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किस दिमागी बीमारी से हो रही हैं सबसे ज्यादा मौतें

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नरेन्द्र भल्ला
वैसे तो हमारे शरीर का हर अंग महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें मस्तिष्क का स्थान सबसे अहम है क्योंकि यह हमारी समूची काया का कंट्रोल सेंटर है। चिंता की बात यह है कि अनियमित लाइफस्टाइल ने बीते कुछ सालों में मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों में तेजी से इजाफा किया है। इनमें ब्रेन स्ट्रोक सबसे बड़ा बनकर उभरा है। मस्तिष्क की बीमारियों से हो रही मौतों में 68 फीसदी की मुख्य वजह ब्रेन स्ट्रोक ही है।

मामले दर मामले
दुनिया भर के वैज्ञानिक पता लगाने में जुटे हैं कि ब्रेन स्ट्रोक इतनी बड़ी बीमारी कैसे बन गया और कैसे इस पर काबू करें।

पहचानें सिरदर्द
भारत में दिमागी बीमारियां किस तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं, इस पर चार साल पहले एक रिपोर्ट लांसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में पब्लिश हुई थी।

दिल और दिमाग
नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नॉलजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार कोरोनरी धमनी रोग के बाद ब्रेन स्ट्रोक मौत का सबसे आम कारण है। इसके अलावा यह ‘क्रोनिक एडल्ट डिसएबिलिटी’ की भी एक आम वजह है। 55 वर्ष की आयु के बाद 5 में से एक महिला और 6 में से एक पुरुष को स्ट्रोक होने का खतरा रहता है। कुछ अरसा पहले ICMR ने भी एक अध्ययन किया था, जिसके मुताबिक देश में हर तीन सेकंड में किसी न किसी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक होता है और हर तीस मिनट में ब्रेन स्ट्रोक के कारण किसी न किसी व्यक्ति की मौत होती है।

बी फास्ट
भूलने और नींद में चलने जैसी बीमारियां भी गंभीर मानसिक रोग की श्रेणी में आती हैं, लेकिन इन सबमें ऊपर है डिप्रेशन। दुनिया में हर दिन सैकड़ों लोग डिप्रेशन के चलते आत्महत्या कर लेते हैं। मस्तिष्क से जुड़ी तमाम तरह की बीमारियों का इलाज करने वाले एक अमेरिकी डॉक्टर इससे बचाव के लिए कहते हैं कि लोगों को बी-फास्ट (Be Fast) याद रखना चाहिए- यानी बैलेंस, आई, फेस, आर्म्स, स्पीच और टाइम। संतुलन बनाए रखने में कठिनाई, धुंधली दृष्टि, चेहरे की कमजोरी, कमजोर भुजाएं और अस्पष्ट बोली ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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