प्रस्तुति : दिव्या गुप्ता (दिल्ली)
जिन कर्मचारियों ने चंद्रयान-3 के पुर्जे बनाए, उन्हें 17 महीने से तनख्वाह नहीं मिली है। उनका घर कैसे चल रहा होगा? वे अपना परिवार कैसे पाल रहे होंगे? क्या भारत की मोदी सरकार के पास पैसा नहीं है?
मोदी की विज्ञापनबाजी, रोड शो, में तो कोई कमी नहीं है। मोदी का चेहरा चमकाने के लिए पूरे देश का संसाधन झोंका जा सकता है। हजारों करोड़ चैनलों और अखबारों में झोंके जा सकते हैं लेकिन इतने महत्वपूर्ण काम करने वालों को 17 महीने से तनख्वाह नहीं मिली है।
सरकार का एक उपक्रम है HECL यानी Heavy Engineering Corporation Limited, यह रांची में है। इसके कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल रही है।
उनका कहना है कि हमने सैलरी की मांग की, लेकिन काम नहीं रोका क्योंकि देशहित का काम था। नेता भी इन कर्मचारियों की तरह क्यों नहीं सोच सकते?
देश की जनता को बेवकूफ बनाकर पीएम बना मोदी ये क्यों नहीं सोच सकता कि हम छह महीने तक रोज एक नई सदरी, नया कुर्ता पायजामा नहीं पहनेंगे?
मोदी ये क्यों नहीं सोच सकता कि हम 8500 करोड़ के विमान से नहीं उड़ेंगे, 100 करोड़ वाले से काम चला लेंगे, लेकिन देश काम करने वाले कर्मचारियों को सैलरी देंगे?
आप शायद भूल गए होंगे, जब चंद्रयान-2 लॉन्च हुआ था तब भी यही कहानी सामने आई थी। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के एक महीने पहले इसरो के वैज्ञानिकों की तनख्वाह घटा दी गई थी।
वैज्ञानिक नाराज हुए, गुहार लगाई कि वेतन न काटा जाए, तब उनके साथ कोई नहीं आया। वैज्ञानिकों ने अपने चेयरमैन को पत्र लिखा कि हम बहुत हैरत में हैं और दुखी हैं लेकिन कोई गर्वीला इंडियन उनके साथ नहीं खड़ा हुआ।
यह तनख्वाह भी तब काटी गई जब वैज्ञानिक चंद्रयान-2 लॉन्च करने की तैयारी में लगे थे। केंद्र की मोदी सरकार ने लॉन्चिंग से ठीक पहले आदेश दिया कि इसरो वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को 1996 से मिल रही दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि को बंद किया जा रहा है।
यह एक तरह की प्रोत्साहन अनुदान राशि थी जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू हुई थी।
जब चंद्रयान लॉन्च हो गया तो मोदी अपना कैमरा और बिकाऊ मीडिया लेकर पहुंच गए थे। वैज्ञानिक से गले मिले, भावुक हुए और बोले कि हमें गर्व है। हो सकता है कि इस बार फिर से वही करें।
हम और आप भी दांत चियार देंगे लेकिन ये नहीं पूछेंगे कि वैज्ञानिक रिसर्च का बजट 6.87% कम क्यों कर दिया गया? ये नहीं पूछेंगे कि कर्मचारियों को सैलरी क्यों नहीं दे रहे हो? ये भी नहीं पूछेंगे कि वैज्ञानिकों की तनख्वाह क्यों काट ली?
हम ये नहीं पूछेंगे कि 2012 से 2017 के बीच इसरो से 289 वैज्ञानिक पद छोड़कर क्यों चले गए? हम ये नहीं पूछेंगे कि वैज्ञानिक अपने पद छोड़कर क्यों जा रहे हैं? वे हमसे कहते हैं कि वे जो भी करें, हम ताली बजाएं और हम दांत चियारे ताली बजा रहे हैं।
खैर, जो भी हो, खुशी का दिन है। इस नकारा मोदी सरकार को हजार लानतों के साथ उनको नमन जिन्होंने अपनी मेहनत से भारत को अंतरिक्ष की महाशक्ति बनाया है।
उन कर्मचारियों को नमन, जिन्होंने 17 महीने की फाकाकशी के बावजूद इतना बड़ा काम किया। देश की जनता को बधाई। (चेतना विकास मिशन).

