उत्तर प्रदेश की चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है और जो नतीजे आए हैं उसके बाद सबसे बड़ा सवालिया निशान बहुजन समाज पार्टीपर लग गया है। नतीजे ऐसे आए हैं जिसके बाद यही कहा जाएगा कि बसपा तो कहीं है ही नहीं। दहाई का आंकड़ा तो दूर की बात पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमटती हुई नजर आ रही है। चुनाव के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती
की खामोशी के साथ इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी के परंपरागत वोटर्स उससे छिटक कर बीजेपी और सपा की ओर जा सकते हैं और हुआ भी कुछ ऐसा। यूपी और पंजाब के चुनाव में बसपा का इस बार जो प्रदर्शन उसके बाद सबसे बड़ा संकट भारतीय राजनीति में बसपा के अस्तित्व को लेकर है।
चुनाव के पहले जो था सवाल उसका मिल गया जवाब
देश के सबसे बड़े सियासी राज्य में चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ ही यह सवाल उठने शुरू हो गए कि बहुजन समाज पार्टी कहां है ? यूपी में बीएसपी की ओर से शायद इससे पहले कभी ऐसी चुप्पी नहीं थी और यह अप्रत्याशित भी था। इसको लेकर सवाल पूरे चुनाव में बना रहा कि बहुजन समाज पार्टी की चुप्पी की क्या वजह है और इसका फायदा किसको हो सकता है। बसपा सुप्रीमो मायावती कुछ चुनावी सभा के जरिए अपनी मौजूदगी का अहसास कराती रही लेकिन वो खानापूर्ति ही लगी। प्रदेश की राजनीति को करीब से देखने वालों को भी आश्चर्य हो रहा था कि मायावती के तेवर बिल्कुल नजर नहीं आ रहे जो पहले दिखा करते थे।
2022 के चुनाव के शुरुआत से ही कई बातें गौर करने वाली थी। चुनाव की तारीखों का ऐलान के साथ सभी दलों ने प्रदेश में अपने पक्ष में चुावी माहौल बनाना शुरू किया लेकिन बीएसपी कहीं नहीं दिखी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस बात को स्वीकार किया कि चुनाव प्रचार में देर से एंट्री की। आज जो नतीजे आए हैं उसके बाद यही कहा जाएगा कि प्रदेश में अब पार्टी हाशिए पर चली गई है।
| साल | सीटें | वोट शेयर |
| 1993 | 67 | 11 |
| 1996 | 67 | 19.64 |
| 2002 | 98 | 23 |
| 2007 | 206 | 30.43 |
| 2012 | 80 | 26 |
| 2017 | 19 | 22 |
| 2022 | 01 | 12.79 |
दस साल में ऐसा क्या हुआ जो इस हाल में पहुंची पार्टी
जिस दल के पास दस साल पहले तक प्रदेश की सत्ता और आज सिर्फ एक सीट पर सिमट कर रह गई। पिछले चुनाव तक पार्टी का टिकट पाने के लिए नेताओं की लाइन लगी रहती थी और आज यह हाल। बसपा सुप्रीमो मायावती उतनी एक्टिव नहीं है और उनके पार्टी के कई पुराने नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। इसके अलावा मायावती के बाद पार्टी कौन संभालेगा इसको लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रही। इसके अलावा राजनीतिक गलियारों में मायावती की चुप्पी के दूसरे कारण भी गिनाए गए। प्रदेश में संकट तो खड़ा ही होगा इसके अलावा अब देश की संसद में भी उसके संख्या बल को लेकर है।
न सतीश चंद्र मिश्रा और न मायावती, कैसे पहुंचेगे राज्यसभा
बीएसपी अब अपने किसी भी नेता को राज्यसभा अपने कोटे से नहीं भेज पाएगी। बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा में सिर्फ तीन सदस्य रह गए हैं और उनमें से दो के कार्यकाल इसी साल कुछ ही महीने बाद समाप्त हो जाएगा इनमें पार्टी के नंबर दो नेता सतीश चंद्र मिश्रा भी हैं। वो भी अब राज्यसभा नहीं जा सकते।
बसपा सुप्रीमो मायावती मायावती भी किसी सदन की सदस्य नहीं हैं। यह माना जा रहा था कि इस बार विधायकों की संख्या ठीक ठाक रहती तो वह राज्यसभा जा सकती हैं लेकिन अब यह भी नहीं हो सकता।

