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रिटायर्ड जजों को कब मिले सरकारी पद ?

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राजेश चौधरी

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एस अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों को राजनीतिक पद दिए जाने को लेकर बहस फिर तेज हुई है। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसे पद रिटायरमेंट के एक से तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड के बाद ही दिए जाने चाहिए। वैसे यह बहस पुरानी है और इस पर लॉ कमिशन से लेकर संसद तक में सवाल उठ चुके हैं।

पहले क्या हुआ

यहां ध्यान देने की बात यह है कि कुछ पद ऐसे हैं, जिन पर शीर्ष अदालत और हाई कोर्ट से रिटायर्ड जज ही बैठ सकते हैं। मसलन, लॉ कमिशन के चेयरमैन या NHRC (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) के चेयरमैन। इसलिए इन्हें लेकर कोई विवाद नहीं रहा है। डिबेट उन पदों पर नियुक्तियों को लेकर होती है, जिन पर कोई भी बैठ सकता है और नियुक्तियां सरकार करती है।

राजनीतिक नियुक्तियां

क्या कहते हैं कानूनी जानकार

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने वाले जजों के पास काफी तजुर्बा होता है और इसका लाभ देश को मिलना चाहिए।

सरकार के हाथों में होती है ऐसी नियुक्तियां

लॉ कमिशन ने 14वीं रिपोर्ट में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस को सरकारी पद नहीं दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार, शीर्ष अदालत में ज्यादातर मुकदमों में एक पक्ष होती है। इसलिए ऐसी नियुक्तियों से आम लोगों के बीच गलत संदेश जाता है।

संवैधानिक कोर्ट सरकार के हर फैसले का जुडिशल रिव्यू करता है। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद ऐसे किसी संस्थान या पद पर रिटायर जस्टिस का जाना अपने पद को कम करने के बराबर ही है। राज्यपाल या राज्यसभा मेंबर जैसे पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां ही होती हैं। ट्रिब्यूनल या NHRC में नियुक्ति भी सरकार के हाथों में है। जो पार्टी सत्ता में है, वह ऐसी नियुक्तियां करती है। लेकिन जब वह विपक्ष में होती है तो ऐसी नियुक्तियों पर सवाल उठाती है।

कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां जब केंद्र में रहीं तो उन्होंने ऐसी नियुक्तियां कीं। इस मामले में बीजेपी के सीनियर नेता अरुण जेटली ने 5 सितंबर 2013 को राज्यसभा में कहा था कि रिटायरमेंट के बाद जजों को पद दिए जाने की व्यवस्था हो रही है और यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा है। बहरहाल, यह मुद्दा इतना सिंपल नहीं है। कई पद तो ऐसे हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस या चीफ जस्टिस ही बैठने की योग्यता रखते हैं। इन्हें लेकर विवाद भी नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि रिटायरमेंट के तुरंत बाद सरकार द्वारा कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए।

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