सुसंस्कृति परिहार पिछले दिनों गौ हत्या के आरोपी जावेद की जमानत अर्जी नामंजूर करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने कहा कि सरकार को संसद में बिल लाकर गाय को मौलिक अधिकार में शामिल करते हुए राष्ट्रीय पशु घोषित करना होगा और उन लोगों के विरुद्ध् कड़े कानून बनाने होंगे, जो गायों को नुकसान पहुंचाते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब गाय का कल्याण होगा इन तभी इस देश का कल्याण होगा।
उन्होंने कहा है कि गाय का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। गाय को भारत देश में मां के रूप में जाना जाता है और देवताओं की तरह उसकी होती पूजा है। इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गाय के संरक्षण को हिंदुओं का मौलिक अधिकार में शामिल किया जाए। भारतीय शास्त्रों, पुराणों व धर्मग्रंथ में गाय के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कोर्ट ने कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के नेताओं और शासकों ने भी हमेशा गौ संरक्षण की बात की है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 48 में भी कहा गया है कि गाय नस्ल को संरक्षित करेगा और दुधारू व भूखे जानवरों सहित गौ हत्या पर रोक लगाएगा। भारत के 29 राज्यों में से 24 में गौ हत्या पर प्रतिबंध है।इस आदेश में जस्टिस शेखर कुमार यादव जी ने गाय के अनोखे श्वसन तंत्र की भूरि भूरि प्रशंसा की है और गाय की अद्भुत विशेषताओं पर प्रकाश डाला है वे अपने फैसले में लिखते हैं कि ‘वैज्ञानिक मानते हैं कि गाय इकलौता ऐसा पशु है जो सांस लेते समय ऑक्सिजन ही लेता है और ऑक्सिजन ही बाहर निकालता है। हिंदी में लिखे अपने आदेश में जस्टिस शेखर कुमार यादव ने दावा किया है, ‘भारत में यह परंपरा है कि गाय के दूध से बना हुआ घी यज्ञ में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे सूर्य की किरणों को विशेष ऊर्जा मिलती है जो अंतत: बारिश का कारण बनती है।’
जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कहा, ‘चूंकि गाय का अस्तित्व भारतीय सभ्यता के अभिन्न है इसलिए किसी भी नागरिक का बीफ खाना उसका मौलिक अधिकार नहीं हो सकता।’ आदेश में कहा गया कि संसद को कानून बनाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए और जो लोग गाय को नुकसान पहुंचाने की बात करते हैं उनके खिलाफ कड़े कानून लाने चाहिए।
फैसले के आखिर में जस्टिस शेखर कुमार यादव ने लिखा है ‘हम जब-जब अपनी संस्कृति भूले हैं, तब-तब विदेशियों ने हम पर आक्रमण किया है और आज भी हम न चेते तो अफगानिस्तान पर तालिबान का आक्रमण और कब्जे को भी हमें नहीं भूलना चाहिए।
जहां तक पुरातन संस्कृति का सवाल है तो हमारे वेदों में गौमांस खाने की उल्लेख मिलता है। यज्ञों में गाय के वध के प्रमाण मौजूद हैं गौ बलि और मांसाहार के विषय में सनातन धर्म में उल्लेख है:-. ऋग्वेद – (10,16,92) में लिखा है कि:-.”जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है, जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्चेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ में भेज दें। “.ऋग्वेद – (10,85,13) मे घोषित किया गया है:-.”एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायोंकी बलि की जाती हैं।”.।”.मनुस्मृति (अध्याय – 5, पद्य – 30) कहता है:- .”खाने योग पशुओं के माँस खाने मे कोई पाप नहीं है, ब्रह्मा ने भक्षण और खाद्य दोनों का निर्माण किया है।” .मनुस्मृति (अध्याय – 5, पद्य – 35) में उल्लेख है:- .”(श्राद्ध और मधुपर्क में) तथा विधि नियुक्ति होने पर जो मनुष्य माँस नहीं खाता वह मरने के इक्कीस जनम तक पशु होता है।”लगता है देश पर जो आक्रमण अब तक हुए हैं उसकी वज़ह जज साहब ने सही बताई है।जैसा कहते हैं गांधारी के शाप से अफगानिस्तान बर्बाद होता रहेगा।ये तमाम बातें गाय पर निबंध लिखने वाले बच्चों को बताई जानी चाहिए। इसके बरक्स,एक महत्वपूर्ण अध्ययन केअनुसार विश्लेषण में कहा गया है कि बौद्ध भिक्षुओं पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए ब्राह्मणों के लिए मांस का त्याग अनिवार्य हो गया था कि वे वैदिक धर्म के इस अंश से अपना पीछा छुड़ा लें। यह एक साधन था जिसे ब्राह्मणों ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पाने के लिए ।।वे मांसाहार से शाकाहारी हो गए।
विदित हो ,मुग़ल सम्राट बाबर, अकबर और जहांगीर ने गोहत्या पर पाबंदी लगाई थी। मैसूर के हैदर अली ने भी इस पर प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद वर्ष 1857 से ये फिर चर्चा का विषय बना ।महात्मा गांधी गोहत्या के ख़िलाफ़ थे. वर्ष 1924 में ‘एकता कांफ्रेंस’ में गोहत्या पर पाबंदी के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित किया गया. संविधान के अनुच्छेद 48 में गोरक्षा पर ज़ोर देने की बात की गई है।बहरहाल अब देश के हालात ये हैं कि कहते हैं हिंदुओं को गौमांस से परहेज़ है लेकिन आज भी मध्य भारत के गरीब, हर धर्म जाति के लोग तथा मरे जानवरों को उठाने वाले इसका बराबर भक्षण करते हैं क्योंकि यह सस्ता होता है। देश के कुछ राज्यों गोवा, नागालैंड, मिजोरम,आसाम में इसके मांस के बिना भोजन ही नहीं होता। इसलिए नेता इन राज्यों के चुनाव में इसकी उपलब्धता सम्बंधी बयान देते हैं।कहा जाता है कि प्रत्येक माह एक टे्न भर के गाएं नागालैंड के दीमापुर पहुंचती हैं जहां से पर्वतीय अंचलों में इसे भेजा जाता है। उधर अल कबीर जैसी बड़ी गौवध शाला मुम्बई में मौजूद है औरदेश के चार शीर्ष मांस निर्यातक हिंदू हैं। रिपोर्ट में अल कबीर एक्सपोर्ट (सतीश और अतुल सभरवाल), अरेबियन एक्सपोर्ट ( सुनील करन) एमकेआर फ्रोजन फूड्स (मदन एबट) पीएमएल इंडस्ट्रीज (एमएस बिंद्रा) बताये गये हैं। यहां से हज़ारों टन गौमांस विदेशों को भेजा जाता है।चोरी छिपे देश के अंदरूनी हिस्से में भी गौमांस की बिक्री होती है। पूर्वांचल में चिकन,मटन,पोर्क के साथ बीफ़ बिक्री की तख़तियां लगी होती हैं।
सिर्फ जावेद जैसे दो चार की जमानत अर्जी नामंजूर करने से गौमाता का संरक्षण संभव नहीं होगा। गौसेवा के नाम पर बड़ी बड़ी जगहों से गौमाताओं को स्लाटर हाऊस तक भेजा जा रहा है।उन पर कार्रवाई कीजिए जज साहब, अनुपयोगी गौमाता को जो बेचता है उसे दंडित कीजिए।जो नेता खुले आम बीफ भिजवाने की बात करते हैं उन्हें रोकिए।लेकिन यहां भी एक पेंच है जो हरगिज़ उचित नहीं होगा यह लोगों का मौलिक अधिकार है वह क्या पहने क्या खाए?यह भी सोचना चाहिए , तार्किक दृष्टि से कि कुदरत ने मनुष्य को वह इन्द्रि दी है जो मांस पचाने हेतु एक द्रव्य सृजित करती है । मनुष्य मूलतः मांसाहारी है कृषि आगमन के बाद और बौद्ध धर्म की चुनौतियों के बीच शाकाहार का पदार्पण हुआ।वह जाते जाते स्वेच्छा से जाएगा।आंकड़े यह बताते हैं जब से गौमांस के नाम पर माबलिंचिंग के मामले आए चोरी छिपे गौहत्या में वृद्धि हुई है और सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश में। बढ़ती मंहगाई भी एक कारण है । कुछ तो यहां तक कहते हैं कि बायलर मुर्गों की इतनी बड़ी तादाद में शहादत ने गायों को बचाने में बड़ा योगदान दिया है। फिर मिली जुली संस्कृति वाले हमारे देश में खान पान एक सा असंभव है ।इस बात पर कोई मतभेद कभी नहीं था कि गाय हिन्दुओं के लिए पवित्र है और वह इसकी पूजा करते हैं उनकी आस्था पर चोट ना पहुंचे इस बात का ख्याल रखना होगा।वह बहुत उपयोगी है।यह बयान जिस शिद्दत से जज साहब ने दिया उससे तो यही लगता है बेचारी हमारी गाय माता राष्ट्रीय पशु बन कर ही रहेगी ।जो मैं गौमाता का अपमान समझती हूं।गाय का कल्याण कैसे होगा इस पर विमर्श की ज़रूरत है क्योंकि इससे देश का कल्याण जुड़ा है।उसे वोट बैंक ना माना जाए उसका इस्तेमाल किसी को परेशानी में ना डाले तभी वह कल्याणकारी हो सकती है।
जब होगा गाय का कल्याण तभी देश का कल्याण !

