-सुसंस्कृति परिहार
बिहार चुनाव ने छठ पूजा के बाद रफ्तार पकड़ ली है। नेताओं के दौरे चरम पर पहुंच चुके हैं।यह चुनाव ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि इससे देश का भावी राजनैतिक परिदृश्य बदलने वाला है। चूंकि इस चुनाव में मोदी शाह और महागठबंधन के नेता राहुल गांधी आमने सामने हैं।इस चुनाव में बिहार की लोकल राजनीति पर देश के ये नेता हावी हैं। एक का उद्देश्य भविष्य के लिए अपनी सत्ता को कायम रखना है और दूसरे का उद्देश्य देश में संविधान बचाने, संविधान विरोधी लोगों को हटाना है।बाकी जो समस्या संपूर्ण देश के सामने हैं वे ही समस्याएं बड़े पैमाने पर बिहार में मौजूद हैं।जबकि कथित सुशासन बाबू ने एनडीए के साथ सरकार बनाके राज्य को गर्त में ढकेल दिया है।पलटू राम नाम से ख्यात इस नेता से बिहार वासी ऊब गए हैं। भाजपा और संघ की रीतिनीति से अब तो सवर्ण जातियों के लोग भी नाराज़ नज़र आ रहे हैं। फलत:अब पलटू राम का भी रामनाम सत्य होने वाला है। भाजपा वैसे भी इस बार नीतीश को निपटाने में लगी है। जबकि नीतीश और उनके साथी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा बता कर वोट हथियाने में लगे हैं। जबकि यह तय है कि भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। यह बात भाजपा के मेनोफेस्टो घोषणा के वक्त भी उभर कर सामने आ गई है। जबकि ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर नीतीशकुमार को मुख्यमंत्री घोषित किया जाएगा। महज़ दो मिनिट के इस कार्यक्रम में जानबूझकर प्रेस कांफ्रेंस नहीं की गई क्योंकि पत्रकार भी यही सवाल पूछने वाले थे। दूसरे इस मंच से किसी राष्ट्रीय नेता ने भी संबोधित नहीं किया वरना नीतीश कुमार भी बोलते और क्या बोल जाते।इससे भाजपा संकट में पड़ जाती ।

इधर नेपाल और लद्दाख के जेन जेड का असर भी बिहार पर पड़ा साफ़ दिख रहा है इसलिए इस बार बिहार का युवा तेजस्वी के जोश ख़रोश के साथ तेजी से जुड़ गया है। राहुल गांधी की बिहार यात्रा में तेजस्वी, अखिलेश यादव और कामरेड दीपांकर भट्टाचार्य के साथ जिस तरह युवाओं का अपार समर्थन मिला उससे भी बदलाव की लहर उठी है।युवा आक्रोशित हैं।उनकी भीड़ राहुल, तेजस्वी और प्रियंका की सभाओं में खूब उमड़ रही है।
बहरहाल,इस बार बिहार में जिस तरह बीजेपी नेताओं को चुनाव क्षेत्रों में अपमानित होना पड़ रहा है,उसके अलावा वोट चोर गद्दी छोड़ भी जिस तरह गूंज रहा है।वह ताकीद कर रहा है कि बिहार बदल रहा है। मोदी शाह की सभाओं में खाली कुर्सियां भी भाजपा से मोहभंग की दास्तां कह रही है।इसके अलावा इस बार मतदाता मौन नहीं बल्कि मुखर है वह खुलकर नीतीश बाबू की सरकार हटाने की बात कर रहा है। मोदी शाह से मोहभंग तो बहुत पहले से हो चुका है।यानि लगता है,तेजस्वी ही बिहार की कमान संभालेंगे।
सबसे बड़ी दुखकर बात यह भी मतदाताओं ने खुलकर मीडिया को बताई जो वोट चोरी की पुष्टि करती है।वे सहजता से यह कह रहे हैं कि पिछली बार भी हम तेजस्वी को वोट दिए थे किंतु ईवीएम ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया।ये एक ऐसा सच है जिसे मतदाता समझ गए हैं।
विदित हो, पिछले विधानसभा चुनाव में ऐसा ही बदलाव का माहौल था और मतदाता चुनाव परिणाम से हतप्रभ था।उस समय तेजस्वी के आरजेडी उम्मीदवारों को कई सीटों पर मार्जिन वोट से हराया गया था।कहा जाता है यदि वे सब सीट मिल गई होती तो तेजस्वी सरकार ही बनती।
इस बार हालात बदले हैं आरजेडी, कांग्रेस और सीपीआईमाले ने सोच समझकर जो सीटों का बंटवारा किया है वह अच्छे संकेत दे रहा है। दूसरी ओर बीजेपी जेडीयू और घटक दलों के अंदरुनी तनाव से भी एनडीए हताश है। मोदी शाह की देश दुनिया में गिरती छवि भी इसके लिए जिम्मेदार है।
अब तो मोदी शाह चुनाव आयोग की मेहरबानियों पर ही निर्भर है कि वह 67लाख काटे गए वोटरों से कैसा जीत का प्लान बनाए हुए है। बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान हत्या और मारपीट की ख़बरें आने लगी हैं वोटिंग के समय क्या स्थिति बनायी जाती है ये अंदर खाने की बात है। वैसे अमित शाह की लड़खड़ाती जबान और मोदीजी की बेतुकी हल्की बातें यह बता रही हैं कि यदि वोट चोरी ना की गई तो बिहार में एनडीए हार रहा है।ऐसा पिछले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विधानसभा चुनाव में हम देख चुके हैं।यदि यह संभव हुआ तो बिहार निश्चित तौर पर किसी अपरिचित संघी मुख्यमंत्री के हाथ में चला जाएगा। जबकि जनमत तो एनडीए के ख़िलाफ़ है।वह चीखता चिल्लाता रहेगा।