अग्नि आलोक

जब मैं मरूंगा…

Share

जब मैं मरूंगा
अपने साथ अपनी सारी प्रिय किताबों को ले जाऊंगा
अपनी क़ब्र को भर दूंगा
उन लोगों की तस्‍वीरों से जिनसे मैंने प्‍यार किया.
मेरे नए घर में कोई जगह नहीं होगी
भविष्‍य के प्रति डर के लिए.

मैं लेटा रहूंगा.
मैं सिगरेट सुलगाऊंगा
और रोऊंगा उन तमाम औरतों को याद कर
जिन्‍हें मैं गले लगाना चाहता था.

इन सारी प्रसन्‍नताओं के बीच भी
एक डर बचा रहता है :
कि एक रोज़, भोरे-भोर,
कोई कंधा झिंझोड़कर जगाएगा मुझे और बोलेगा –
‘अबे उठ जा सबीर, काम पे चलना है.’

Exit mobile version