
डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर
प्रत्येक मकान में एक तिजोरी या ऐसी आलमारी होती है जिसमें गृहस्वामी आदनी के रुपये, घर खर्च के लिए या आपातकाल के लिए अवश्य रखता है। वह मकान में किस स्थान पर होना चाहिए जिससे उसमें अनवरत धनवर्षा होती रहे अर्थात् भरी रहे। इसी पर विचार करते हैं।
कई लोगों के यहाँ होता है कि उनके यहाँ अचानक मेहमान आ जाते हैं, या साधु-संत अथवा त्यागी व्रती आ जाते हैं। उन्होंने अनुमानित 4-5 व्यक्तियों के लिए अपने यहाँ भोजन बनवाया होता है और अचानक परिस्थिति बनती है 8-10 व्यक्तियों के भोजन करने की। उनके भोजन कर लेने पर एक-दो व्यक्तियों की खबर और आ जाती है कि वे भी भोजन करेंगे। प्रसन्नता पूर्वक उन्हें भी भोजन करवाया जाता है। बाद में परिवारजन बैठकर अपनी मेहमान-नवाजी की समीक्षा करते हैं और कहते हैं यह तो आश्चर्य हो गया कि हमने व्यवस्था 4-5 व्यक्तियों की की थी और 12-13 व्यक्तियों ने भोजन कर लिया, कम भी नहीं पड़ा, परेशानी भी नहीं हुई। ऐसे किस्से जब कभी सुनने को मिलते रहते हैं। कई व्यवस्था 200 लोगों की करते हैं और सौ सवा सौ लोगों के जीमने के बाद ही भोजन कम पड़ने लगता है।
कई लोग खर्च करते रहते हैं, सामान्यरूप से उनकी पूर्ति होती रहती है, उन्हें कभी अभाव का पता ही नहीं चलता। और कुछ लोग अपनी तकदीर को रोते रहते हैं कि कितना भी कमाएँ पर पता नहीं उनके पास पैसा टिकता ही नहीं है। वे मेहनत भी खूब करते हैं। फिर भी अभाव या जितनी मेहनत की जा रही होती है, घर के 4 सदस्यों में तीन कमाने वाले होते हैं फिर भी पैसा टिकता नहीं है।
पैसा नहीं टिकने वाले लोगों को एक उपाय तो यह करना चाहिए कि जब भी लेन-देन करें तो सीधे अर्थात् दाहिने हाथ से करें। फिर जब किसी को पैसा दें तो हाथ उल्टा न करें अर्थात् हथेली नीचे की ओर न करें, सीधी ही करें। कहते हैं इससे पैसा हथेली में शीघ्र ही लौट आता है। प्रायः पैसे के मामले में पति अपनी पत्नी को मुनीम बनाकर रखता है, पैसा सम्हालने को दे देता है, और खर्च को या किसी को देना होता है तो उसी से मांग लेता है। इससे पत्नी भी खुश तथा कुछ काम से भी बचे। पत्नी को चाहिए कि पति से पैसा ले तो हथेली सीधी रखे और जब दे तब तो हथेली सीधी निश्चित ही रखे। इससे बरक्कत होगी।
लेकिन पैसा रखने की तिजोरी या आलमारी कहां और कैसी रखी जाये, बचत पर इसका प्रभाव पड़ता है। कुबेर धन का देवता माना जाता है, यह सब लोग जानते हैं। लेकिन कुबेर का निवास किस दिशा में है यह कम लोग जानते हैं। वास्तु कहता है कि आपके धन-दौलत, रुपये-पैसे पर कुबेर की निगाह पड़ने से धनवृद्धि होती है। निगाह कैसी? अलमारी या तिजोरी ऐसे स्थान पर रखी जाये कि उसके कपाट, उसका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और जब आप उसे खोलें तो उसपर कुबेर की निगाह पड़े। इसे ऐसे समझें कि यदि सूर्य उत्तर दिशा से निकलता होता तो आपके आलमारी खोलने पर प्रातः 7 से 11 बजे के बीच एक बार सूर्य की धूप उस पर अवश्य पड़ती। इस बाक्य को ठीक से पढ़ लें, धूप दिखाना नहीं है, क्योंकि उधर से धूप निकलना नहीं है।
तिजोरी उत्तर दिशा में खुले और उत्तर दिशा में रखना भी है, इस कारण उलझन में पड़ सकते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है? तो तिजोरी मकान के उत्तर दिशा वाले कमरे में रखना है, उसमें दक्षिण की दीवाल की ओर पीठ करके रखी जा सकती है।
तिजोरी रखने की सही स्थिति आदि से संबंधित ंकुछ और जानकारियाँ इस प्रकार हैं-
मंजूषादिस्थापनमपि तद्दिशि तथाविधं करणीयं।
द्वारं पूर्वोत्तरतः श्रेष्ठं हित्वा कोणांश्च वारुण्याम्।।
0 तिजोरी को उत्तर की ओर मुख करके रखना संभव न हो तो पूर्व की ओर भी किया जा सकता है।
0 किसी भी अवस्था में तिजोरी को दीवार के कौनों में सटाकर न रखें।
0 पैसे की तिजोरी या आलमारी के ऊपर कोई भारी सामान न रखें
0 तिजोरी के भीतर रुपया, पैसा, आभूषण, सम्पत्ति के कागजात या व्यवसाय के पत्रकों के अतिरिक्त कोई अन्य सामान न रखें।
0 तिजोरी के पाये जरूर हों।
0 मजबूरी में तिजोरी का मुह पश्चिम की ओर भी किया जा सकता है तब उसे पूर्वी दूवार के मध्य वाले पांच भागो में से एक में रखा जा सकता है।
0 तिजोरी को कभी भी दीवार में पूरी भीतर लेकर स्थापित न करें।
0 अनावश्यक सामान तिजोरी में रखने से सदा बचें।
0 तिजोरी कभी भी बीम के नीचे न रखें।
0 तिजोरी ठीक सामने कोई देवता की मूर्ति, तस्वीर न हो।
0 यही नियम दुकान पर भी लागू होते हैं। दुकान का कैश रखने का दराज जहां तक बने तो उत्तर दिश की ओर खुले, ऐसी व्यवस्था करना चाहिए।
सब कुछ अनुकूल है फिर भी यह न समझें कि वास्तु अनुकूज तिजोरी रख ली तो स्वतः भर जायेगी। अनुकूलता के साथ पुरुषार्थ करते रहना होगा। न प्रविशन्ते मुखे मृगाः बिना पुरुषार्थ के बैठे बैठे ही सिंह के मुख में हरिण प्रवेश नहीं कर जाते।
22/2, रामगंज, जिंसी, इन्दौर