गोपाल राठी, पीपरिया
प्रिय मित्र कालूराम शर्मा के निधन की खबर ने झकझोर दिया l संदीप दादा ने जब यह खबर दी तो विश्वास ही नहीं हो रहा था l बार बार एक ही सवाल उठता रहा कि ऐसा कैसे हो सकता है ?
कालूराम शर्मा से हमारा संस्थागत ही नहीं व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्ते भी थे l इसलिए सरोज भाभी , सोनू ,बिट्टू सबके चेहरे याद आ रहे हैं l क्या बीत रही होगी इन लोगों पर ? यह सोच सोच कर ही सिहर जाता हूँ मैं l सोनू की नन्ही बेटी जुगनू से भी केआर को बहुत लगाव था l उस नन्ही बच्ची में हो रहे विकास को कालूराम बहुत बारीकी से देखकर उसे दर्ज करते थे और हो रहे बदलाव को रेखांकित करते थे l जिसे पढ़कर बहुत अच्छा लगता था l
कालूराम शर्मा जिन्हें हम के.आर. के नाम से जानते थे l एकलव्य में हम लोग लगभग साथ साथ आये थे l केआर ने जूलॉजी में एमएससी की थी l उन्होंने डॉ अरविंद गुप्ते ,भरत पूरे ,विवेक पारस्कर के साथ मिलकर मालवा में होषंगाबाद विज्ञान शिक्षण के विस्तार और विकास में महत्व पूर्ण योगदान दिया l उन्हें फोटोग्राफी का शौक था ,उनके ख़ज़ाने से वे जब हमें अपनी पुरानी फ़ोटो भेजते थे तो हम हक्के बक्के रह जाते थे l प्रकृति प्रेमी केआर जीव जगत का सूक्ष्म अवलोकन करते रहते थे l यही अवलोकन उनके लेखन का आधार था lअपने विषय लाइफ साइंस , पर्यावरण और शैक्षिक मुद्दों पर प्रतिष्ठित अखबारों में उनके लेख लगातार छपते रहे l इस तरह उनकी एक शिक्षाविद और लेखक के रुप में उनकी विशेष पहचान बन गई l उनमें विकसित इस लेखन कौशल के विकास के हम साक्षी रहे है l एकलव्य के पश्चात वे अज़ीम जी प्रेम जी फाउंडेशन से जुड़ गए थे l और फाउंडेशन के शैक्षिक प्रकल्पों को बहुत शिद्दत से अंजाम दे रहे थे l शिक्षक उन्मुखीकरण ,प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम निर्माण और नवाचार में सतत संलग्न थे l केआर की बहुत सी किताबें NBT, एकलव्य ,इकतारा और अन्य प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित हुई l बच्चों के लिए उपयोगी इन किताबो के अलावा HSTP पर केंद्रित उनकी किताब शैक्षिक नवाचार की यात्रा का सटीक दास्तावेज है lहम नर्मदा परिक्रमा पर निकले तो सबसे ज़्यादा उत्साह वर्धन मित्र कालूराम शर्मा ने किया l वे हमें रास्ते में लगातार फोन करते रहे और खरगोन आने का न्यौता देते रहे l हमने ओंकारेश्वर पहुंच कर उन्हें फोन किया कि हम खरगोन आ रहे है तो उन्होंने कहा कि यार में उज्जैन के लिए निकल गया हूँ l होली के अवकाश के कारण वे अपने परिवार के पास जा रहे थे l उनकी बहुत इच्छा थी कि खरगोन में शिक्षकों और बच्चों के साथ हमारा कार्यक्रम हो लेकिन टाइम की प्रॉपर मैचिंग ना हो सकी l फिर केआर ने ही कहा कि जब हम उत्तर तट की यात्रा पर आएंगे तो मंडलेश्वर में हमारा कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ रखेंगे l यह होली के पहले की बात है l रंग पंचमी के बाद जब हम धमनोद आये तो केआर का फोन आया कि मैंने कोविड वैक्सीन का पहला डोज़ लिया है इस कारण मुझे तेज बुखार है इसलिए मंडलेश्वर का कार्यक्रम नहीं हो पायेगा l उन्होंने महेश्वर में हमारे रुकने के लिए अभय सोलंकी से बात कर हमारी व्यवस्था की l उन्होंने दिनेश पटेल को फोन करके इस यात्रा के खर्च के लिए एक हज़ार की राशि देने को कहा जो हमें दिनेश से प्राप्त हुई lनर्मदा यात्रा पर शर्मा जी ने अपनी फेसबुक वॉल पर तीन चार पोस्ट लिखकर अत्यंत उत्साह दिखाया और हमें प्रोत्साहित किया l उन्होंने कहा था कि तबियत ठीक होने के बाद इस यात्रा और उसके द्वारा उठाये गए मुद्दों पर वे विस्तार से एक लेख लिखेंगे lसाथी कालूराम शर्मा का यूं अचानक चले जाना हमारी व्यक्तिगत क्षति है l उनके जैसे निस्वार्थी दोस्त और शुभचिंतक आज दुनिया मे मुश्किल से मिलते है l अलविदा दोस्त!
प्रख्यात प्रकृति शोधक, विज्ञान लेखक व वनस्पति शास्त्री और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय कालूराम शर्मा का 10 अप्रैल की दोपहर को निधन हो गया। वे 59 वर्ष के थे। उन्होंने पिछले दिनों ही कोरोना वैक्सीन लगवाई थी। उसके बाद उन्हें बुखार आया। उन्हें खरगोन के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वहाँ उनका कोविड टेस्ट किया गया था। लेकिन रिपोर्ट नहीं आई थी, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें आज सुबह खरगोन से एम्बुलेंस से इंदौर के अरबिन्दो अस्पताल ले जाया जा रहा था।
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के श्री दीपेंद्र बघेल ने कहा कि हमेशा ही उनसे बात होती रहती थी। जीवन में बड़ा शून्य आ गया है। वरिष्ठ शिक्षा विद प्रमोद दीक्षित ने श्रध्दासुमन व्यक्त करते हुए कहा कि हृदय पीड़ा से भर गया। वे बहुत विनम्र, संवेदनशील व्यक्ति थे। जब भी बात होती तो स्कूली शिक्षा और बच्चों के सीखने पर जरूर कुछ महत्वपूर्ण बताते रहे हैं। विश्वास नहीं कर पा रहा कि अब वह नहीं रहे। नेशनल बुक ट्रस्ट के श्री पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि कालूराम जी से मेरे कई दशक के ताल्लुक रहे। वे बेहद संघर्ष में तपे कुंदन थे। कालूराम शर्मा का ऐसे चला जाना मेरे लिए, वैज्ञानिक सोच के लिए और शिक्षा में नवाचार के लिए बड़ा नुकसान है। वे चींटी, कीड़े मकोड़े से लेकर प्रकृति की छोटी – छोटी बातों का अवलोकन करते, बच्चों का कौतूहल जगाते, खेलते। वे गरीबी, अभाव और संघर्ष की आग में तपा खालिस कंचन थे ।
एकलव्य के साथी एवं सेवानिवृत्त प्रोफसेर डॉ. भालेश्वर दुबे ने कहा कि के. आर भाई से सन् 1988 से घनिष्ठ पारिवारिक संबंध रहा हैं। एक उत्साही,नवाचारी और विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए वे सतत् प्रयत्नशील रहे। विज्ञान और शिक्षा पर अनवरत लिखने वाले कालूराम से अभी समाज को बहुत अपेक्षाएं थीं। उनकी एन बी टी से प्रकाश और जीवन पर पुस्तक का प्रकाशन होने वाला है। अपनत्व से लबरेज व्यक्तित्व जिसे मैं कभी भी नहीं भूल सकूंगा।
पर्यावरण विद एवं प्रोफेसर डॉ जयश्री सिक्का ने कहा कि वैज्ञानिक प्रयोगों और सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाने में उन्हें महारत हासिल थी।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता, लेखक एवं शिक्षा के क्षेत्र से संबध्द कुमार सिध्दार्थ ने अपनी भावपूर्ण श्रध्दांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि फाउंडेशन ने एक समर्पित, कर्मठ और सादगी पूर्ण जीवन जीने वाले साथी को खो दिया है। वे एक ऐसे मित्र थे, जो सबके प्रिय थे और स्वैच्छिक सेवा भाव की अनूठी मिसाल थे। सरल सौम्य, सादगी वाले केआर भाई का इस तरह विहार करना कि वे अब मिलेंगे ही नहीं। उनकी कमी पूरी हो नहीं सकती। वे सदैव हमारे हृदय में रहेंगे।
वरिष्ठ कवि आर तेलंग ने भावांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जीवन लगा देने वाले के आर भाई की प्रकृति ठीक प्रकृति जैसी ही थी “जैसा है वैसा होना”, उसमें इस गुण का बीजारोपण अस्सी व नब्बे के दशक में होशंगाबाद जिले में हो रहे नवाचारी विज्ञान के दिनों में हुआ।
राग तेलंग ने कहा कि के आर को मैं एक सदाशयी और नेचुरल व्यक्तित्व के रूप में याद करता हूँ। उसने मुझे कई संगतों-बैठकों में अपनी जीवन यात्रा और उसके पड़ावों के बारे में तफसील से बताया था कि कैसे एक दुर्धर्ष संघर्षमय बचपन से निकलकर वह यहां तक आया। जब भी उसके विज्ञान आलेख बड़े-छोटे अखबार या पत्रिका में शाया होते मैं बातचीत में तारीफ जरूर करता। अब तो लगता है प्रकृति को जब भी निहारूंगा तो फूल, पत्ते, लताएं, परिंदे, तितलियाँ, कीट-पतंगे सबके सब अपने सालिम अली यानी के आर का पता पूछूंगे तो क्या कहूंगा ! एक चलते-फिरते स्कूल को न चाहकर भी अलविदा कहते गला भर आ रहा है ।

