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*किसे भ्रम है कि वो गांधी को मार पाया या मार सकता है ?*

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1. गांधी जी का टूटा चश्मा अगस्त 2020 में इंग्लैंड के ब्रिस्टल ऑक्शन में दो करोड़ साठ लाख रुपये (2,60,000,00) में बिका जबकि उस समय कोरोना की दूसरी जानलेवा लहर आई हुई थी और अपनी जान की जोखिम लेकर लोग नीलामी घर पहुँचे थे 

2. दुनिया के लगभग सभी देशों में गांधी जी की मूर्तियाँ हैं या उनके नाम पर सड़क अथवा चौक हैं. (मुस्लिम देशों को छोड़ना होगा क्योंकि वहाँ मूर्ति वर्जित है.)

3. गांधी जी की प्रयोग की हुई चप्पल, जेब-घड़ी, कटोरी और थाली 2009 में ग्यारह करोड़ रुपये में नीलाम हुईं (आज उनकी कीमत लगभग पचास करोड़ होगी).

4. 2009 में स्विट्ज़रलैण्ड की मोंटब्लैंक कंपनी ने सीमित संस्करण का एक पेन निकाला था, जिसकी निब पर गांधी जी का चित्र अंकित था. मूल्य था ग्यारह लाख रुपये—और वह हाथों-हाथ बिक गया । 

यह और ऐसे तमाम नये सच्चे प्रामाणिक तथ्यों के साथ सोचिये कि वायसराय माउंटबेटन ने यह क्यों कहा था कि अंग्रेज़ क़ौम व साम्राज्य गांधी जी की मृत्यु (हत्या) के कालपर्यंत दोष से बच गई जब उसे यह पता चला कि गांधी जी का हत्यारा एक भारतीय और हिंदू ही था । 

किसे भ्रम है कि वो गांधी को मार पाया या मार सकता है ?

( तथ्य साभार – योगेश डाबरा की वाल से )

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