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लूट और छीना झपटी का अमंगल  सूत्रधार कौन?

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शशिकांत गुप्ते

आज सीतारामजी बहुत ही गंभीर मुखमुद्रा में दिखाई दे रहें हैं।
हाथों में समाचार पत्र है,और एक ही खबर को बार बार पढ़ रहें हैं।
मैने जिज्ञासा प्रकट करते हुए पूछा ऐसी कौन सी कौतूहल भरी खबर है।जिसे आप बार बार पढ़ रहें हैं।
सीतारामजी ने मेरे समक्ष अखबार का वह पेज प्रस्तुत किया,जिस पेज पर वह खबर छपी है?
खबर का शीर्षक है,मंगल सूत्र लूटने वाले मात्र कुछ घंटों में पकड़ाए।
मैने कहा यह तो पुलिस की तत्परता है।
सीतारामजी ने कहा,मुझे इन आदतन अपराधियों की गिरफ़्तारी पर कोई आश्चर्य नहीं हो रहा है। ये तो सरेआम लूटते हैं। पकड़े जातें हैं और छूट भी जातें हैं।
मानव के मानस में अपराधिक प्रवृत्ति जागृत होने के बहुत से कारण है। इस मुद्दे पर व्यापक विचार विमर्श की जरूरत है।
सीतारामजी ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि,मंगल सूत्र लूटने वालों से ज्यादा स्त्रियों के गले से मंगल सूत्र छीनने वालों पर कब कार्यवाही होगी?
कृषि प्रधान देश में कृषकों को स्वय के द्वारा ही स्वयं की आत्मा की स्वयं ही हत्या करने की नौबत क्यों आती है?
असंख्य कृषकों की पत्नियों के मंगल सूत्र छीने गए हैं?
दोषी कौन?
देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वालों की सुरक्षा में भयंकर चूक होती है। तादाद में विस्फोटक रसायन के विस्फोट से चार दर्जन से अधिक सैनिकों का बलिदान होता है। इन सैनिकों में कितने विवाहित होंगे, उनकी अर्धांगिनियों के भी मंगल सूत्र छीने गए हैं?
दोषी कौन?
राजनीति,धर्म और समाज में पनप रहा भौतिकवाद,पूंजीवाद को बढ़ावा दे रहा है। पूंजीवाद के बढ़ने से हरएक व्यक्ति में विलासिता पूर्ण जीवन यापन करने की प्रवृत्ति जागती है।
विलासिता पूर्ण जीवन यापन करने के लिए आया का स्रोत या धन के आगमन का स्रोत प्रायः नबर दो का ही होता है?
विलासिता पूर्ण जीवन यापन की प्रवृत्ति को समाज में फैलाने का कार्य समाज के शीर्ष पर विद्यमान लोग ही करते हैं।
इन शीर्ष लोगो में राजनेता,
अभिनेता,खलनायक,धार्मिक नेता,समाज के धनबली और असमाजिक बाहुबली भी हैं।
मुख्य मुद्दा है, अकारण जिन विवाहितों का मंगल सूत्र छिना जाता है? दोषी कौन?
जबतक सिर्फ और सत्ता केंद्रित राजनीति का प्रचलन चलता रहेगा,और व्यवस्था परिवर्तन नही होगा,तबतक अपराधिक को प्रवृत्ति को पनप से रोका नहीं जा सकता है?
अपराधियों और राजनैतिक व्यवस्था का आपस में जबतक अप्रत्यक्ष समन्वय रहेगा,तबतक अपराधो की रोकथाम संभव नहीं है। आदर्श वाशिंग मशीन भी कम दोषी नहीं है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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