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 जहां चुनाव में 3 कोणी मुकाबला हो, वहां ईवीएम के दुरूपयोग में बहुत आसानी होती है

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विजय दलाल

जहां चुनाव में 3 कोणी मुकाबला हो। वहां ईवीएम के दुरूपयोग में बहुत आसानी होती है। कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के उम्मीदवारों के वोट तीसरी पार्टी जेडीएस को ट्रांसफर करने को है।
मीडिया से पहले ही समाचार दे दिए गए हैं कि 30 – 35 सीटें ऐसी हैं जहां जीत हार का अंतर 5000 या उससे कम रहेगा।
ईवीएम की गड़बड़ी को समझने के लिए कुछ बुनियादी बातें समझना जरूरी है।
भाजपा जहां बुरी तरह हार रही हो जिनमें 25 ,- 50 उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त तब वह हारकर भी अन्य विधान सभाओं के चुनाव और लोकसभा के चुनाव को ध्यान में रखकर ईवीएम से अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने का काम भी करती है।
हर बार लोगों को और विपक्षी दलों को झांसा देने के लिए जानबूझकर दो – तीन गाड़ियों में ईवीएम मशीनें ले जाने का नाटक करवाती है ताकि लोगों का ध्यान ही इस बात न जाए कि ईवीएम में हेराफेरी उसको बगैर हाथ लगाए या मशीन बदले मशीन में लगी पहले से चीप और उसमें प्रोग्रामिंग के जिस टेक्निक से हमारे मोबाइल और लैपटॉप वर्क करते हैं उस रिमोट टेक्निक से वोटों की हेराफेरी की जाती है।
1 विधानसभा चुनाव में बीजेपी शासित राज्य होना।
2 राज्य के सारे बुथ पर ईवीएम का दुरूपयोग नहीं होता है।
3 सर्वे के द्वारा विधानसभा क्षेत्र चुनें जाते हैं फिर उपलब्ध चीप और प्रोग्रामिंग वाली मशीनें वहां लगायी जाती है।
दो सूचनाएं प्रसार माध्यमों से मिली है।
एक पहले मिली थी। 16 या 19 लाख मशीनों का गायब होने का समाचार।
दूसरा अभी कुछ दिनों पूर्व का 6 लाख से अधिक खराब मशीनें ठीक करने भेजी।
हो सकता है ये मशीनें चीप और प्रोग्रामिंग के लिए गई हो ?
इसलिए 100% वीवीपीएटी पर्ची की समानांतर गणना बहुत जरूरी है।

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