
डॉ. नीलम ज्योति
Happiness is the stage of heat not compromise. एक बात. दूसरी बात यह की, जीवन लेखन-भाषण-प्रवचन का पाखंड नहीं, आचरण का विज्ञान है।
लेकिन-………
दुनिया क्या कहेगी ?
आप कुछ भी करें..
. कितना भी
अच्छा काम करें
दुनिया उसमे भी
कुछ ना कुछ नुक्स
निकालती रहेगी।
और
अगर आप कुछ ना करें
तो दुनिया
आपको नाकारा कहेगी।
आप प्रेम करें तो भी दुनिया को
तकलीफ होगी…
आप फकीरी अपनायें तो दुनिया
आपको भगोड़ा कहेगी…
आप शांत और गंभीर रहें तो दुनिया
आपको ढोंगी और पाखंडी कहेगी…
आप नाचें,गाएं तो दुनिया आपको
पागल कहेगी…
“फिर क्यों चिंता करनी!”
कि
दुनिया क्या कहेगी ?
हम अपनी पूरी ज़िन्दगी इसी
सोच में गवा देते हैं कि
ये करूं या ना करूं,
ऐसा करूं या ना करूं
अगर करूँगा तो दुनिया क्या कहेगी…?
कहीं मुझ पर हसेमगी तो नहीं,
मुझे
ताने तो नहीं मारेगी?
“अपने ढंग से अपनी ज़िन्दगी को जीने की चाह रखें!”
अपनी ज़िन्दगी
अपनी मर्जी से जियें
न की दुनिया की मर्जी से।
और फिर देखें…
आज तक जिस आनंद और
सुख से आप वंचित थे
वो आनंद और सुख
आपके जीवन में
अवतरित होना शुरू हो जाएगा |
लोग तब भी कहेंगे,
लेकिन शीश नवाकर।
बिना खुद को जिए ही
मर जाएंगे
तो भी लोग कहेगें-
“‘राम नाम सत्य है।”
(चेतना विकास मिशन)