतपाल मलिक ने अपने इंटरव्यू के माध्यम से जो किया वह केवल यही है कि उन्होंने आम जनता के बीच मौजूद तथ्यों की बकायदा पुष्टि कर दी है. जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन उपराज्यपाल सतपाल मलिक ने पुलवामा कांड पर जिन तथ्यों की पुष्टि की है, वह इस प्रकार है –

इन तथ्यों की पुष्टि पूर्व गवर्नर सतपाल मलिक के इंटरव्यू से हो जाता है, जो पहले से ही पब्लिक डोमेन में है. लेकिन सवाल इससे भी आगे का है कि आखिर तथ्यों और उसकी पुष्टि से क्या निकलने वाला है ? एक धर्मभीरु राष्ट्र में किसी तथ्य और उसकी पुष्टि का क्या कोई परिणाम निकलने वाला है ? नहीं. केवल सतपाल मलिक ही नहीं, पनामा पेपर्स, राफायल घोटाला, अडानी से जुड़ा हिंडेनबर्ग रिसर्च, लाख करोड़ लेकर भाग जाने की खबरों और उसकी पुष्टि के बाद भी इसका कोई परिणाम नहीं निकला. हलांकि कोहराम मचा लेकिन सारे मामले राख के नीचे ढ़ंकते चले गए. सत्ता और मीडिया की गलबहियां ने कोई परिणाम निकलने नहीं दिया. यहां तक आम जनता के बीच भी यह मजाक या लतीफों में बदल गया.

यही वह देश है जहां चंद करोड़ के बोफोर्स तोप घोटाले पर संसद हिल गई, आपातकाल के खिलाफ उभरे जनाक्रोश ने सत्ता पलट दी, लालू प्रसाद यादव के चंद करोड़ के चारा घोटाले ने लालू प्रसाद यादव को घोटालों का राजकुमार बना दिया और जेलों में सड़ा डाला. उसी देश में आज लाखों करोड़ के घोटालों पर पत्ता तक नहीं हिलता, तो इसके कारणों की पड़ताल तो होनी ही चाहिए. जब तक इसकी पड़ताल नहीं की और उस कारणों पर प्रहार नहीं किया जाता तब तक किसी भी खुलासे या घोटालों का कोई मायने मतलब नहीं निकलता सिवाय नये लतीफे गढ़ने के.

कहा जाता है कि ऊंचाइयों से लुढ़कता पत्थर गटर में जाने तक खूब तेज चलता है. उसे रोकना बहुत ही मुश्किल होता है. आज भारत उसी ऊंचाइयों से लुढ़क रहा है. तेज और तेज गति से लुढ़क रहा है, जो गटर में जाने तक लुढ़कता रहेगा. भारत देश एक ऐसी ही लुढ़कन बौद्ध काल के मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद लुढ़का जिसने भारत और उसकी जनता को 2 हजार सालों तक गटर में डाल दिया था, अब भारत एक ऐसी ही लुढ़कन पर तेजी से लुढ़क रहा है, जिसे रोकना मुश्किल ही नहीं असंभव भी बनता जा रहा है जब तक कि जनता सशस्त्र विद्रोह कर इसे न रोक लें.

बहरहाल सतपाल मलिक का पूरा इंटरव्यू जरुर सुने और जाने –

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