~ सुधा सिंह
वेदान्त में एक मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख मिलता है जिसका हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि वैज्ञानिक पूर्वजों ने अविष्कार किया था। सुविधा के लिए हम मान लेते हैं कि, 108 = ॐ (पूर्णता का द्योतक) है.
प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना :
1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ.
150,000,000 km/1,391,000 km = 108
पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं.
- सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ.
1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐ.
सूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं. - पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ.
384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐ.
पृथ्वी और चन्द्र के बीच १०८ चन्द्रमा आ सकते हैं. - मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन काल में विभिन्न ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है। - एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति 200 ॐ श्वास लेकर एक दिन पूरा करता है.
1 मिनट में 15 श्वास > 12 घंटों में 10800 श्वास > दिनभर में 100 ॐ श्वास और वैसे ही रातभर में 100 ॐ श्वास. - एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति एक मुहुर्त में 4 ॐ ह्रदय की धड़कन पूरी करता है।
1 मिनट में 72 धड़कन > 6 मिनट में 432 धडकनें > 1 मुहूर्त में 4 ॐ धडकनें. 6 मिनट = 1 मुहूर्त. - सभी 9 ग्रह भचक्र एक चक्र पूरा करते समय 12 राशियों से होकर गुजरते हैं और 12 x 9 = 108 = 1 ॐ.
- सभी 9 ग्रह भचक्र का एक चक्कर पूरा करते समय 27 नक्षत्रों को पार करते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं.
27 x 4 = 108 = 1 ॐ. - एक सौर दिन 200 ॐ विपल समय में पूरा होता है.
1 विपल = 2.5 सेकेण्ड.
1 सौर दिन (24 घंटे) = 1 अहोरात्र = 60 घटी = 3600 पल = 21600 विपल = 200 x 108 = 200 ॐ.
विपल 108 का आध्यात्मिक अर्थ 1 सूचित करता है.
ब्रह्म की अद्वितीयता/एकत्व/पूर्णता को 0 सूचित करता है. वह शून्य की अवस्था को जो विश्व की अनुपस्थिति में उत्पन्न हुई होती 8 सूचित करता है. उस विश्व की अनंतता को जिसका अविर्भाव उस शून्य में ब्रह्म की अनंत अभिव्यक्तियों से हुआ है।
अतः ब्रह्म, शून्यता और अनंत विश्व के संयोग को ही 108 द्वारा सूचित किया गया है।
जिस प्रकार ब्रह्म की शाब्दिक अभिव्यंजना प्रणव ( अ + उ + म् ) है और नादीय अभिव्यंजना ॐ की ध्वनि है उसी प्रकार ब्रह्म की गणितिक अभिव्यंजना 108 है.

