
शिवानन्द तिवारी
पूर्व सासंद
अमित शाह जी भले ही आज सत्ता के सहारे ताक़तवर नेता के रूप में दिखाई दे रहे हैं. लेकिन हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास का ज्ञान उनको नहीं है. हो भी तो कैसे ? जिस समय जय प्रकाश जी के नेतृत्व में बिहार का आंदोलन चल रहा था उस समय वे हाफ पैंट वाली उमर में थे. सन् 74 में उनकी उम्र महज दस वर्ष की थी. इनकी दूसरी सीमा यह रही है कि इनका राजनीतिक प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में हुआ है. जहाँ सत्य के अलावा सब कुछ पढ़ाया जाता है.
भारत की राजनीति में ग़ैर कांग्रेसवाद के जनक डॉक्टर राम मनोहर लोहिया थे. सन् 62-63 में ही डाक्टर लोहिया ने कांग्रेस को परास्त करने के लिए जब गैर कांगरेसवाद का नारा दिया था उस समय भारतीय राजनीति पर कांग्रेस का एकाधिकार था. केंद्र से लेकर राज्यों तक में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी. देश का लोकतंत्र कांग्रेस के विशाल बटवृक्ष के नीचे पनप नहीं रहा था. इसलिए देश में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए उन्हें देश से कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ना जरूरी लगा था. इसलिए उन्होंने न सिर्फ़ गैर कांग्रेस का नारा दिया था बल्कि एक अद्भुत गठबंधन बनाया. उस गठबंधन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और जनसंघ, जो अब भाजपा है, दोनों शामिल थे.
आज कांग्रेस कहाँ खड़ी है ! लोक सभा में मान्यता प्राप्त विरोधी का स्थान भी उसको नहीं प्राप्त है. दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कह रहे हैं कि देश की सभी पार्टियाँ समाप्त हो जाएँगी. सिर्फ़ भाजपा ही रहेगी. यहीं पटना में ही उन्होंने वह भविष्यवाणी की थी. आज तक उनके उस कथन का स्पष्टीकरण किसी भी कोने से नहीं आया है.
अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं. देश में खुले आम भगवा धारी संत सम्मेलनों में एक समुदाय विशेष के जन संहार का आह्वान किया जाता है और हमारे सर्व शक्तिमान गृहमंत्री द्वारा कार्रवाई करने की बात तो दूर, इसके विरुद्ध उनका मुँह भी नहीं खुलता है. किसने कल्पना की थी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने जिनको राष्ट्रपिता और गुरुवर रविंद्र नाथ ठाकुर ने जिनको महात्मा कहा उनको इस मुल्क में गाली दी जाएगी और हमारे गृहमंत्री जी के कानों में जूं तक नहीं रेंगेगी.
देश की राजधानी दिल्ली में खुलेआम गृहमंत्रालय के अंतर्गत आने वाली पुलिस ने दंगाइयों के साथ मिलकर एक समुदाय विशेष पर हमला किया. पुलिस की इस भूमिका के सैकड़ों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे. लेकिन जिन लोगों ने दंगे की शुरुआत की उनका और दोषी पुलिस वालों का बाल तक बाँका नहीं हुआ.
अमित शाह जी बिहार आये और नीतीश कुमार के अतीत की याद दिला गये. अतीत किसका क्या है यह बहस क्यों ! नीतीश जी राष्ट्र धर्म निभा रहे हैं. देश, संविधान और लोकतंत्र को बचाना ही आज का राष्ट्र धर्म है. यह जानते हुए भी अपने विरोधी को तोड़ने और समाप्त करने के लिए मोदी और शाह की जोड़ी किसी हद तक जा सकती है, नीतीश जी ने इनके सामने सीना तानकर खड़े होने का फ़ैसला किया इसका देश ने स्वागत किया है.
नीतीश कुमार को अतीत की याद दिलाने वाले अमित शाह जी अपना अतीत क्यों भूल जा रहे हैं. आपका अतीत तो ‘तड़ी पार’ का है. हाँ, यह बात हम दावे के साथ कह सकते हैं कि इस मामले में आपके अतीत के सामने नीतीश कुमार का अतीत कहीं नहीं ठहरता है.
शिवानन्द तिवारी ,पूर्व सासंद