बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने जनगणना के गजट नोटिफिकेशन का स्वागत किया है और कहा है कि जाति गणना का सबसे बड़ा असर पसमांदा मुस्लिम समुदाय पर पड़ेगा। अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दिकी ने अपील की कि जनगणना का फॉर्म भरते समय मुसलमान अपनी जाति की सही जानकारी दें और कट्टरपंथी मौलानाओं के बहकावे में ना आएं।
सिद्दिकी ने कहा कि पहली बार मुस्लिम समुदाय के भीतर मौजूद जातियों की भी विस्तृत गिनती की जाएगी। अब तक मुस्लिमों को सिर्फ एक धार्मिक समूह के रूप में दर्ज किया जाता रहा है जिससे उनके भीतर की सामाजिक और आर्थिक विविधताओं पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि इस जनगणना से मुस्लिम समुदाय की जातियों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति से जुड़े ठोस आंकड़े सामने आएंगे जो नीति निर्माण और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम आधार बन सकते हैं।
मुस्लिम कट्टरपंथियों के बहकावे नही आएं
जमाल सिद्दिकी ने कहा कि मुस्लिम कट्टरपंथियों के बहकावे नही आएं और अपनी जाति की सही जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि कुछ कट्टरपंथी मौलाना लोगों को गुमराह करने के लिए अपील कर रहे हैं कि जातिगत जनगणना के दौरान मुस्लिम अपनी जाति इस्लाम बताएं। सिद्दिकी ने कहा कि ये जातिगत जनगणना है, धार्मिक जनगणना नही। जाति संस्कृति का हिस्सा है, धर्म का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जातियां होती हैं। जिसके द्वारा मुस्लिम समाज के भीतर भी जातिगत विविधताओं को सामने लाया जाएगा तो उस एकरूपता की धारणा टूटेगी।
अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि इस पहल का सबसे बड़ा असर पसमांदा मुस्लिम समुदाय पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में भी 85 फीसदी जनसंख्या पसमांदा मुसलमानों की है जो पिछड़े हुए हैं। लेकिन सामाजिक, राजनीतिक क्षेत्र में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। ठोस आंकड़े नहीं होने के कारण उनकी आवाज अनसुनी कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश के सभी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड में भी एक भी पसमांदा मुसलमान सदस्य नहीं है।

